बिहार ने सरकारी टेंडरों के लिए चीन और पाकिस्तान को किया बैन, वर्तमान में चालू टेंडरों को भी रद्द करने का दिया निर्देश

पटना: अब बिहार के किसी सरकारी टेंडर में चीन, पाकिस्तान समेत अन्य किसी पड़ोसी देश की कंपनी शामिल नहीं हो सकेगी. केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार ने भी इससे संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं. हालांकि केंद्र सरकार की तरह ही इसमें भी छूट दी गयी है. इसके तहत जिन पड़ोसी देशों के साथ भारत के मित्रवत संबंध या उन्हें भारत की तरफ से विकासात्मक सहायता दी जाती है, उन देशों पर यह बंदिश लागू नहीं होगी. इसमें नेपाल, तिब्बत, म्यांमार और श्रीलंका आते हैं. परंतु इस परिधि से पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश बाहर हैं. इन देशों की कोई भी कंपनी बिहार के किसी सरकारी टेंडर में शामिल नहीं होगी और न ही उन्हें कोई काम ही दिया जायेगा.
पटना: अब बिहार के किसी सरकारी टेंडर में चीन, पाकिस्तान समेत अन्य किसी पड़ोसी देश की कंपनी शामिल नहीं हो सकेगी. केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार ने भी इससे संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं. हालांकि केंद्र सरकार की तरह ही इसमें भी छूट दी गयी है. इसके तहत जिन पड़ोसी देशों के साथ भारत के मित्रवत संबंध या उन्हें भारत की तरफ से विकासात्मक सहायता दी जाती है, उन देशों पर यह बंदिश लागू नहीं होगी. इसमें नेपाल, तिब्बत, म्यांमार और श्रीलंका आते हैं. परंतु इस परिधि से पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश बाहर हैं. इन देशों की कोई भी कंपनी बिहार के किसी सरकारी टेंडर में शामिल नहीं होगी और न ही उन्हें कोई काम ही दिया जायेगा.
वित्त विभाग के सचिव राहुल सिंह के स्तर से जारी इस महत्वपूर्ण आदेश का पालन सभी विभागों को अनिवार्य रूप से करने के लिए कहा गया है. हालांकि वित्त विभाग की तरफ से जारी आदेश में किसी पड़ोसी देश के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन केंद्र सरकार के स्तर से इससे संबंधित जारी आदेश के पालन करने की बात प्रमुखता से कही गयी है. इस आधार पर देशों के नाम स्पष्ट हो जाते हैं.
वित्त विभाग ने सभी विभागों को यह भी कहा है कि अगर किसी ऑन-गोइंग टेंडर में पड़ोसी देश की कोई कंपनी आ गयी है, तो तत्काल एक खंडन निकालते हुए उस टेंडर की प्रक्रिया को रद्द कर दें. कोई टेंडर जारी होने के बाद ऐसी किसी कंपनी ने आवेदन कर दिया है, तो उसे भी रद्द कर दें. अगर संबंधित कंपनी को काम नहीं मिला है, तो उसे तुरंत रद्द कर दें. हां, अगर किसी कंपनी को काम मिल गया है और उसने काम शुरू कर दिया है या किसी का काम पहले से चल रहा है, तो उसे कोई बाधा नहीं पहुंचानी है.
इस आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी पड़ोसी देश की अगर कोई कंपनी किसी टेंडर में शामिल होती है, तो संबंधित विभाग को केंद्र सरकार के स्तर पर गठित कमेटी से जारी एप्रुवल (अनुमति-पत्र) की जांच अनिवार्य रूप से करनी होगी. अगर कंपनी के पास यह एप्रुवल है, तो उसे अनुमति दी जा सकती है.
अगर किसी कंपनी को लेकर कोई संशय की स्थिति है, तो उस कंपनी से इससे संबंधित अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना होगा. अगर बाद में इस कंपनी के बारे में कोई गड़बडी सामने आती है, तो उससे काम वापस ले लिया जायेगा.गौरतलब है कि बिहार में लेनोवे, विज टेक जैसी कुछ चीनी कंपनियों ने पहले काफी काम किया है. कुछ एक टेंडर में इनके अलावा कुछ चीनी कंपनियों ने अपनी रूचि दिखायी थी.
Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya
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By Prabhat Khabar News Desk
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