मोबाइल फोन जरूरी या शौचालय?

सूचना और तकनीक के इस दौर में हर हाथ में मोबाइल फोन है, लेकिन क्या हर घर में शैचालय की सुविधा है? इसका जवाब ‘नहीं’ ही होगा, क्योंकि हमारे राज्य झारखंड में ही तीन–चौथाई घरों के लोग आज भी खुले में शौच करते हैं. यह हमारे राज्य की कड़वी सच्चाई है. राज्य के हर घर […]
सूचना और तकनीक के इस दौर में हर हाथ में मोबाइल फोन है, लेकिन क्या हर घर में शैचालय की सुविधा है? इसका जवाब ‘नहीं’ ही होगा, क्योंकि हमारे राज्य झारखंड में ही तीन–चौथाई घरों के लोग आज भी खुले में शौच करते हैं. यह हमारे राज्य की कड़वी सच्चाई है.
राज्य के हर घर में शौचालय हो, इसके लिए सरकार ने करोड़ों रुपये की राशि खर्च किया, उसके बाद भी लोग खुले में शौच कर रहे हैं. आज महिलाओं के खिलाफ होनेवाले यौन हिंसा की जो भी घटनाएं घटित हो रही हैं, उनका सबसे बड़ा कारण महिलाओं का घर से दूर खेत–खलिहानों में शौच के लिए जाना होता है.
आज हमारे बीच फैलते कई रोगों की वजह भी खुले में शौच करना ही है. दोषी हम ही हैं जो चार–पांच हजार रुपये का मोबाइल तो खरीद लेते हैं, लेकिन घर पर कभी शौचालय की जरूरत नहीं समझते.
दीपक कुमार सिंह, हजारीबाग
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