Happy Janmashtami : भगवान विष्णु के पूर्णावतार 'श्रीकृष्ण', जिनके जीवन में इन 6 स्त्रियों की थी अहम भूमिका
भगवान श्रीकृष्ण
Janmashtami 2025 : श्रीकृष्ण यानी भगवद् गीता का सार, श्रीकृष्ण यानी गोपियों संग रास, श्रीकृष्ण यानी माता यशोदा का कान्हा, जो चोरी कर माखन खाता है, श्रीकृष्ण यानी वीर योद्धा और श्रीकृष्ण यानी अलौकिक मित्र. यह कुछ उदाहरण हैं, जो हमें श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन कराती हैं. हालांकि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व इतना विराट है कि उन्हें शब्दों में पिरोना बहुत कठिन है. ऐसे श्रीकृष्ण के जीवन में कुछ महिलाएं बहुत खास थीं, जो उनके जीवन में मां, बहन, प्रेमिका, पत्नी और सखी के रूप में रूप में आईं और उनके व्यक्तित्व को और भी खास बनाया. उनके जन्म के अवसर पर पढ़ें यह खास आलेख.
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Janmashtami 2025 : श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं. उन्हें 16 कलाओं से युक्त पुरुष माना जाता है. इसका अर्थ यह हुआ कि एक मानव के अंदर जितने गुण होने चाहिए, वे सभी गुण उनमें विद्यामान थे. उनके व्यक्तित्व में एक ओर जहां गीता का दर्शन है, वहीं दूसरी ओर रासलीला भी है. वे एक वीर योद्धा हैं, तो दूसरी ओर माता के आंचल में छिप जाने वाले बालक भी, जो माखन चुराकर खाते हैं और माता की सजा भी भुगत लेते हैं. श्रीकृष्ण वो शख्सियत हैं, जो जीवन के इन तमाम रूपों को बखूबी जीते हैं और उसमें कोई कमी भी नहीं दिखती है. श्रीकृष्ण एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका जन्म उनके अपने मामा कंस की वजह से जेल में हुआ, माता जन्म देती हैं और उन्हें मजबूरन उनका त्याग करना पड़ता है. देवकी, उनको जन्मदेने वाली मां, उनके जीवन की पहली स्त्री थी. आइए श्रीकृष्ण के जीवन की 6 औरतों को जानें, जिनका उनके जीवन में अहम रोल रहा था.महाभारत, भागवत पुराण और हरिवंश पुराण के आधार पर उनके जीवन की 6 प्रमुख महिलाएं की जानकारी यहां दी जा रही है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को और खास बनाया.
श्रीकृष्ण की मां देवकी ने उन्हें कारागार में जन्म दिया था
देवकी : भगवान श्रीकृष्ण को जन्म देने वाली स्त्री उनकी मां देवकी थीं. देवकी, मथुरा के यादव वंश के राजा देवक की पुत्री थीं. वो कंस (मथुरा के राजा) की छोटी बहन थीं. देवकी का विवाह यादवों के प्रमुख वसुदेव के साथ हुआ था. देवकी के विवाह के वक्त ही यह आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी. इसके बाद कंस ने अपनी बहन देवकी, जिससे वह बहुत प्यार करता था उसे पति के साथ कारागार में डाल दिया था. उनकी संतानों में से छह को कंस ने जन्म के बाद ही मार डाला था. सातवीं संतान यानी बलराम को योगमाया की कृपा से रोहिणी के गर्भ में पहुंचा दिया गया था और आठवीं संतान श्रीकृष्ण थे. श्रीकृष्ण के जन्म के बाद उनके पिता वसुदेव ने उन्हें गोकुल यशोदा के पास पहुंचा दिया था. लेकिन श्रीकृष्ण के जीवन की पहली स्त्री उनकी मां देवकी थीं.

यशोदा के साथ श्रीकृष्ण ने आम बालक की तरह लीलाएं कीं
यशोदा : श्रीकृष्ण कहने से उनकी माता के रूप में यशोदा की ही याद आती है. यशोदा और श्रीकृष्ण का रिश्ता ऐसा है, जो किसी भी आम बालक और उसकी मां का होता है. श्रीकृष्ण ने यशोदा की गोद में अपना बचपन बिताया और तमाम बाल लीलाएं भी कीं. यशोदा और कृष्ण के रिश्ते ने ही कान्हा को माखनचोर बनाया था. यशोदा मातृत्व के उस रूप का प्रतीक हैं जो रक्त-संबंधों से परे केवल प्रेम और सेवा पर आधारित है. यशोदा गोकुल के मुखिया नंद की पत्नी थीं.
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प्रेम का प्रतीक श्रीकृष्ण की राधा
राधा : यशोदा जहां बालकृष्ण के प्रेम के रूप में जानी जाती हैं, वहीं राधा उनके किशोरावास्था का प्रेम हैं. यशोदा मां हैं, तो राधा उनकी प्रेयसी. राधा और कृष्ण का प्रेम आज भी सर्वश्रेष्ठ प्रेम संबंधों में गिना जाता है. राधा ने श्रीकृष्ण से निस्वार्थ प्रेम किया, उन्होंने अपने प्रेम के बदले कुछ भी मांगा नहीं. यही वजह था कि श्रीकृष्ण खुद कहते हैं कि कृष्ण के पास सभी आते हैं, लेकिन कृष्ण सिर्फ राधा के पास जाते हैं. इन दोनों का प्रेम अलौकिक और अद्भुत है, जिसे किसी भी रिश्ते से परे देखा जाता है. राधा, कृष्ण की पत्नी नहीं थीं, लेकिन मंदिरों में पूजा सिर्फ और सिर्फ राधे-कृष्ण की ही होती है.

अर्जुन की पत्नी और श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा
सुभद्रा : सुभद्रा भगवान श्रीकृष्ण की बहन थीं. इन दोनों का रिश्ता बहुत ही खास था और भाई-बहन के प्रेम का आदर्श उदाहरण भी था. सुभद्रा की शादी श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कराई थी, जबकि बलराम यह चाहते थे कि सुभद्रा का विवाह दुर्योधन से हो, क्योंकि दुर्योधन उनका शिष्य था. सुभद्रा की शादी से श्रीकृष्ण नाराज थे, लेकिन श्रीकृ्ष्ण जानते थे कि सुभद्रा की कोख से एक महान योद्धा जन्म लेगा जिसका नाम अभिमन्यु था, इसलिए उन्होंने सुभद्रा की शादी अर्जुन से कराई थी.
श्रीकृष्ण की पटरानी रुक्मिणी
रुक्मिणी : रुक्मिणी श्रीकृष्ण की पटरानी यानी मुख्य पत्नी थीं. रुक्मिणी विदर्भ की राजकुमारी थीं, उन्हें महालक्ष्मी का अवतार भी माना जाता है.विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बचपन से ही श्रीकृष्ण को पसंद करती थीं, लेकिन उनका भाई रुक्मी श्रीकृष्ण को पसंद नहीं करता था, जिसकी वजह से भगवान कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उससे विवाह किया था. रुक्मिणी का सौंदर्य और सौम्यता दोनों अद्वितीय थें. साथ ही वह धर्म, नीति और भक्ति में भी आदर्श थीं.
श्रीकृष्ण की सखी द्रौपदी
द्रौपदी : द्रौपदी महाभारत की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय चरित्र थीं. द्रौपदी को पंचाली, याज्ञसेनी और कृष्णा भी कहा जाता है. द्रौपदी को साहस, धर्म और आत्मसम्मान का प्रतीक माना जाता है. द्रौपदी का जन्म यज्ञ के अग्निकुंड से हुआ था. वह सामान्य स्त्री नहीं थी, इसलिए द्रौपदी का एक नाम ‘याज्ञसेनी’ भी है. स्वयंवर में द्रौपदी ने अर्जुन को पति के रूप में चुना था, लेकिन माता कुंती के आदेश और पांडवों की प्रतिज्ञा के कारण वह पांचों पांडवों की पत्नी बनीं. युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव ये पांचों द्रौपदी के पति थे. द्रौपदी और श्रीकृष्ण का संबंध दोस्ती का था. द्रौपदी ने कृष्ण को अपना सखा और रक्षक माना, इस रिश्ते को श्रीकृष्ण ने उसके चीरहरण के समय पूरी तरह सार्थक कर दिया था.
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लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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