दोषी सनी, कंडोम, अंजान या सोच?

Published at :03 Sep 2015 11:19 PM (IST)
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दोषी सनी, कंडोम, अंजान या सोच?

ईशा भाटिया पत्रकार, डॉयचे वेले एक जनसभा के दौरान अतुल अंजान ने कहा कि सनी लियोनी पर फिल्माये गये कंडोम के भड़काऊ विज्ञापन को बार-बार दिखाने का समाज पर बुरा असर हो रहा है.सीपीआइ के वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ऐसे विज्ञापनों के जरिये सेक्सुएलिटी परोसी जा रही है. वीडियो के सामने आते ही सोशल नेटवर्किग […]

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ईशा भाटिया
पत्रकार, डॉयचे वेले
एक जनसभा के दौरान अतुल अंजान ने कहा कि सनी लियोनी पर फिल्माये गये कंडोम के भड़काऊ विज्ञापन को बार-बार दिखाने का समाज पर बुरा असर हो रहा है.सीपीआइ के वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ऐसे विज्ञापनों के जरिये सेक्सुएलिटी परोसी जा रही है. वीडियो के सामने आते ही सोशल नेटवर्किग साइट ट्विटर पर कई लोगों ने अतुल अंजान की खिंचाई शुरू कर दी.
कुछ लोगों ने कहा कि बलात्कारों के लिए मानसिकता को दोष मत दीजिए, बल्कि महिलाओं या विज्ञापनों को दीजिए.सोशल मीडिया पर लगातार हो रही खिंचाई के बाद सीपीआइ के वरिष्ठ नेता अंजान को माफी मांगनी पड़ी.इस एड पर अतुल अंजान के टिप्पणी करने से और कुछ हुआ हो या न हो, कंडोम कंपनी को फायदा जरूर हो गया है. जिसने विज्ञापन नहीं भी देखा था, वह भी जानना चाह रहा है कि आखिर एड में ऐसा है क्या.
और फिर जिज्ञासा हो भी क्यों न, अंजान साहब ने अनजाने में ही इतनी विस्तृत छवि जो बना दी, ‘वो लेटी हुई है, बाल ऊपर, एक आदमी आ रहा है..’ शायद विज्ञापन देख चुके लोगों ने भी इतना ध्यान नहीं दिया होगा, क्योंकि परिवार के साथ टीवी देखने पर अमूमन जैसे ही कंडोम का एड आता है, या तो चैनल बदल दिया जाता है, या कोई पानी पीने चला जाता है.
अंजान इस बात से तो बिलकुल अनजान थे कि उनके पूरे भाषण में से डेढ़ मिनट का वीडियो निकाल कर उस पर बवाल कर दिया जायेगा. वैसे वे कुछ और भी बातों से अनजान दिखे.
जैसे वह कनाडा में पैदा हुई और अमेरिका में पली-बढ़ी सनी को कभी ऑस्ट्रेलिया, तो कभी यूरोप का बताते हैं, वैसे ही कंडोम के विज्ञापन को ही बलात्कार के लिए जिम्मेवार बता बैठे. उन्हीं के शब्दों में, ‘अगर कंडोम के इस तरह के प्रचार टीवी और अखबारों पर चलेंगे, तो रेप की घटनाएं बढ़ेंगी.’
हालांकि, अब वे माफी मांग कर यह साफ कर चुके हैं कि उनकी समस्या कंडोम नहीं, बल्कि विज्ञापन का स्टाइल है. इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या अधनंगी लड़कियां सिर्फ कंडोम के ही एड में देखने को मिलती हैं?
मैं अतुल अंजान की इस बात से सहमत हूं कि महिलाओं के जिस्म को वस्तु बना कर बेचना ठीक नहीं. लेकिन, काश कि अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने बेहतर शब्द चुने होते! काश कि इस मामले को सनी लियोनी तक सीमित न करके वे विज्ञापन उद्योग पर एक चर्चा शुरू करते!
और तब यकीनन सभी नारीवादी उनके पक्ष में खड़ी होतीं. लेकिन, वे तो भाषण सुनने आये लोगों का दिल रिझाने के लिए उनसे यह कहने लगे कि यह विज्ञापन ही कामुकता बढ़ाता है और इसे देख कर आपका बलात्कार करने का मन करने लगेगा.
अतुल अंजान और उनके जैसे लोगों की यह सोच ही हमारे समाज की असली समस्या है. आप कुछ भी कर के बलात्कार को सही नहीं ठहरा सकते. कभी मोबाइल फोन, कभी चाउमीन तो कभी विज्ञापन को इसकी जिम्मेवारी नहीं दे सकते.
जिन ‘नौजवानों’ को अतुल अंजान विज्ञापन के असर के बारे में समझा रहे थे, उन्हीं नौजवानों को यह बात समझनी होगी और अतुल अंजान जैसे लोगों को समझानी भी होगी.
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