बीमा सखी योजना का महत्व

Updated at : 11 Dec 2024 7:00 AM (IST)
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Bima Sakhi Yojna

बीमा सखी योजना

LIC Bima Sakhi Yojana : बीमा सखियों को पहले साल 7,000 रुपये, दूसरे साल 6,000 रुपये और तीसरे साल 5,000 रुपये मासिक अनुदान मिलेगा. इसके अलावा इन बीमा सखियों को कमीशन का लाभ भी मिलेगा. प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं एलआइसी एजेंट के रूप में काम कर सकेंगी.

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LIC Bima Sakhi Yojana : प्नधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) की बीमा सखी योजना की शुरुआत कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाया. बीमा सखी योजना के तहत अगले तीन साल में दो लाख महिला बीमा एजेंट नियुक्त होंगी. प्रारंभिक आंकड़े बताते हैं कि अभी तक 25 हजार बीमा सखियां तैयार भी हो चुकी हैं. बीमा के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की इस महत्वाकांक्षी योजना में 18 से 70 साल की 10वीं कक्षा पास महिलाओं को बीमा एजेंट बनाने के लिए प्रशिक्षण-मानदेय दिया जायेगा.

इन बीमा सखियों को पहले साल 7,000 रुपये, दूसरे साल 6,000 रुपये और तीसरे साल 5,000 रुपये मासिक अनुदान मिलेगा. इसके अलावा इन बीमा सखियों को कमीशन का लाभ भी मिलेगा. प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं एलआइसी एजेंट के रूप में काम कर सकेंगी. ग्रेजुएट बीमा सखियों को डेवलपमेंट अधिकारी के रूप में काम करने का मौका मिलेगा. प्रधानमंत्री ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें पर्याप्त अवसर दिये जाने की जरूरत बताते हुए कहा कि उनके सामने की तमाम बाधाओं को हटाया जाना चाहिए. बीमा सखी योजना के कम से कम दो लाभ दिखाई देते हैं. एक तो इससे शिक्षित और प्रशिक्षित स्त्रियों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने का अवसर मिलेगा.

दूसरा यह कि इससे ग्रामीण भारत में बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जो बहुत महत्वपूर्ण है. सच तो यह है कि हमारे यहां बीमा को जीवन की आवश्यकता के बजाय टैक्स बचाने का एक साधन भर समझा जाता है, और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में तो बीमा के मामले में कोई समझदारी ही नहीं है. ऐसे में, बीमा जैसे क्षेत्रों के विस्तार में महिलाएं नेतृत्व करेंगी, जो एक बड़ी बात है. प्रधानमंत्री ने कहा भी कि आने वाले दिनों में बीमा सखियां देश के असंख्य परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का काम करेंगी.

इस योजना का उद्देश्य खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बनाना और प्रत्येक पंचायत क्षेत्र में कम से कम एक बीमा सखी को नामांकित करना है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि देशभर में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं, और पिछले 10 वर्षों में सरकार ने महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को आठ लाख करोड़ से अधिक की सहायता दी है. बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति के प्रस्ताव का चूंकि इस क्षेत्र पर असर पड़ना तय है, इस कारण भी यह पहल महत्वपूर्ण है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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