तब लौटेगा हिंदी का गौरव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Sep 2015 4:15 AM (IST)
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अंगरेजी भाषा का प्रसार अंगरेजों की साजिश थी देश के लोगों को दो भाग में बांट कर रखने की. आश्चर्य है कि हम आजाद होने के बाद भी उनकी ही नीति पर चल रहे हैं. ऐसा नहीं कि अंगरेजी के बिना काम नहीं चल सकता, बल्कि अंगरेजी को उस रूप में विकसित नहीं होने दिया […]
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अंगरेजी भाषा का प्रसार अंगरेजों की साजिश थी देश के लोगों को दो भाग में बांट कर रखने की. आश्चर्य है कि हम आजाद होने के बाद भी उनकी ही नीति पर चल रहे हैं. ऐसा नहीं कि अंगरेजी के बिना काम नहीं चल सकता, बल्कि अंगरेजी को उस रूप में विकसित नहीं होने दिया गया. हम खाते हिंदी की हैं, रोजगार हिंदी द्वारा प्राप्त करते हैं लेकिन गुण अंगरेजी के गाते हैं ताकि पिछड़े न समझे जायें. हमें मानसिकता बदलने की जरूरत है.
मोदी जी जनता के प्रचंड समर्थन से चुनकर आये हैं और उन्हें वाजपेयी जी की तरह हिंदी को उसका गौरव लौटाना चाहिए और पूरे देश में एक ही प्रकार की शिक्षा व्यवस्था लागू करनी चाहिए. हिंदी भाषा को सीखना और उसमें काम करना अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए. और अंगरेजी सिर्फ एक विदेशी भाषा के रूप में पढ़ी-पढ़ाई जानी चाहिए. तब लौटेगा हिंदी का गौरव.
– नवीन कु सिन्हा, जमशेदपुर
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