प्रदीप सरदाना का लेख : नया कीर्तिमान रचने को तैयार 'भारत रंग महोत्सव'

Author : प्रदीप सरदाना Published by : Pritish Sahay Updated At : 28 Jan 2026 11:23 AM

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भारत रंग महोत्सव

Bharat Rang Mahotsav: इस वर्ष ‘भारत रंग महोत्सव’ का 25वां आयोजन हो रहा है. यह महोत्सव विश्व के सबसे बड़े नाट्योत्सव के रूप में उभर चुका है. इस बार के ‘भारंगम’ की खास बात यह भी है कि 33 नाटकों का निर्देशन महिला रंगकर्मियों द्वारा किया जा रहा है.

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Bharat Rang Mahotsav: विश्व में यूं तो वर्षभर कितने ही रंग महोत्सव होते रहते हैं. इनमें मॉस्को का ‘चेखव थिएटर फेस्टिवल’ और ‘न्यूयॉर्क थिएटर फेस्टिवल’ तो प्रतिष्ठित हैं ही, ‘डबलिन’ और ‘एडिनबर्ग’ सहित कुछ और भी नाट्योत्सव विख्यात हैं. न्यूयॉर्क के रंग महोत्सव को तो विश्व का सबसे बड़ा नाट्य आयोजन माना जाता रहा है. पर अब ‘भारत रंग महोत्सव (भारंगम)’ विश्व के सबसे बड़े नाट्योत्सव के रूप में उभर चुका है. इस वर्ष तो ‘भारत रंग महोत्सव’ इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह इसका 25वां आयोजन है. इस बार ‘भारंगम’ में विभिन्न भाषाओं व बोलियों में चयनित भारतीय और विदेशी नाटकों के कुल 277 शो का मंचन किया जा रहा है. बड़ी बात यह भी है कि 27 जनवरी से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस 25 दिवसीय उत्सव में देशभर के 40 केंद्रों पर नाटकों का मंचन होगा. साथ ही, विश्व के सभी महाद्वीपों में इस दौरान कम से कम एक नाट्य प्रस्तुति होगी. इस बार के ‘भारंगम’ की खास बात यह भी है कि 33 नाटकों का निर्देशन महिला रंगकर्मियों द्वारा किया जा रहा है. इस नाट्योत्सव में नाटकों के अतिरिक्त साहित्य, हस्तशिल्प और भारत की विभिन्न पाक कलाओं के रंग भी देखे जा सकेंगे. ‘भारंगम’ के दौरान श्रुति मंच से 17 पुस्तकों का लोकार्पण भी होने जा रहा है इस बार.

नाटकों के इस महाकुंभ में इस बार दिल्ली में ही 125 भारतीय नाटकों का प्रदर्शन होगा, जबकि 113 भारतीय नाटक देश के अन्य शहरों में मंचित होंगे. कुल मिलाकर, देशभर में 238 भारतीय नाटकों के 251 शो और 12 विदेशी नाटकों के 26 शो होंगे. पटना, रांची, कोलकाता, रायपुर, मुंबई, पुणे, गोवा, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, वाराणसी, प्रयागराज, देहरादून, उज्जैन, सूरत, अहमदाबाद, पुणे, चंडीगढ़, रोहतक, जालंधर, मंडी, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर समेत अंडमान, शिलांग, गंगटोक, अगरतला, इटानागर, इंफाल, लक्षदीप के साथ आंध्र प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु के विभिन्न नगरों में नाटक के शो होंगे. यदि गत वर्ष के ‘भारंगम’ की बात करें, तो 2025 में देश के 15 शहरों में कुल 150 नाटकों का प्रदर्शन हुआ था. उस तुलना में इस बार ‘भारंगम’ का आयोजन बहुत बड़ा है.

हालांकि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ‘थिएटर ओलिंपिक्स’ के आयोजक के रूप में 2018 में देश में 51 दिवसीय आयोजन के अंतर्गत 450 नाटकों का प्रदर्शन कर इतिहास रच चुका है. लेकिन ‘भारंगम’ का यह अब तक का सबसे बड़ा आयोजन है. यह इस महोत्सव के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है. इस वर्ष हिंदी, मराठी, बांग्ला, गुजराती, भोजपुरी, मैथिली, संस्कृत, उर्दू, तुलु, ताई खामती, न्यीशी भाषा के साथ कुछ आदिवासी व लुप्त होती भाषाओं के नाटकों को भी यहां देखा जा सकेगा. ‘आदिरंग महोत्सव’, ‘जश्ने बचपन’, ‘बाल संगम’, ‘पूर्वोत्तर नाट्य समारोह’, ‘कठपुतली थिएटर महोत्सव’, ‘नृत्य नाटक महोत्सव’, ‘शास्त्रीय नाट्य महोत्सव’ और ‘माइक्रो ड्रामा महोत्सव’ ‘भारंगम’ के विशेष आकर्षण रहेंगे. इस बार पहली बार वरिष्ठ नागरिकों के नाट्य समूह के साथ ट्रांसजेंडर समुदाय और यौन कर्मियों द्वारा भी कुछ नाटकों की प्रस्तुति होगी.

‘भारंगम’ के आयोजन को लेकर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने बताया कि ’25वें भारंगम में बहुत कुछ नया और बड़ा होने वाला है. नाटकों के इस महाकुंभ के प्रथम दिन ही हम एनएसडी का अपना एक रेडियो स्टेशन, एक पॉडकास्ट और एक ओटीटी प्लेटफॉर्म भी आरंभ करने जा रहे हैं, जिससे ‘भारंगम’ के नाटकों को विश्व भर में कहीं भी देखा और सुना जा सकेगा. हमारा उद्देश्य है कि जहां नाटकों की पहुंच संभव नहीं है, वहां भी इन माध्यमों के जरिये नाटकों को पहुंचाया जाये. यह एक गैर अभिजात्य अंतरराष्ट्रीय नाट्योत्सव है. इस महोत्सव को जो भी देखेगा, उसे यहां भाषा, क्षेत्र, सौंदर्यशास्त्र और विचारधारा का विशाल संगम देखने को मिलेगा.’ वहीं एनएसडी के उपाध्यक्ष प्रो भरत गुप्त ने कहा कि ‘भारंगम नाटक के लोकतंत्रीकरण और सार्वभौमीकरण के साथ अखंड सांस्कृतिक कथा और साझा रचनात्मक भारतीय लोकाचार का प्रतीक है.’

अंत में, विश्व में 700 ईसा पूर्व ग्रीस में नाटकों को उत्सव के रूप में मनाने का इतिहास मिलता है. हालांकि यह भी सच है कि नाटक की उत्पत्ति भारत में हुई. ‘ऋग्वेद’ के सूक्त में यम-यमी के संवाद में भी नाटक का अस्तित्व मिलता है. माना जाता है कि ‘ऋग्वेद’ से कथा कथन, ‘सामवेद’ से गायन, ‘यजुर्वेद’ से अभिनय और ‘अथर्ववेद’ से रस लेकर नाटक बना. विश्वकर्मा जी ने रंगमंच का निर्माण किया. यहां तक कि नाट्य शास्त्र की रचना कर भरत मुनि ने विश्व को ‘पंचम वेद’ दिया. सो, हमें नाटक और नाट्योत्सव का सम्मान करना चाहिए. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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प्रदीप सरदाना

लेखक के बारे में

By प्रदीप सरदाना

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक

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