क्या देश को नयी दिशा देगा बिहार!

।। पुण्य प्रसून वाजपेयी ।। (वरिष्ठ टीवी पत्रकार) बहुचर्चित चारा घोटाले में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को दोषी ठहराये जाने के बाद पैदा हुए अहम सवाल एक नयी राजनीति की भेंट चढ़ जाएंगे, या देश की राजनीति को एक नयी दिशा देंगे, इसके जवाब के लिए हमें अभी थोड़ा इंतजार करना होगा. उन्होंने 1990 में […]
।। पुण्य प्रसून वाजपेयी ।।
(वरिष्ठ टीवी पत्रकार)
बहुचर्चित चारा घोटाले में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को दोषी ठहराये जाने के बाद पैदा हुए अहम सवाल एक नयी राजनीति की भेंट चढ़ जाएंगे, या देश की राजनीति को एक नयी दिशा देंगे, इसके जवाब के लिए हमें अभी थोड़ा इंतजार करना होगा.
उन्होंने 1990 में कहा था– ‘आइ एम ए किंग’, 1997 में कहा था– ‘आइ एम ए किंग मेकर’ और अब 2013 में उन्हें जेल जाना पड़ रहा है. बहुचर्चित चारा घोटाले में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को सीबीआइ की विशेष अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद बिहार के सामने तीन सवाल बहुत ही सीधे तौर पर खड़े हो गये हैं.
क्या अब भी बिहार में जातीय समीकरण के आधार पर ही राजनीति होगी और सियासत की जमीन उसी से तय होगी? क्या राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए बिहार तैयार होगा? या फिर आगामी चुनावों में दागी उम्मीदवारों को टिकट देने के मामले में राजनीतिक दल अब भी कोताही नहीं बरतेंगे और दागियों को पहले की तरह ही संरक्षण देते रहेंगे? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में दागियों को टिकट देने के मामले में किसी भी दल ने कोताही नहीं बरती थी. वे चाहे नीतीश कुमार हों, लालू प्रसाद हों या फिर रामविलास पासवान. इतना ही नहीं, विधानसभा चुनाव के नतीजों पर भी जातीय समीकरण और दागियों का प्रभाव हावी रहा था.
हालांकि पिछले चुनाव में नीतीश कुमार को उनकी सरकार के अच्छे गवर्नेस का भी लाभ मिला था, लेकिन 2014 में होनेवाले लोकसभा चुनाव की परिस्थितियां 2010 के विधानसभा चुनाव से जुदा होंगी. 2004 से 2010 के बीच हुए चुनावों से इतर बिहार में बीजेपी अब नीतीश कुमार के खिलाफ खड़ी है.
राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो नीतीश कुमार पर लालू प्रसाद यही कह कर वार करते रहे हैं कि वे आरएसएस और बीजेपी के साथ खड़े हैं. अब संयोग ऐसा है कि नीतीश कुमार आरएसएस–बीजेपी का साथ छोड़ चुके हैं.
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आरएसएस, बीजेपी और नरेंद्र मोदी के विरोध की लालू प्रसाद के हिस्से की राजनीति क्या नीतीश कुमार के पक्ष में आयेगी? हालांकि सीबीआइ की विशेष अदालत के फैसले का राजनीतिक असर कुछ हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आगे लालू प्रसाद सजा की पूरी अवधि तक जेल में ही रहेंगे या फिर अपील के बाद उन्हें जमानत मिल जायेगी.
फिलहाल ऐसा लग रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार की राजनीति दो हिस्सों में बंटी दिखेगी. एक तरफ बीजेपी और नरेंद्र मोदी हैं, तो दूसरी तरफ उनके विरोधी बाकी सभी ताकतें, वे चाहे नीतीश कुमार हों, लालू प्रसाद हों या फिर कांग्रेस. चुनावों के दौरान राजनीतिक विभाजन की इस रेखा को जातीय समीकरणों के जरिये ही तोड़ा जा सकता है, लेकिन बिहार के चुनावों में जातीय समीकरण वक्त के साथ बदलते रहे हैं.
मसलन, पसमांदा मुसलमानों का लाभ कभी लालू प्रसाद को मिलता रहा था, जब उनका साथ छूटा तो नीतीश कुमार को इसका लाभ मिला. इसी तरह पिछड़े, दलित, महादलित भी पहले लालू प्रसाद को अपराजेय बनाते रहे थे, बाद में नीतीश कुमार की चुनावी विजय में भी निर्णायक भूमिका निभाने लगे.
ऐसे में बिहार के मतदाताओं के सामने अब एक नये तरह का मौका है. देखना होगा कि बिहार के मतदाता क्या उस राजनीतिक लकीर से पार जाने के लिए तैयार हैं, जो मंडल कमीशन के दौर में यानी 1989 के बाद के चुनावों में समूची हिंदी पट्टी में खींची गयी थी? इसी लकीर के कारण ही बिहार में राष्ट्रीय दल हाशिये पर चले गये थे और क्षेत्रीय छत्रप के तौर पर लालू प्रसाद का उदय हुआ था.
लेकिन छत्रपों की राजनीति के साथ आगे बढ़ते हुए लालू प्रसाद की सियासी दादागीरी शुरू हो गयी. इसी की मिसाल के रूप में उन्होंने शहाबुद्दीन सरीखे हिस्ट्रीशीटर को भी राजनीतिक मान्यता दी. उसके बाद तो हर जाति के ऐसे दबंग राजनीति में आगे निकलते चले गये, जिन पर अनेक गंभीर आपराधिक मामले चल रहे थे.
अनंत सिंह, सूरजभान, पप्पू यादव, सुनील पांडे, मुन्ना शुक्ला, तसलीमुद्दीन समेत कुल 27 ऐसे नेता इस वक्त विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ खड़े हैं, जिनकी पहचान न सिर्फ दबंग राजनेता के रूप में है, बल्कि जिनके साथ कानूनी तौर पर भी हिस्ट्रीशीटर शब्द जोड़ा जा सकता है. इतना ही नहीं, राज्य के दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के खिलाफ चाजर्शीट दाखिल हो चुकी है और 50 से ज्यादा विधायकों के खिलाफ पांच से ज्यादा मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं, लेकिन वे आज की तारीख में विधायक हैं.
जाहिर है, यदि सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश बरकरार रहता है और लालू प्रसाद को दो साल से ज्यादा की सजा होने पर उनकी संसद सदस्यता चली जाती है, तो ज्यादातर दागी नेता इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना सकते हैं. राजद इस स्थिति को हवा देने और भुनाने की हर मुमकिन कोशिश करेगा.
इस तरह अगले चुनावों में जनता के बीच लालू प्रसाद एक मुद्दा बन सकते हैं. फिर यह बात भी खुल कर सामने आयेगी कि नीतीश कुमार के शिक्षा मंत्री पीके शाही के रिश्तेदार सीबीआइ जज प्रभाष कुमार सिंह ने यह फैसला सुनाया है और जदयू के जो सांसद दोषी करार दिये गये हैं, वे जाति से भूमिहार हैं.
इसे लेकर राजद यादव बनाम भूमिहार का मुद्दा भी उठाने की कोशिश करेगा. लेकिन ऐसा हुआ, तो जगन्नाथ मिश्र का कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री होना, जगदीश शर्मा का जदयू सांसद होना और लालू प्रसाद का राजद अध्यक्ष होना, इस राजनीतिक संदेश को जनता के बीच पहुंचने नहीं देगा कि हर पार्टी में ऐसे दागी नेता मौजूद हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अपराध के मुकदमे चल रहे हैं.
बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें, तो प्रभुनाथ सिंह पिछले चुनावों तक लालू प्रसाद को चारा घोटालेबाज कह कर उन्हें जेल में बंद करवाने के लिए तत्पर दिखते थे, उन्होंने पिछले चुनाव में प्रचार के दौरान इसका एलान भी किया था, वे आज लालू प्रसाद के साथ खड़े हैं. जगदीश शर्मा जब लालू के साथ थे, तब चारा घोटाले को कोई घोटाला मानने के लिए भी तैयार नहीं थे.
ये ही नहीं, दर्जनों ऐसे नेता हैं, जो पिछले डेढ़ दशक में इस पार या उस पार की राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं. अब लालू प्रसाद को दोषी ठहराये जाने के बाद ऐसे नेता ‘सार्थक राजनीति’ की बात करने से नहीं चूक रहे हैं.
तो क्या यह माना जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में सफाई की जो बात कही है, उसका पहला असर बिहार में होने जा रहा है? लालू प्रसाद को दोषी ठहराये जाने के बाद पैदा हुए सवाल एक नयी राजनीति की भेंट चढ़ जाएंगे, या देश की राजनीति को एक नयी दिशा देंगे, इसके जवाब के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










