पुत्रमोह और सत्ता की राजनीति

Updated at : 19 Jan 2017 6:11 AM (IST)
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पुत्रमोह और सत्ता की राजनीति

समाजवादी पार्टी के उपर अधिकार के लिए हो रही लड़ाई के घटना क्रम पर नजर डालें, तो एक बात स्पष्ट नजर आती है कि मुलायम सिंह भले ही शिवपाल यादव या अमर सिंह के साथ खड़े नजर आते हों, लेकिन अखिलेश के प्रति तमाम सैद्धांतिक विरोध के बावजूद कभी भी अखिलेश के प्रति वह प्रतिक्रिया […]

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समाजवादी पार्टी के उपर अधिकार के लिए हो रही लड़ाई के घटना क्रम पर नजर डालें, तो एक बात स्पष्ट नजर आती है कि मुलायम सिंह भले ही शिवपाल यादव या अमर सिंह के साथ खड़े नजर आते हों, लेकिन अखिलेश के प्रति तमाम सैद्धांतिक विरोध के बावजूद कभी भी अखिलेश के प्रति वह प्रतिक्रिया नहीं दिखायी, जो एक बागी के साथ अपेक्षित होती है.
मुलायम सिंह ने तमाम बगावतों और विरोधों के बावजूद अपने बागी बेटे अखिलेश के मन मुताबिक काम किया. जब चुनाव आयोग ने मुलायम सिंह से साइकिल चुनाव चिन्ह के संबंध में दस्तावेज मांगे थे, तो वहां भी मुलायम ने अपेक्षित दस्तावेज जानबूझकर पेश नहीं किये. अंततः यही महसूस होता है जब फर्ज कहीं और हो और दिल कहीं और, तो इंसान मुलायम हो जाता है.
पी विभूति, इमेल से
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