Bihar News: पहले भी सामने आये हैं किडनी चोरी या निकालने के मामले, सदन के बाहर माले ने किया था प्रदर्शन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 May 2022 3:41 PM
Bihar News: बिहार में किडनी चोरी या निकालने का यह पहला मामला नहीं है. ऐसे मामले पहले भी सामने आये हैं. पटना, सुपौल और कटिहार समेत दिल्ली में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं.
Bihar News: बिहार में किडनी चोरी या निकालने का यह पहला मामला नहीं है. ऐसे मामले पहले भी सामने आये हैं. पटना, सुपौल और कटिहार समेत दिल्ली में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. सहरसा के एक निजी अस्पताल के चिकित्सक डॉ अजय कुमार सिंह पर किडनी निकालने का आरोप लगा है. यहां पीड़िता ने बताया है कि पेट में दर्द होने पर पति को निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था. पीड़िता ने जिलाधिकारी को आवेदन देते हुए कार्रवाई की मांग की है. मालूम हो कि चिकित्सक के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 304, 504, 506 के साथ-साथ 18,19 ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन आर्गन एंड टिश्यू के तहत मामला दर्ज किया गया है.
राजधानी पटना में साल 2020 में बेगूसराय के मोहम्मद मुजाहिद की बीजीबी अस्पताल के चिकित्सक द्वारा किडनी निकालने को लेकर कंकड़बाग थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. चिकित्सक ने बाईं किडनी के बदले दाईं किडनी निकाल दी थी. मामले में आरोपित चिकित्सक पीके जैन ने 10 लाख रुपये देने और मरीज का इलाज कराने की बात कही थी. मामले ने इतना तूल पकड़ लिया था कि माले विधायकों ने बिहार विधानसभा के बाहर किडनी चोर चिकित्सक के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था.
साल 2020 में ही कटिहार के नगर थाना क्षेत्र के विनोदपुर मोहल्ले के चर्चित नर्सिंग होम की एक महिला चिकित्सक डॉक्टर नीलम मनीष पर किडनी निकाल लेने का आरोप लगा था. अरूप चक्रवर्ती ने चिकित्सक पर आरोप लगाया था कि पत्नी लता चक्रवर्ती के प्रसव के दौरान चिकित्सक ने किडनी निकाल ली है. उन्होंने कहा कि जून 2020 में प्रसव के दौरान पत्नी की दोनों किडनी सही सलामत थी. प्रसव के कई माह के बाद पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड कराया गया तो रिपोर्ट में एक किडनी नहीं होने की बात कही गयी. वहीं, चिकित्सक नीलम मनीष ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि पीड़िता की किडनी जन्मजात ही विकसित नहीं हुई है.
सुपौल में साल 2017 में एक निजी क्लिनिक में महिला की किडनी चोरी का मामला सामने आया था. घटना के संबंध में बताया जाता है कि सदर इलाके के बैरों गांव निवासी महिला का सिजेरियन ऑपरेशन शहर के निजी अस्पताल की डॉ शीला राणा ने 23 जून, 2017 को किया था. प्रसव के बाद महिला को बच्ची हुई. ऑपरेशन के 10 दिनों बाद पीड़िता अस्पताल छोड़ कर घर चली गयी. लेकिन, कुछ माह बाद पीड़िता को पेट में दर्द की शिकायत होने लगी. इसके बाद पीड़िता ने शहर के दूसरे निजी क्लिनिक में इलाज के लिए गयी. यहां जांच के बाद बताया गया कि महिला की दाहिनी किडनी नहीं है. इस कारण उसे दर्द रहता है.
दिल्ली में भी आयुर्वेदिक दवाइयों का कारोबार करनेवाले एक सीरियल किलर को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये देवेंद्र शर्मा ने करीब 100 हत्या करने का जुर्म कबूला था. पुलिस के मुताबिक, आयुर्वेदिक दवाइयों का कारोबार नहीं चलने के कारण वह जुर्म की दुनिया में कदम रखते हुए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट चलाने लगा. वह साल 1994 में कुख्यात डॉ अमित के गिरोह में शामिल हो गया था. गुड़गांव के किडनी कांड के मुख्य दोषी देवेंद्र शर्मा ने 1994 से 2004 के बीच करीब 125 अवैध किडनी प्रत्यारोपण करने का दावा किया है. बताया जाता है कि किडनी निकाल कर यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, कनाडा , ग्रीस और सऊदी अरब में ग्राहकों को मोटी रकम में बेचा जाता था.
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