ePaper

स्मृति शेष : ग्रामीण भारत के अंतर्मन की आवाज थे एमटी वासुदेवन नायर

Updated at : 27 Dec 2024 7:05 AM (IST)
विज्ञापन
MT Vashdevan Nair

एमटी वासुदेवन नायर

एमटी वासुदेवन नायर भारत के उन लेखकों में शुमार थे, जिनकी रचनाओं का अनुवाद हर भाषा में मिलता है. वह सुप्रसिद्ध पत्रिका मातृभूमि के संपादक भी रहे. उनके चले जाने से जो रिक्तता भारतीय साहित्य में आयी है, उसे भरना बेहद मुश्किल है.

विज्ञापन

MT Vasudevan Nair : आम लोगों का साहित्य ही भारतीय संस्कृति है. अपने इस कथन को चरितार्थ करने वाले एमटी वासुदेवन नायर के जाने से भारतीय साहित्य का एक युग खत्म हो गया है. वह दक्षिण की आवाज होते हुए भी समूचे भारत तथा विश्व के हाशिये पर पड़े हर एक व्यक्ति की आवाज बनकर उभरे. सिनेमा के जादूगर के रूप में भी उन्होंने अपनी पहचान बनायी. सच कहा जाए, तो एक समर्पित साहित्यिक व्यक्तित्व थे एमटी वासुदेवन नायर. वह भारतीय साहित्य जगत के एक सशक्त हस्ताक्षर थे. उन्होंने उन लोगों की आवाजें बुलंद की जो मानवता के इस दौर में भी गुम थीं. उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता साहित्य फिल्म तथा पत्रकारिता में एक ऐसी विरासत छोड़ गयी है जो आने वाली कई नस्लों को प्रेरित करेगी.


एमटी वासुदेवन नायर भारत के उन लेखकों में शुमार थे, जिनकी रचनाओं का अनुवाद हर भाषा में मिलता है. वह सुप्रसिद्ध पत्रिका मातृभूमि के संपादक भी रहे. उनके चले जाने से जो रिक्तता भारतीय साहित्य में आयी है, उसे भरना बेहद मुश्किल है. उन्होंने लोगों की आवाज बन साहित्य में नयी दुनिया का आवाहन किया. उनके जीवन का अधिकांश भाग कोझिकोड, केरल में ही बीता. उन्होंने अंग्रेजी व मलयालम के साथ-साथ आंचलिक पलक्कड़ भाषा में भी लिखा. उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जहां साहित्य सृजन की कोई परंपरा नहीं थी. इसके बावजूद उन्होंने जो कुछ किया, वह सचमुच अद्भुत है.

एमटी वासुदेवन नायर का जन्म 15 जुलाई , 1933 को पलक्कड़, केरल में हुआ था. उन्होंने अपनी आरंभिक पढ़ाई मलककवु के एलिमेंट्री स्कूल से की. वर्ष 1949 में विक्टोरिया कॉलेज, पलक्कड़ से विज्ञान में स्नातक किया. उन्होंने बहुत छोटी उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था. उन्होंने मद्रास की एक प्रसिद्ध पत्रिका से अपने लेखन का सफर शुरू किया. मातृभूमि से जुड़ने के साथ ही उनकी लेखन प्रतिभा को एक विशाल आकाश मिला और उन्होंने जम कर लिखा.
दर्जनों पुस्तकें लिखने के साथ ही उन्होंने अनेक कहानियां भी लिखीं और पटकथा लेखन भी किया. कई फिल्मों के निर्देशन के साथ ही 110 से ज्यादा फिल्मों के स्क्रीन प्ले लिखे. वह एक अद्भुत लेखक थे. उन्हें ग्रामीण भारत की दुर्दशा तथा ग्रामीण भारत के लोगों की आवाज को अंतर्मन से अभिव्यक्त करने वाला लेखक भी कहा जाता है.

भारतीय साहित्य में उनको एक बड़े दिलवाला तथा वैश्विक लेखक माना जाता है, जिन्होंने उन अनछुए विषयों पर लिखा जिन्हें भारत की अत्यधिक आवश्यकता थी. उन्हें आम जन के लेखक के साथ-साथ एक अद्भुत फिल्मकार के रूप में भी जाना जाता है. अनेक कार्यों में व्यस्त रहने के बाद भी उन्होंने साहित्य की लौ को जलाये रखा. उन्हें अनेक सम्मानों से नवाजा गया. वर्ष 1995 में साहित्य का सबसे बड़ा सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला. इसके अतिरिक्त केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, बॉयलर पुरस्कार तथा मातृभूमि पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

वर्ष 2005 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. उनसे मेरी एकमात्र भेंट पुणे फिल्म इंस्टिट्यूट में हुई थी. तब उन्होंने कहा था कि मेहनत तथा आत्म-निरीक्षण का कोई पल मत छोड़ो. इन दोनों से ही हार-जीत का निर्णय होता है और सफलता आपके साथ होती है. संभवत: इसी सोच के जरिये उन्होंने दुनिया जीती थी. वे व्यक्तित्व के स्वामी थे जिसने लोगों को जिया और लोगों के लिए जिया. उनकी रचनाएं दुनिया की अनेक भाषाओं में अनुदित हुईं हैं. ‘वाराणसी’ उनकी बेहद लोकप्रिय रचना है. ‘वाराणसी’ में उन्होंने वाराणसी को नये अर्थों में परिभाषित किया है. वह सचमुच भारत की अभिव्यक्ति तथा संस्कृति की एक ऐसी धारा थे जिसने दक्षिण से लेकर उत्तर तक को अपना बना लिया. लेखन, फिल्म निर्माण, निर्देशन, पटकथा व संवाद लिख अपनी प्रतिभा से सबको चकित करने वाले एमटी ने पत्रकारिता में भी अपना लोहा मनवाया.


वह लोगों के लेखक थे, जिन्हें भारतीय लोगों की नब्ज का गहरा ज्ञान था. उन्होंने इस ज्ञान के साथ एक नये भारत की कल्पना करते हुए मलयालम समाज तथा बदलते हुए भारत की संस्कृति को एक नयी आवाज दी. पच्चीस, दिसंबर, 2024 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके निधन से भारतीय साहित्य के एक युग का अंत हो गया है. भारतीय साहित्य में एमटी एक ऐसे लेखक के रूप में याद किये जायेंगे, जिन्होंने भारत को खोजा तथा उसे पर्दे पर प्रदर्शित किया. अलविदा एमटी!
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

विज्ञापन
डॉ कृष्ण कुमार रत्तू

लेखक के बारे में

By डॉ कृष्ण कुमार रत्तू

डॉ कृष्ण कुमार रत्तू is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola