युगों-युगों से है योग का महत्व
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Sep 2015 1:12 AM (IST)
विज्ञापन

योग का इतिहास बहुत ही पुराना है. योग विद्या पहले ऋषि-मुनियों द्वारा गुफाओं एवं कंदराओं में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत अंतरित की जाती थी. साथ ही वैदिक काल से ही योग के प्रसांगिक होने के साक्ष्य मिलते हैं. स्वामी शिवानंद ने 1925 में ही भारत भ्रमण के दौरान सत्य सेवाश्रम औषधालय की स्थापना की थी. […]
विज्ञापन
योग का इतिहास बहुत ही पुराना है. योग विद्या पहले ऋषि-मुनियों द्वारा गुफाओं एवं कंदराओं में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत अंतरित की जाती थी. साथ ही वैदिक काल से ही योग के प्रसांगिक होने के साक्ष्य मिलते हैं.
स्वामी शिवानंद ने 1925 में ही भारत भ्रमण के दौरान सत्य सेवाश्रम औषधालय की स्थापना की थी. उसी समय इन्होंने योग, स्वास्थ्य तथा अध्यात्मिक जीवन पर दो सौ से अधिक पुस्तकों का प्रणयन किया था. योग का संबंध शरीर, मन एवं आत्मा तीनों से है.
मुख्य रूप से हम अष्टांग योग को जीवन में उतारने का प्रयत्न करते हैं, जो यम, नियम, आसन, प्रणयाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं. आध्यात्मिक, सांस्कृतिक बिहार की धरती पर भी योग की लंबी परंपरा रही है, लेकिन सामान्यत: साधकों को उपलब्ध इस ज्ञान को स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने जन-जन तक पहुंचा दिया.
– रुपक कुमार सिंह, हॉसी केवल, भगवानपुर, वैशाली
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




