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जनरल रावत के फैसले रहे दूरगामी

जनरल रावत के नेतृत्व में कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले हुए. पाकिस्तान की हरकतों का माकूल जवाब देने के लिए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक की गयी.

By जनरल शंकर रायचौधरी
Updated Date
जनरल रावत के फैसले रहे दूरगामी
जनरल रावत के फैसले रहे दूरगामी
PTI

हेलीकॉप्टर दुर्घटना में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीसी) जनरल बिपिन रावत का निधन हो गया है. जनरल रावत को देश का प्रथम सीडीएस बनने का गौरव प्राप्त हुआ. इससे पहले कोई चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नहीं था. उनके असामयिक निधन से बहुत बड़ा नुकसान हुआ है. लंबे समय तक चले विचार-विमर्श के बाद इस पद का गठन हुआ था. सरकार और सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने की कवायद काफी समय से हो रही थी.

जनरल रावत देश के पहले सीडीएस नियुक्त हुए. सीडीएस पद को लेकर दो तरह की बातें कही गयीं. सेना के भीतर भी अलग-अलग तरह के मत रहे. इस पद के सृजन के लिए सैद्धांतिक तौर पर अमेरिका में पहल शुरू हुई थी, वहां भी राजनीतिक खेमे में इसे लेकर अलग-अलग मत हैं. निश्चित तौर पर चीफ ऑफ डिफेंस के होने के कई तरह के फायदे हैं, लेकिन राजनीतिक पार्टियां जिस तरह से समझती हैं, उसके पीछे अलग निहितार्थ होते हैं.

मैं अपने यहां की राजनीतिक पार्टियों की नहीं, बल्कि अमेरिका और अन्य देशों की राजनीति की बात कर रहा हूं. हालांकि, हमारे बीच में भी एक विचारधारा है और यह महसूस किया जाता है कि अगर सभी सैन्य बलों को एक कमांड के नीचे लाया जाए, तो वह राजनीतिक तौर पर डिस्टर्बिंग हो सकता है. उनका तर्क होता है कि अगर इस तरह राजनीतिक रसूख में बढ़ोतरी होगी, तो शायद वह कहीं राजनीति के लिए चुनौती न बन जाए. कोई कहता नहीं है, लेकिन ये बात होती है.

दूसरी बात, हमारी सेना के तीन अंग हैं. इनमें थल सेना संख्या बल के मामले में सबसे बड़ी है यानी उसका आकार बड़ा है. कहा जाता है कि अगर सीडीएस थल सेना से हो गया है, तो थल सेना का प्रभाव अधिक होगा. इस तरह दो भिन्न मत हैं, जिन्हें लेकर पूर्व में बहस हो चुकी है. भिन्न-भिन्न मतों के बीच से ही कोई रास्ता अपनाना होगा.

सरकार ने स्पष्ट फैसला करके विधिवत विचार-विमर्श के बाद सीडीएस के पद का सृजन किया और जनरल बिपिन रावत की नियुक्ति की गयी. वे लगातार अच्छा काम कर रहे थे, उन्होंने कई प्रभावशाली और दूरगामी फैसले किये. छोटे से कार्यकाल में उनकी प्रभावी भूमिका रही. इस बीच यह दुखद हादसा हो गया. उम्मीद की जा सकती है कि यह सिस्टम आगे उसी रास्ते पर चलता रहेगा. इसे बंद नहीं किया जायेगा.

जनरल रावत बहुत काबिल ऑफिसर थे. उनके समय में महिलाओं के लिए सेना में स्थायी कमीशन की राह प्रशस्त हुई. महिलाओं का प्रवेश होना ही था, यह लंबी प्रक्रिया है, लिहाजा समय लगना स्वाभाविक ही है. जनरल रावत के समय में सीमा सुरक्षा को लेकर सख्ती का रुख दिखा. उनके नेतृत्व में पाकिस्तान की हरकतों का माकूल जवाब देने के लिए सर्जिकल और एयर स्ट्राइक की गयी.

जनरल रावत के नेतृत्व में कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले हुए. उनके अपेक्षित परिणाम भी प्राप्त हुए. वे बहुत क्षमतावान नेतृत्वकर्ता रहे. उनकी योजनाएं विभिन्न स्तरों पर सफल साबित हुईं.

थियेटर कमांड की चर्चा चल रही है. यह जनरल रावत की योजना का अहम हिस्सा था. इसमें भी दो तरह की बातें हैं. थियेटर कमांड का मतलब किसी विशेष इलाके के लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित करना यानी एक नेतृत्व की निगरानी में क्षेत्र विशेष का जिम्मा सौंपा जाए. जैसे चीन के मोर्चे पर किसी की तैनाती की गयी कि आप हिमालय की तरफ से उसे देखो, वह आपका थियेटर है.

दूसरा मत है कि एक कमांड या इलाके के लिए पहले से ही व्यवस्था होनी चाहिए यानी उसके सफल संचालन के लिए जरूरी है कि किसी क्षेत्र विशेष के लिए पहले से सैन्य सामग्री की व्यवस्था हो. दूसरा पक्ष यह है कि इतना सामान और संसाधान हमारे पास नहीं है. इस तरह से बहस चलती रहती हैं, दोनों ही तरह के मतों के पीछे अपने-अपने तर्क हैं. बात होने पर ही बीच का कोई रास्ता निकल आता है.

हादसे की वजह से बड़ा नुकसान हुआ है. इसकी क्या वजह रही, स्पष्ट तौर पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है. मेरा मानना है कि जब तक जांच रिपोर्ट बाहर नहीं आ जाती, किसी भी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है. हादसे की जांच रिपोर्ट निकलने के बाद संसद में उसे पेश किया जायेगा. फिलहाल, इस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा, न ही किसी को इस पर अनावश्यक टिप्पणी करनी चाहिए.

जिस चॉपर से हादसा हुआ है, वही हर जगह उड़ रहा है. यह चॉपर रूस से आयात किया गया है. बहुत सुरक्षित है़ यह सियाचिन में उड़ रहा है और नागालैंड में भी. ऐसे में चॉपर की तकनीकी खामी पर शक करने की कोई वजह नहीं है. हादसे को लेकर कई तरह की निराधार बातें भी की जा रही हैं. जब किसी देश के साथ विवाद की स्थिति रहती है, तो जाहिर है कि सेना प्रधान लोगों को मुंह खोलना ही चाहिए. इस हादसे की जो भी वजह होगी, वह जांच के बाद स्पष्ट हो जायेगी. सरकार का बयान इस मामले में महत्वपूर्ण व विश्वसनीय है.

जनरल रावत की अगुआई में सेनाएं लगातार अच्छा काम करती रही हैं. देश में अलग-अलग हिस्सों में अनेक तरह की चुनौतियां हैं. अभी सीडीएस पद पर किसकी और कैसे नियुक्ति होगी, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन नयी नियुक्ति तो जरूर होगी. वह नियुक्ति एयरफोर्स या नेवी से होगी या दोबारा आर्मी से होगी, यह उच्च स्तर पर विचार-विमर्श के आधार पर ही तय होगा.

इसमें विभिन्न सेवाओं का परामर्श शामिल किया जायेगा. आखिरकार नियुक्ति का फैसला सरकार को ही करना है. यह पद बहुत चुनौतीपूर्ण है. नये सीडीएस के समक्ष जनरल रावत के काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी. साथ ही उन्हें नयी चुनौतियों का भी सामना करना होगा. जल्द ही नये सीडीएस की नियुक्ति होगी और होनी भी चाहिए. सेना के आधुनिकीकरण की चर्चा भी हो रही है.

जब हम लोग सेना वाहिनी में थे, तब से सेनाओं को आधुनिक तौर पर कार्यकुशल बनाने की बात हो रही है. सेना प्रमुख रहते हुए मैंने भी सेना के साजो-सामान को बेहतर और आधुनिक बनाने की बात उठायी थी. आधुनिकीकरण होना ही चाहिए, हमारे पास जो हथियार हैं, उनका देश के भीतर निर्माण हो, नये हथियार बनाने की पहल हो. देश में इस पर काम हो रहा है. धीरे-धीरे निजी क्षेत्र को शामिल किया जा रहा है. सरकार भी इसमें शामिल है. दोनों के सहयोग से इसमें प्रगति हो रही है.(बातचीत पर आधारित).

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