गिलगिट पर ब्रिटिश संसद

Updated at : 28 Mar 2017 6:10 AM (IST)
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गिलगिट पर ब्रिटिश संसद

‘भई गति सांप-छुछुंदर के री!’ इसका ठीक-ठीक मतलब कोई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से पूछे! चीन के साथ मिल कर बनाये जा रहे आर्थिक गलियारे की ओट लेकर वे एक तीर से कई शिकार करना चाहते थे. इरादा था कि विवादित गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत घोषित करके चीन को खुश कर दिया […]

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‘भई गति सांप-छुछुंदर के री!’ इसका ठीक-ठीक मतलब कोई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से पूछे! चीन के साथ मिल कर बनाये जा रहे आर्थिक गलियारे की ओट लेकर वे एक तीर से कई शिकार करना चाहते थे. इरादा था कि विवादित गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत घोषित करके चीन को खुश कर दिया जाये कि अब गलियारे की राह आसान हो गयी और यह इलाका विवादित नहीं रहा. दूसरी मंशा भारत को झटका देने की थी. यह क्षेत्र पाकिस्तानी संविधान में बतौर आधिकारिक प्रांत शामिल हो जाये, तो भारत नहीं कह सकेगा कि इससे गुजरनेवाले प्रस्तावित गलियारे से उसकी क्षेत्रीय स्वायत्तता का उल्लंघन हो रहा है और कश्मीर पर अधिकार को लेकर 1947 से चली आ रही स्थिति में पाकिस्तान बुनियादी हेरफेर कर रहा है.

नवाज शरीफ की मंशा यह भी थी कि पाकिस्तान के कब्जेवाले कश्मीर में जब-तब उठनेवाली स्वायत्तता की मांगों को भी हमेशा के लिए कमजोर कर दिया जाये. लेकिन, यही गिलगिट-बाल्टिस्तान अब पाकिस्तान के गले की हड्डी बन गया है. ब्रिटिश संसद ने सांसद बॉब ब्लैकमैन के प्रस्ताव को पारित करते हुए गिलगिट-बाल्टिस्तान को आधिकारिक प्रांत घोषित करने की पाकिस्तानी कोशिश की निंदा की है. इससे भारत को बड़ा समर्थन मिला है.

माना जा सकता है कि कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थिति अब और भी कमजोर हो गयी है. प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगिट-बाल्टिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर प्रांत का वैध और संवैधानिक हिस्सा है, जिस पर 1947 से ही पाकिस्तान ने कब्जा जमा रखा है और वहां के लोगों को तमाम बुनियादी अधिकारों से वंचित कर रहा है.

राजनयिक लिहाज से प्रस्ताव की भाषा भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें पाकिस्तान को दूसरे देश की ऐसी जमीन हड़पने का जिम्मेवार ठहराया गया है, जिस पर मालिकाने का विवाद चल रहा है. बंटवारे के वक्त से ही गिलगिट-बाल्टिस्तान सहित कश्मीर का एक हिस्सा उसके कब्जे में है. पाकिस्तान के संविधान में बदलाव किये बगैर इन इलाकों को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बताया जा सकता. इसी कारण अपने अवैध कब्जे को ढकने के लिए पाकिस्तान कहता रहा है कि ये दोनों क्षेत्र स्वायत्तता हैं.

भारत के ऐतराज के बाद गिलगिट-बाल्टिस्तान से होकर आर्थिक गलियारा बनाने के चीन के उत्साह में कमी आयी थी, जिसे पटरी पर लाने के लिए पाकिस्तान ने इस इलाके को प्रांत बनाने की चाल चली. बहरहाल, ब्रिटिश संसद के रुख से साफ है कि भारत को फंसाने के लिए फेंका गया फंदा अब खुद पाकिस्तान के ही गले में पड़ गया है.

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