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जेईई में बिहार के केंद्रों पर 80 प्रतिशत उपस्थिति, परीक्षा टालने के लिए तिकड़म में लगे दलों पर करारा तमाचा : सुशील मोदी

Updated at : 05 Sep 2020 9:02 PM (IST)
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जेईई में बिहार के केंद्रों पर 80 प्रतिशत उपस्थिति, परीक्षा टालने के लिए तिकड़म में लगे दलों पर करारा तमाचा : सुशील मोदी

पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा है कि राजद पर निशाना साधा है. उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि चरवाहा विद्यालय खोलने की मानसिकता के विपरीत एनडीए सरकार ने छात्रों को अच्छे पैकेज वाली नौकरी के योग्य बनाने के लिए शिक्षा-परीक्षा की गुणवत्ता पर कोई नरमी नहीं दिखायी.

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पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा है कि राजद पर निशाना साधा है. उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि चरवाहा विद्यालय खोलने की मानसिकता के विपरीत एनडीए सरकार ने छात्रों को अच्छे पैकेज वाली नौकरी के योग्य बनाने के लिए शिक्षा-परीक्षा की गुणवत्ता पर कोई नरमी नहीं दिखायी.

उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि छात्रों का एक कीमती साल बचाने के लिए कोरोना काल में भी जेईई-नीट की पूरी तैयारी की गयी. सुरक्षा-सुविधा का ख्याल रखा गया. बस और ट्रेन की व्यवस्था करायी गयी. जेईई में बिहार के केंद्रों पर 80 फीसद तक उपस्थिति उन दलों पर करारा तमाचा था, जो परीक्षा टालने के लिए तिकड़म में लगे थे.

सुशील मोदी ने कहा कि विपक्ष जेईई-नीट का विरोध कर लाखों छात्रों का एक सत्र बर्बाद करना चाहता था. वे सुप्रीम कोर्ट गए, तो परीक्षा के विरुद्ध दो बार उनकी याचिका खारिज हुई. जब इस मुद्दे पर राजद-कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किये, तो उन्हें छात्रों का समर्थन नहीं मिला. यदि दो बार टल चुकी जेईई-नीट परीक्षा को फिर रद किया जाता, तो अगले साल इतनी ही सीटों पर दोगुने परीक्षार्थी होते और ज्यादा युवाओं को दाखिले से वंचित होना पड़ता.

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि कम पढ़े-लिखे राजद-कांग्रेस के युवराज तो अपनी राजनीति चमकाने के लिए मेधावी छात्रों का करियर चौपट करने पर उतारू थे. लेकिन, केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के कड़े फैसलों ने युवाओं को बचा लिया. नवंबर 2005 में लालू-राबड़ी शासन को उखाड़ फेकने के बाद पहली बार बिहार में जो एनडीए सरकार बनी, उसने ढांचागत विकास, कृषि रोडमैप और शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया. दो चरणों में 3.5 लाख स्कूली शिक्षकों की नियुक्ति और आईआईटी, निफ्ट, बीआईटी-मेसरा जैसे तकनीकी शिक्षा संस्थानों के कैम्पस पटना में खुले. एनडीए है, तो मेधा का सम्मान है, लाठी में तेल पिलाने वालों का नहीं.

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