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पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर की हालत खराब, एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे कई विभाग

Updated at : 02 Jan 2023 4:55 AM (IST)
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पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर की हालत खराब, एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे कई विभाग

भारतीय नृत्य कला मंदिर में कार्यरत कई शिक्षक रिटायर हो चुके हैं और उनकी जगह पर नये शिक्षकों के नहीं आने से एक के बाद एक विभाग बंद होते गये. हाल यह है कि यहां ओडिसी नृत्य विभाग 2018 के बाद से ही बंद है.

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साकिब, पटना: नृत्य और संगीत की शिक्षा देने के लिए पूरे राज्य भर में प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित भारतीय नृत्य कला मंदिर इन दिनों शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है. यहां वर्तमान में कुल छह शिक्षक ही बचे हैं, जबकि 150 से ज्यादा छात्र-छात्राएं हैं. यहां पूर्व में कार्यरत कई शिक्षक रिटायर हो चुके हैं और उनकी जगह पर नये शिक्षकों के नहीं आने से एक के बाद एक विभाग बंद होते गये. हाल यह है कि यहां ओडिसी नृत्य विभाग 2018 के बाद से ही बंद है. इस विभाग में कार्यरत एकमात्र शिक्षिका के रिटायर होने के बाद यह विभाग बंद हो गया. 2006 में मणिपुरी विभाग बंद हो गया था.

कथक में एक भी मुख्य शिक्षक नहीं

अन्य विभागों की बात करें, तो शास्त्रीय गायन विभाग में एक शिक्षिका हैं, यहां मुख्य शिक्षिका तो हैं, लेकिन कई अन्य जरूरी पदों पर शिक्षकों की जरूरत है. भरतनाट्यम नृत्य विभाग यहां का एक प्रमुख विभाग है. इसमें भी नृत्य की दो शिक्षिकाएं हैं. नृत्य के अतिरिक्त वादक या संगत से जुड़े शिक्षक नहीं हैं. कथक विभाग में फिलहाल एक भी मुख्य शिक्षक नहीं हैं. यहां तबला के शिक्षक ही अब बचे हैं. वहीं लोकनृत्य विभाग में एक शिक्षिका और लोकगीत विभाग में एक शिक्षक कार्यरत हैं.

एक-एक शिक्षक के भरोसे कई विभाग

इस तरह से यहां पांच में से चार विभाग एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. शिक्षकों की बहाली नहीं होने और नये पद सृजन नहीं होने से यहां हाल के वर्षों में नृत्य संगीत का कोई नया विभाग भी नहीं खुल पाया है. पटना में जहां एक ओर हर इलाके में नृत्य और संगीत की शिक्षा देने वाले निजी संस्थान खुल रहे हैं और वहां छात्र-छात्राओं की भीड़ लगी रह रही है वहीं दूसरी और कभी देश भर में प्रतिष्ठित माना जाने वाला और सरकारी संस्थान भारतीय नृत्य कला मंदिर बदहाल है.

जनवरी से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया

शिक्षकों की कमी के कारण भी बहुत से छात्र-छात्राएं नामांकन करवाने के कुछ वर्ष बाद यहां अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं. जबकि भारतीय नृत्य कला मंदिर में करीब 600 रुपये महीने की फीस में ही नृत्य और संगीत की शिक्षा दी जाती है. यहां छह वर्षीय संगीत प्रभाकर कोर्स में नामांकन होता है. इसकी क्लास सप्ताह में तीन दिन शाम 5 बजे से 7.30 बजे तक चलती है. सात वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे यहां नामांकन ले सकते हैं. अगले माह से यहां नामांकन कार्य शुरू होने हैं लेकिन शिक्षकों की कमी नृत्य-संगीत प्रशिक्षण में बड़ी बाधा बनी हुई है.

बहाली की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी

कला संस्कृति एवं युवा विभाग के अपर सचिव दीपक आनंद ने कहा कि भारतीय नृत्य कला मंदिर में शिक्षकों की कमी को दूर किया जायेगा. इसके लिए बहाली की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी. जो भी समस्याएं हैं उसे दूर कर लिया जायेगा.

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