सरायकेला की लोक अदालत में 7,626 मामलों का निपटारा, 2.35 करोड़ की वसूली

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 14 Mar 2026 6:10 PM

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लाभुक को लाभ देते और वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से मिलते न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी. फोटो: प्रभात खबर

Saraikela News: सरायकेला सिविल कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ, जिसमें सरायकेला और चांडिल अनुमंडल में कुल 7,626 मामलों का निपटारा किया गया. इस दौरान करीब 2.35 करोड़ रुपये की वसूली हुई. कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट

Saraikela News: झारखंड के सरायकेला सिविल कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी उपस्थित रहे. लोक अदालत के सुचारु संचालन के लिए कुल छह बेंचों का गठन किया गया था. इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष रामशंकर सिंह, उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मुकेश लुणावत, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, एसडीओ अभिनव प्रकाश सहित कई न्यायिक पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वादकारी और आम लोग भी शामिल हुए.

सरायकेला और चांडिल में 7,626 मामलों का हुआ निष्पादन

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान सरायकेला और चांडिल अनुमंडल न्यायालय की विभिन्न बेंचों द्वारा कुल 7,626 मामलों को सुनवाई के लिए लिया गया. इनमें से बड़ी संख्या में मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निष्पादन किया गया. इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 2 करोड़ 35 लाख रुपये की राजस्व राशि की वसूली भी की गई. डीएलएसए के सचिव तौसिफ मेराज ने बताया कि इस बार लोक अदालत में मामलों के निपटारे की संख्या पिछले लोक अदालत की तुलना में अधिक रही, जो न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है.

विभिन्न प्रकार के मामलों का हुआ समाधान

लोक अदालत में कई तरह के मामलों का समाधान किया गया. इनमें राजस्व से जुड़े मामले, दीवानी वाद, समझौता योग्य आपराधिक मामले, बिजली से संबंधित विवाद, एनआई एक्ट से जुड़े मामले, पुलिस अधिनियम और मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े छोटे मामलों का निपटारा किया गया. लोक अदालत के माध्यम से लोगों को त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण न्याय मिलने का अवसर मिला. इस व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों की सहमति से विवादों का समाधान किया गया, जिससे अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिली.

सरकारी योजनाओं के लाभ भी वितरित किए गए

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं के अंतर्गत लाभुकों को मुख्य अतिथि द्वारा लाभ भी प्रदान किया गया. इससे कार्यक्रम में शामिल लोगों को न्याय के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी और उसका लाभ भी मिला. अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत का उद्देश्य केवल विवादों का निपटारा करना ही नहीं, बल्कि समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाना और लोगों को न्यायिक प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना भी है.

न्यायालय परिसर में किया गया वृक्षारोपण

कार्यक्रम के समापन के बाद न्यायालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी समेत अन्य अधिकारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की बड़ी जरूरत है और वृक्षारोपण के माध्यम से प्रकृति को सुरक्षित रखने का संदेश समाज तक पहुंचाया जाना चाहिए.

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न्यायमूर्ति ने वृद्धाश्रम का किया दौरा

अपने सरायकेला प्रवास के दौरान न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने सरायकेला स्थित एक वृद्धाश्रम का भी दौरा किया. वहां रह रहे बुजुर्गों से मुलाकात कर उन्होंने उनका हालचाल जाना और उनसे बातचीत की. इस दौरान न्यायमूर्ति ने वृद्धजनों के बीच कपड़े और मिठाइयां भी वितरित कीं. उनके साथ मौजूद उनकी धर्मपत्नी ने भी वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों से संवाद किया और उनका हालचाल पूछा. इस कार्यक्रम ने न केवल न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी उजागर किया.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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