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कोरोना जांच की फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले लैब की जगह चश्मे की मिली दुकान, सेंटर सील करने गयी जांच टीम हैरान

Updated at : 02 Oct 2021 10:00 AM (IST)
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कोरोना जांच की फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले लैब की जगह चश्मे की मिली दुकान, सेंटर सील करने गयी जांच टीम हैरान

पटना में कोविड टेस्ट का फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले लैब को सील करने से पहले जांच टीम ने निरीक्षण किया. मौके पर गयी टीम ने पाया कि जिस सेंटर से कोरोना की जांच रिपोर्ट दी जा रही थी, वो लैब नही बल्कि चश्मे की दुकान थी.

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पटना: फ्लाइट से यात्रा करने वाले यात्रियों को फर्जी आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट देने वाले प्लाज्मा डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच में रोजाना नये खुलासे हो रहे हैं. गुरुवार की रात को डायग्नोस्टिक सेंटर को सील करने से पहले जांच टीम ने सेंटर का निरीक्षण किया तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ.

डायग्नोस्टिक सेंटर के नाम पर  चल रहा था चश्मा  बेचने का काम 

जांच टीम ने पाया कि डायग्नोस्टिक सेंटर के नाम पर संचालक की ओर से चश्मा बेचने का काम किया जा रहा था. टीम ने काफी संख्या में चश्मा पाया है. इसके अलावा पैथोलॉजी जांच से संबंधित एक भी मशीन, लैब आदि कोई उपकरण नहीं मिले हैं. ऐसे में टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि सेंटर पूरी तरह से फर्जी है.

बिना अनुमति के करता था कोरोना टेस्ट

जांच में पता चला है कि प्लाज्मा डाग्नोस्टिक एवं पैथोलॉजी लैब को कोरोना वायरस के टेस्ट की मान्यता नहीं थी. यहां बता दें कि राजाबाजार स्थित प्लाज्मा डायग्नोस्टिक सेंटर में बीते 29 सितंबर को डीएम के आदेश पर छापेमारी की गयी थी. जिसमें पता चला था कि संबंधित लैब सरल पैथो व अन्य तीन लैब से मिलकर आरटीपीसीआर जांच का फर्जी रिपोर्ट यात्रियों को देता था. इसके बदले वह दो हजार रुपये वसूलता था. मामले की जानकारी लगते ही जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लैब को सील कर दिया.

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बिना अनुमति के आरटीपीसीआर जांच के लिए होती थी सैंपलिंग

राजाबाजार के 83 नंबर पिलर के पास स्थित प्लाज्मा डायग्नोस्टिक सेंटर में बिना सक्षम प्राधिकार के अनुमति के आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपलिंग होती थी. यह बात पुलिस की जांच में सामने आयी है. इसके साथ ही अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अविनाश कुमार सिंह के बयान के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में भी इस बात का जिक्र किया गया है.

तथ्यों के आधार पर जांच कर रही पुलिस

डॉ अविनाश सिंह ने अपने बयान में इस बात को अंकित किया है कि सेंटर से बरामद कागजातों से यह प्रतीत होता है कि तीन लैब सरल पैथोलैब प्राइवेट लिमिटेड सचिवालय कॉलोनी, जनरल डायग्नोस्टिक इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड नवी मुंबई व हिंद लैब्स डायग्नोस्टिक सेंटर निजी लाभ के लिए इस तरह की अवैध जांच में संलिप्त हैं. पुलिस दर्ज प्राथमिकी में दिये गये तथ्यों के आधार पर जांच कर रही है. शास्त्री नगर थानाध्यक्ष रामशंकर सिंह ने बताया कि मामले में जांच चल रही है.

दो लोगों को बनाया गया है नामजद आरोपित

इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में प्लाज्मा डायग्नोस्टिक से जुड़े प्रभात कुमार दुबे व दुर्गेश कुमार को आरोपित बनाया गया है. पुलिस इन दोनों से भी पूछताछ करेगी और साक्ष्य मिलने पर गिरफ्तार कर लिया जायेगा. विदित हो कि छापेमारी के बाद प्लाज्मा डायग्नोस्टिक से सरल पैथोलैब की आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट व बुकिंग स्लिप बरामद की गयी थी. इसके अलावे जनरल डायग्नोस्टिक व हिंद लैब्स डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच रिपोर्ट भी बरामद की गयी थी

Posted By: Thakur Shaktilochan

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