रहिमन पानी राखिए..

।। चंचल।। (सामाजिक कार्यकर्ता) डा..रि.. या.. यह उर्दू भी कमाल की जुबान है. हिज्जे और मिलावट में थोड़ा भी इधर-उधर हुआ कि सब गुड़ गोबर. और अगर सब कुछ सही जम गया तो पूछो मत. तलवार की चमक है, तो मोहब्बत की रवानी भी. चिखुरी काका यह देखियो तो यह क्या लिखा है. कयूम ने […]
।। चंचल।।
(सामाजिक कार्यकर्ता)
डा..रि.. या.. यह उर्दू भी कमाल की जुबान है. हिज्जे और मिलावट में थोड़ा भी इधर-उधर हुआ कि सब गुड़ गोबर. और अगर सब कुछ सही जम गया तो पूछो मत. तलवार की चमक है, तो मोहब्बत की रवानी भी. चिखुरी काका यह देखियो तो यह क्या लिखा है. कयूम ने एक तुड़ा-मुड़ा अखबार चिखुरी की तरफ बढ़ा दिया. कईयों को ताज्जुब हुआ चिखुरी और उर्दू?
नवल उपाधिया ने मौका उठा लिया- दद्दा! इ उर्दू पेट से ही पढ़ के चले थे कि..’ चिखुरी मुस्कुराये. अखबार को गौर से देखा- अमा कयूम मियां, तुम भी कमाल हो, कहते हो तीसरी जमात तक उर्दू पढ़े हो, इतना भी नहीं बिठा पाये- डाल, अलिफ, ये, रे.. डारिया नहीं है डायरिया है. जनाब वजीरेआला डायरिया से.. तो मुख्यमंत्री को बुखार है और डायरिया हो गया है. इस बेजा हरकत से जनाब वजीरेआला उतने परेशान नहीं होंगे, जितना कि हमारे चाक चौबंद ‘खबरिया कारकून’ से.
एक और भी सटीक बयान है जनाब लालू प्रसाद यादव का. कहते हैं ये मोदी हो या केजरीवाल, राहुल गांधी के मुकाबले में इनकी क्या औकात? लाल साहेब ने बड़ी संजीदगी से कहा- कोइ कुछ भी कहे मुल्ला लालू में एक बात तो है, पट्ठा जब भी बोलता है आरपार का ही बोलता है. सही बात है, का मुकाबला है मोदी या केजरीवाल का उस राहुल से. हमने एकै दफे उसे देख लिया जब दागियों और अपराधियों के बचाव के लिए कानून बनने जा रहा था, तो अकेले राहुल था, जिसने खुल्लम खुला विरोध किया. तब ये दोनों कहां थे? उमर गंभीर विषय से भागता है- छोड़िये न. जरा डिल्ली की बताइए उहां का हो रहा है?
कीन उपाधिया को आज नयी जानकारी मिली कि चिखुरी बाभन होके उर्दू कैसे पढ़ लिये? एक बात बताओ काका, इ आप उर्दू कहां से सीखे? इ तो मुसलमानों की भाषा है? चिखुरी ने तरेर कर कीन उपाधिया को देखा. बरखुरदार.. भाषा किसी जाति, मजहब या दीन की नहीं होती, यह सब की होती है. तुम्हें नहीं मालूम हिंदी की बहन है उर्दू. लिपि अलग है बस. नजरिया बदलो, जितनी भाषा सीखोगे उतने ही इनसानी तमीज के नजदीक जाओगे.. काका जाने दीजिए न इसे, जरा ओ डिल्ली का बताइए. उमर फिर पलटा. लेकिन कीन ने टोका-पहले बोलना सीखो, वह डिल्ली नहीं है, दिल्ली है. चिखुरी ने दोनों को रोका-तुम दोनों सही हो. डॉक्टर लोहिया ने दिल्ली को डिल्ली कहा है. लोहिया लिखते हैं-जिसने डिल्ली को मोहब्बत किया डिल्ली ने उसे दर-ब-दर कर दिया. रजिया सुलतान और बहादुर शाह जफर उदाहरण हैं. आज शीला दीक्षित का नाम भी उसी में जुड़ गया. देखा तो नहीं, पर लोग बताते हैं कि शीला ने बहुत कुछ किया है. कीन ने नया टुकड़ा जोड़ा- उसकी हार की वजह बिजली-पानी है.. कयूम ने ठहाका मारा. कम्बख्त यह भी कोइ शहर है, जहां पानी की किल्लत एक तरफ और दुनिया के सारे प्यासे दिल्ली में?
चिखुरी ने कहा -ठीक कहते हो भाई, वहां दिल्ली में दिल्ली का कोई नहीं. लूटने और बसने के किस्से पर इतराते इस शहर का मौसम तक उसका नहीं है. पानी हरियाणा देता है, बिजली राजस्थान. तुर्रा यह कि यह शहर बिजली और पानी पर निजाम खींचतान मचाये हुए है. इस शहर की सबसे बड़ी समस्या ‘प्यास’ है. पानी की प्यास, पैसे की प्यास, ताकत और ओहदे की प्यास, गरज यह कि यह प्यासों का शहर है. इतना ही नहीं देश दुनिया का जो भी प्यासा निकलेगा, दिल्ली की तरफ भागेगा. क्योंकि यह शहर रेत के समंदर में पानी की मृगमरीचिका दिखाता है. ऐसा पानी पिलाता है कि प्यास और भी बढ़ती जाती है..
और जो बेपानी हो जाते हैं?
ओ भी जी रहे हैं, कुछ शहर में बे-चहरे के. कुछ चेहरे के साथ तो हैं, लेकिन जंगल में भटक रहे हैं. अजरुन परधान से नहीं रहा गया. भाई, इतना गूढ़ भी मत बोलो कि ससुरा एंटीना में फंसे ही न और ऊपर से निकल जाये. कोलई दुबे ने अजरुन को समझाना चाहा- दिल्ली में एक सरकार बनी है. पानी के वादे पर. बिजली के रेट को नीचे गिराने के लिए.
तो दिल्ली पानी के लिए परेशान है?
सस्ती बिजली के लिए हलकान में है. और उसे कुछ सूझ नहीं रहा है. रात-रात भर बेचारे सड़क-सड़क घूम रहे हैं.. लेकिन कोई कह रहा था, उत्तर प्रदेश बिजली विभाग कोई फामरूला तैयार कर रहा है. लाल साहेब की सुलग गयी- खौरही मलमल का भगवा. ससुरे अपनी हालत तो संभाले नही पा रहे हैं, चले हैं दूसरे को अकल देने. उमर ने टुकड़ा जोड़ा- बाप मरा अधियारे, बेटा पावर हाउस.
कहीं दूर से आवाज आयी -दौड़ो रे..लाइन आ गयी..
नवल उपाधिया की साइकिल उठी, अपने उठे और चलते चलते रहीम उठे- रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून. पानी गये न उबरे, मोती, मानुष, चून.. सारा खेल पानी का..
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