अति पिछड़े राज्यों के साथ बड़ा छल

Published at :22 Feb 2014 3:18 AM (IST)
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अति पिछड़े राज्यों के साथ बड़ा छल

संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामे के बीच बहुचर्चित तेलंगाना बिल को जिस तरीके से पास कराया गया, उसे संसदीय इतिहास में अच्छा नहीं माना जायेगा. अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद तेलंगाना देश का 29 वां राज्य बन जायेगा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सभा में सीमांध्र को विशेष पैकेज दिये जाने […]

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संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामे के बीच बहुचर्चित तेलंगाना बिल को जिस तरीके से पास कराया गया, उसे संसदीय इतिहास में अच्छा नहीं माना जायेगा. अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद तेलंगाना देश का 29 वां राज्य बन जायेगा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य सभा में सीमांध्र को विशेष पैकेज दिये जाने की घोषणा की. गृहमंत्री सुशील शिंदे ने भी कहा कि सीमांध्र को पांच सालों के लिए विशेष राज्य का दरजा दिया जायेगा.

यह निहायत ही राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित और अदूरदर्शी फैसला है. संसद के आखिरी दिन इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ. राजनीतिक विेषक मानते हैं कि कांग्रेस ने सिर्फ अपने हितों के मद्देनजर सीमांध्र को विशेष पैकेज देने वाला खतरनाक कार्ड खेला है, जबकि सीमांध्र का इलाका रघुराम राजन कमिटि के द्वारा सुझाये गये मानदंड पर खरा नहीं उतरता है. उल्लेखनीय है कि बिहार के लगातार दबाव और आंदोलन के बाद वित्त मंत्रलय ने केंद्रीय धन के न्यायसंगत आवंटन के लिए राज्य के सापेक्ष पिछड़ेपन के संकेतकों की पहचान करने के तरीके सुझाने के लिए रघुराम राजन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी.

इस कमिटि ने अपनी रिपोर्ट भी पेश की. इस रिपोर्ट के अनुसार ओड़िशा, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, अरु णाचल प्रदेश, असम, मेघालय, उत्तर प्रदेश और राजस्थान देश में कम से कम विकसित राज्य हैं. रघुराम राजन कमेटी ने विकास की जरूरत और प्रदर्शन के आधार पर पिछड़े और गरीब राज्यों को बहुआयामी सूचकांक पद्धति पर अतिरिक्त सहायता देने की सलाह दी. रघुराम राजन कमिटि की यह रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी गयी. जिस तरीके से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने सीमांध्र को विशेष दर्जा देने की बात की है, उससे तो साफ है कि अति-पिछड़े राज्यों में असंतोष और बढ़ेगा और इस बात को बल मिलेगा कि केंद्र वैसे राज्यों के साथ भेदभाव करता है, जहां उसकी सरकार नहीं है. ऐसी स्थिति में राज्यों का विश्वास केंद्र पर घटेगा. ‘‘टीआरएस का विलय कांग्रेस में हो जायेगा तो तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बन जायेगी और सीमांध्र को विशेष पैकेज दे देंगे तो नाराज कांग्रेसियों को मना लिया जायेगा’’, इस रणनीति पर अमल कर के कांग्रेस ने सिर्फ अति पिछड़े राज्यों के साथ ही नहीं, बल्कि देश के साथ छल किया है.

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