ePaper

आवारा कुत्तों पर अदालत

Updated at : 13 Aug 2025 5:15 AM (IST)
विज्ञापन
stray dogs

आवारा कुत्तों की समस्या

Supreme Court : पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों स्थिति की भयावहता के बारे में बताते हैं. पिछले साल कुत्तों के काटने के लगभग 37 लाख मामले सामने आये थे. इनमें से लगभग 22 लाख मामले ग्रामीण इलाकों से थे.

विज्ञापन

Supreme Court : सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को पकड़ कर डॉग शेल्टर में भेजने और इसका विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का सर्वोच्च न्यायालय का सख्त आदेश वैसे तो राजधानी दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए है, लेकिन आवारा कुत्तों के काटने की समस्या पूरे देश में है. हाल के दौर में कुत्तों के काटने और बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के झुंडों के हमले कमोबेश पूरे देश में देखे गये हैं. ऐसे में, शीर्ष अदालत के सख्त दिशानिर्देशों को पूरे देश को चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें डॉग शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि कुत्तों के काटने की समस्या से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है और किसी भी कीमत पर शिशु और छोटे बच्चे रैबीज के शिकार नहीं होने चाहिए. शीर्ष अदालत की सख्ती को इससे भी समझा जाना चाहिए कि जब वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पीपल फॉर एनिमल्स के लिए हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तब अदालत ने उसे खारिज करते हुए कहा कि व्यापक जनहित में इस मामले में कोई हस्तक्षेप आवेदन स्वीकार नहीं किया जायेगा.

पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों स्थिति की भयावहता के बारे में बताते हैं. पिछले साल कुत्तों के काटने के लगभग 37 लाख मामले सामने आये थे. इनमें से लगभग 22 लाख मामले ग्रामीण इलाकों से थे. इनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक में कुत्तों के काटने की शिकायतें सबसे अधिक आयी थीं. वर्ष 2023 में कुत्तों के काटने के 30 लाख मामले सामने आये थे. जबकि इस साल अब तक कुत्ते के काटने से 37 मौतें हुई हैं. इनमें से ज्यादातर मामले रैबीज के थे. जाहिर है, आवारा कुत्तों की समस्या बहुत विकराल है.

इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से शीर्ष अदालत के आदेश को लागू करने की बात कही है. सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत डॉग शेल्टर बनाये जाने हैं, आवारा कुत्तों को वहां रखा जाना है और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाना है. अदालत ने एक सप्ताह के भीतर हेल्पलाइन बनाये जाने का भी निर्देश दिया है, ताकि कुत्तों के काटने के मामलों की रिपोर्ट हो सके. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आवारा कुत्तों के आतंक पर अंकुश लगने की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन इसके स्थायी हल के लिए लोगों और समाज को भी आगे आने होगा.

विज्ञापन
संपादकीय

लेखक के बारे में

By संपादकीय

संपादकीय is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola