पाक का दुस्साहस और हमारी चुप्पी!

Published at :08 Oct 2013 4:02 AM (IST)
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पाक का दुस्साहस और हमारी चुप्पी!

जम्मू–कश्मीर के केरन सेक्टर में बीते 14 दिनों से पाकिस्तानी सेना के विशेष दस्ते व आतंकवादियों और भारतीय जवानों के बीच मुठभेड़ जारी है. इस संघर्ष ने करगिल युद्ध की यादें ताजा कर दी हैं. हालांकि, थलसेनाध्यक्ष बिक्रम सिंह ने कहा है कि स्थिति करगिल जैसी गंभीर नहीं है, लेकिन यह साफ है कि पाकिस्तानी […]

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जम्मूकश्मीर के केरन सेक्टर में बीते 14 दिनों से पाकिस्तानी सेना के विशेष दस्ते आतंकवादियों और भारतीय जवानों के बीच मुठभेड़ जारी है. इस संघर्ष ने करगिल युद्ध की यादें ताजा कर दी हैं.

हालांकि, थलसेनाध्यक्ष बिक्रम सिंह ने कहा है कि स्थिति करगिल जैसी गंभीर नहीं है, लेकिन यह साफ है कि पाकिस्तानी आतंकवादियों ने काफी तैयारी के साथ घुसपैठ की है. इसकी तस्दीक यह तथ्य भी कर रहा है कि भारतीय सेना बीते 14 दिनों की कार्रवाई में भी आतंकवादियों का सफाया करने में कामयाब नहीं हो सकी है.

मीडिया रपटों के मुताबिक पाकिस्तान से भारत में घुसे आतंकवादियों ने केरन सेक्टर के शाला भाटा गांव पर कब्जा जमा लिया है. ये सैनिक और आतंकवादी संख्या में 35 से 40 तक बताये जा रहे हैं.

पिछले 23 सितंबर से अब तक जिस तरह से उनकी तरफ से भारी गोलाबारी हो रही है, उसे देखते हुए यह बिना किसी शक के कहा जा सकता है कि इन आतंकवादियों को पाकिस्तानी सेना की मदद मिल रही है. हालांकि पाकिस्तानी सरकार एक बार फिर सच से इनकार करने की मुद्रा में है. भारत में पाकिस्तानी उच्चयुक्त सलमान बशीर ने आतंकवादियों को पाकिस्तानी सेना की मदद की खबरों को झूठा और आधारहीन करार दिया है.

पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया ज्यादा चौंकाती नहीं है. इस पूरे प्रकरण में हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मसले पर भारत की सरकार चुप्पी साधे हुए है. संभवत: भारतपाकिस्तान रिश्ते के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ कि पाक समर्थित आतंकवादी हमारी जमीन पर कब्जा करने के इरादे से भारतीय सीमा में घुस कर हमारे जवानों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे थे, जबकि इससे बेखबर हमारे प्रधानमंत्री पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ बातचीत की मेज साझा कर रहे थे. पाकिस्तान का ताजा दुस्साहस शांतिवार्ता की हमारी मौजूदा नीति पर भी पुनर्विचार की मांग कर रहा है.

जरूरत इस बात की है कि भारत कूटनीति से लेकर सामरिक स्तर तक पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को ध्वस्त करने की क्षमता और इच्छाशक्ति विकसित करे. फिलहाल, हम यही उम्मीद कर सकते हैं कि केरन सेक्टर में हालात वाकई करगिल युद्ध जैसे गंभीर नहीं है और भारतीय सेना स्थिति पर जल्द नियंत्रण पा लेगी.

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