अभी दिल्ली दूर है भैया..

Published at :19 Feb 2014 5:10 AM (IST)
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अभी दिल्ली दूर है भैया..

।। चंचल।। (सामाजिक कार्यकर्ता) लगा कि जम्हूरी निजाम ब कायदे कायम हुआ और हमें अब हर नुक्ता चीं पर शामिल किया जायेगा, हमसे यह भी दरियाफ्त किया जायेगा कि इस अमुक मुद्दे पर आपकी क्या राय है. बहुमत जो बोल देगा वही रजिस्टर कार्यवाही पर दर्ज होगा. वही कानून की जद में होगा. मुला उसके […]

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।। चंचल।।

(सामाजिक कार्यकर्ता)

लगा कि जम्हूरी निजाम ब कायदे कायम हुआ और हमें अब हर नुक्ता चीं पर शामिल किया जायेगा, हमसे यह भी दरियाफ्त किया जायेगा कि इस अमुक मुद्दे पर आपकी क्या राय है. बहुमत जो बोल देगा वही रजिस्टर कार्यवाही पर दर्ज होगा. वही कानून की जद में होगा. मुला उसके गुपचुप इस्तीफे ने सब गुड़ गोबर कर दिया. अगर वह यह पूछता कि इस्तीफा दूं कि नहीं तो जीत नहीं की होती. और जब जीत नहीं की होती तो? कह कर कयूम मियां ने पब्लिक को देखा. पब्लिक ने आसरे चायवाले की भट्ठी को देखा पर आग कहीं नहीं दिखी. चुनांचे लोग फिर बहस को पर्त दर पर्त खोलने लगे. लाल साहेब का कहना था, ‘भैया सरकार की ऐसी की तैसी तो कीन उपाधिया भी कर लेते हैं. चाय के मोहताज हैं.

पर सरकार चलाना मामूली काम नहीं है. और ई अकल केवल कांग्रेस के पास है. बाद बाकी लग्गो-चप्पो. सऊर ही नहीं है.’ कीन ताव खा गये- पूरे पांच साल सरकार चलाये रहे अपने अटल जी. चिखुरी मुसकुराने. गोलार्ध को बदले. दाहिने से बायें पर आये. मुतमईन हुए कि धोती खिसकी तो नहीं है. लगे हाथ खुजली भी कर लिये- रामप्रसाद उपाध्याय उर्फ कीन उपाधिया! इसे सरकार चलाना तो कह सकते हो मुला उसे अटल सरकार चलाना नहीं कह सकते. अब पूछो कैसे? तो सुनो मंदिर बना? धारा 370 खत्म हुआ? देश में हिंदू राज्य कायम हुआ? कामन सिविल कोड लागू हुआ? नहीं न? तो इसे अटल सरकार नहीं कहते. इसे कांग्रेस की पिछलग्गो सरकार कहते हैं. हर दल का अपना उसूल होता है, अगर तुम दूसरे के ही उसूल पर चलोगे तो अलग कहां से हुए? ये जो जनता जनार्दन है न, यह सब जानती है. अगले चुनाव में उसने साफ-साफ कह दिया कि जब तुम्हें वही करना है, जो कांग्रेस करती आयी है, और कहती आयी है तो उसी को आने दो.

नवल उपाधिया ने चिखुरी का खुला समर्थन किया- पूरे बीस रुपिया औ पांच ईंट हमरी माई ने भी दिया था मंदिर बनाने वास्ते पर बाद में पता चला कि जो ईंट हमने दिया उ ससुरा मनोज के बद्र्वार में लग गया. कीन को ताव आ गया. ऐसा नहीं है. अकेले अटल की सरकार रहती तो सब होता मुला अटल के साथ बीस और भी दल जुड़े रहे, मजबूरी रही. मद्दू पत्रकार को चिकोटी काटने की आदत है- तो इस बार मजबूरी नहीं रहेगी क्या. अकेले दम पर सरकार बनाओगे? पहले पूरा देश देखो. बहुत बड़ा है देश. बहुत सारे राज्य हैं, कहां-कहां से जीतोगे? और तो और बिहार में नीतीश का मुकाबला कर लोगे का? झूठ-प्रपंच छोड़ो, काम की बात करो. और एक बात सुन लो कान खोल कर. मान लो तुम बढ़े भी तो और लोगों से समर्थन लोगे? और समर्थन देनेवाले की पहली शर्त होगी, इस सफेद दाढ़ी को हटाओ, नया नाम बताओ. तो किसका नाम बताओगे? इस पर सोचना.

अडवानी को जलील कर चुके हो, जोशी गायब हैं, राज्यसभा में जगह तलाश रहे हैं, कौन बचा है भाई?सुन कीन यह मुल्क कितना भी रद्दो बदल करे किसी साम्परदैक को हुकूमत नहीं देगा. और यह भी सुन लो इस मुल्क में गांधी के अलावा कोई हुकूमत नहीं कर सकता. उसके ही लोग हुकूमत करेंगे. पार्टी का नाम कुछ भी हो. नाम बताऊं- चंद्रशेखर, देवेगौड़ा, वीपी सिंह, मोरारजी भाई, भाई आप लोग संजीदा हो रहे हैं यह बताइये कि वो जो टोपीवाला आया था उसका क्या हुआ? मद्दू के सवाल ने चिखुरी लपेटा लेकिन चिखुरी ने बहस को सीधा किया- जनाबेआली! जनाब महंथ दुबे उर्फ मद्दू जी, इस शख्स ने बहुत नुकसान किया. अगले बीस साल तक किसी भी सवाल पर सड़क अब गरम नहीं होगी. जनता का यकीन इसने तोड़ा है. बड़े मन से जनता ने इसे देवता बनाया था. इसने सब चकनाचूर कर दिया. अन्ना से लेकर इन तमाम नकली क्रांतिकारियों ने जनता को छला है.

जनता किसपे भरोसा करेगी? लेकिन एक भरोसा एक बल वह है कांग्रेस. कितनी भी भ्रष्ट हो जाय, कितनी भी निकम्मी हो जाय, लेकिन जनमन उसका आधार रहेगा ही. उसके पास आज कोई जाति नहीं है, कोई छल प्रपंच नहीं है, लेकिन है बहुत अलहदी. मद्दू साहेब अगर वह खेल खेलना चाहती तो केवल एक मुद्दे पर सब को पीट देती और वह है ‘फूड सेक्योरिटी’ कानून. उमर से नहीं रहा गया- यह कौन सा कानून है भाई?

जनता को तो बताया जाय. चिखुरी चिंतित हुए- यही तो दिक्कत है- दुनिया में अकेला मुल्क है जहां यह कानून बना कि अन्न के लिए कोई भूखों नहीं मरेगा, यह उसका अधिकार है. लखन ने सवाल पूछा- सच्ची. तो अब हम कोई काम ना करें, सरकार खिलायेगी? लाल साहेब ने जवाब दिया- पर जब सरकार खिलाने लगे तो मुंह खुला रखना, केवल मांगो, अधिकार मांगो, उधार मांगो, बस्ता किताब मांगो, कपड़ा भोजन मांगो. सरकार सब दे. अबे लल्लू के बच्चे अपने दिल पे हाथ रख कर तो देख कि तुमने मुल्क को क्या दिया? एक घंटा भी मुल्क को दे तो देश चमकने लग जाय. लेकिन तुम यह नहीं करोगे.

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