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अर्थव्यवस्था में हो रहा सुधार

Updated at : 15 Mar 2021 10:46 AM (IST)
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अर्थव्यवस्था में हो रहा सुधार

वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी में आठ प्रतिशत की दर से और जीवीए में 6.5 प्रतिशत की दर से गिरावट आयी थी, जबकि वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी में 11 प्रतिशत की दर से और नॉमिनल जीडीपी में 15 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो सकती है.

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सतीश सिंह

मुख्य प्रबंधक, आर्थिक अनुसंधान विभाग, भारतीय स्टेट बैंक, मुंबई

satish5249@gmail.com

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.4 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है. पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की गिरावट आयी थी. वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी में आठ प्रतिशत की दर से और जीवीए में 6.5 प्रतिशत की दर से गिरावट आयी थी, जबकि वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी में 11 प्रतिशत की दर से और नॉमिनल जीडीपी में 15 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो सकती है.

तीसरी तिमाही में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में वृद्धि 3.4 प्रतिशत की दर से हुई, जबकि 2019-20 में वृद्धि 3.9 प्रतिशत की दर से हुई थी. वित्त वर्ष 2021 में इसमें 3.00 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो सकती है. तीसरी तिमाही में उद्योग क्षेत्र में वृद्धि सकारात्मक हो गयी है, जबकि पहली तिमाही में यह 35.9 प्रतिशत नकारात्मक थी. वृद्धि का कारण बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं में 7.3 प्रतिशत की दर से वृद्धि का होना है. निर्माण क्षेत्र में भी 6.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है. वित्त वर्ष 2021 में कृषि क्षेत्र को छोड़कर बिजली, गैस, पानी की आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं में सकारात्मक वृद्धि होने का अनुमान है.

तीसरी तिमाही में सेवा क्षेत्र में 1.0 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है. सकारात्मक वृद्धि का मुख्य कारण वित्तीय, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाओं में 6.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि होना है. तीसरी तिमाही में जीडीपी में सकारात्मक वृद्धि हुई है, लेकिन अंतिम उपभोग में नकारात्मक वृद्धि हुई है. सरकारी खर्च में वृद्धि के कारण अंतिम उपभोग व्यय में 2021 की चौथी तिमाही में सकारात्मक वृद्धि का अनुमान है. निजी अंतिम उपभोग व्यय में भी वृद्धि हुई है और 2021 की चौथी तिमाही में इसमें 3.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है. सकल स्थिर पूंजी निर्माण दर 2021 की दूसरी तिमाही में नकारात्मक रही, जो तीसरी तिमाही में वास्तविक और नाममात्र दोनों मानदंडों पर सकारात्मक हो गयी.

12 फरवरी, 2021 तक सभी अनुसूचित व्यावसायिक बैंक (एएससीबी) का वाइओवाइ ऋण वृद्धिशील आंकड़ा 6.6 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 6.4 प्रतिशत था. वाइटीडी के आधार पर एएससीबी का ऋण वृद्धि 12 फरवरी, 2021 तक 3.2 प्रतिशत रहा, जो राशि में 3.3 लाख करोड़ रुपये था. 12 फरवरी, 2020 तक 2.8 प्रतिशत की दर से वृद्धिशील ऋण में वृद्धि हुई, जो राशि में 2.7 लाख करोड़ रुपये थी.

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने अनुसूचित व्यावसायिक बैंक (एससीबी) के जमा और ऋण के तिमाही आंकड़े जारी किये हैं, जिसके अनुसार वाइओवाइ आधार पर ऋण में वृद्धि दिसंबर, 2020 में बढ़कर 6.2 प्रतिशत हो गयी, जो पिछली तिमाही में 5.8 प्रतिशत थी. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ऋण 6.5 प्रतिशत हो गया, जो दिसंबर 2019 में 3.7 प्रतिशत था. एएससीबी का जनवरी 2021 के दौरान वृद्धिशील ऋण वृद्धि लगभग सभी क्षेत्रों में बेहतर रहा.

जनवरी, 2021 के क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार 33 एससीबी का वृद्धिशील ऋण लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों जैसे, कृषि, सेवा, उद्योग, व्यक्तिगत ऋण आदि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई. वित्त वर्ष 2021 के अप्रैल से जनवरी के दौरान उद्योग और गैर-सरकारी वित्तीय कंपनी को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में वृद्धिशील ऋण में वृद्धि हुई है. उद्योग में ऋण वृद्धि नहीं होने का कारण उद्योग द्वारा बॉन्ड बाजार से पैसा जुटाना है. उद्योग के उपखंडों में खनन और उत्खनन, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, रत्न और आभूषण, पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद, परमाणु ईंधन, कागज और कागज के बने उत्पाद, चमड़े और चमड़े के उत्पाद, वाहन, वाहन के पुर्जे और परिवहन उपकरण आदि क्षेत्रों में जनवरी 2021 में जनवरी, 2020 से तेज ऋण वृद्धि हुई है.

बीएफएसआइ और रिफाइनरी को छोड़कर 3000 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों के विश्लेषण से पता चलता है कि टॉप लाइन में लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इबीआइडीटीए में लगभग 40 प्रतिशत की. तीसरी तिमाही में 2020 की तीसरी तिमाही की तुलना में कर के बाद लाभ (पैट) में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, फार्मा, सीमेंट, स्टील, उपभोक्ता टिकाऊ आदि क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किये हैं.

कंपनियों की ऋण और ब्याज देयता में सितंबर, 2020 में 20 प्रतिशत की कमी आयी है, जबकि सितंबर, 2019 में 26 प्रतिशत की कमी आयी थी, जबकि मार्च, 2020 में 37 प्रतिशत की. इससे कंपनियां बैंकों का कर्ज चुकाने में समर्थ हुई हैं, साथ ही साथ वे कुशल तरीके से अपना वित्तीय प्रबंधन करने में भी सक्षम हुई हैं. विविध कॉरपोरेट के रेटिंग्स के विश्लेषण से पता चलता है कि अगस्त, 2020 के बाद से कॉरपोरेट के ऋण अनुपात में सुधार हो रहा है.

26 महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अप्रैल, 2020 से अगस्त, 2020 की तुलना में सितंबर, 2020 से जनवरी, 2021 के दौरान उनकी रेटिंग्स में सुधार हुआ है. सितंबर, 2020 से जनवरी, 2021 के दौरान कुल मिलाकर 899 कॉरपोरेट की रेटिंग्स का उन्नयन हुआ है, जबकि 4998 कॉरपोरेट्स की रेटिंग्स नीचे गिरी हैं. भारत विश्व के उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसका कैलेंडर वर्ष 2020 की अंतिम तिमाही में सकारात्मक जीडीपी वृद्धि दर रहा है. आंकड़ों से साफ है अर्थव्यवस्था के सभी मानकों में निरंतर बेहतरी आ रही है.

Posted By : Sameer Oraon

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सतीश सिंह

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By सतीश सिंह

सतीश सिंह is a contributor at Prabhat Khabar.

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