भविष्य के लिए खुल सकेगा रास्ता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jun 2015 5:23 AM (IST)
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झारखंड के आदिवासियों की जमीन संबंधी हितों की रक्षा के लिए बनी सीएनटी व एसपीटी एक्ट में काफी दिनों से बदलाव की बात चल रही है. अब राज्य सरकार भी चाहती है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को जमीन गिरवी रखने के बदले एजूकेशन लोन, होम लोन और बिजनेस लोन मिले. इसके […]
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झारखंड के आदिवासियों की जमीन संबंधी हितों की रक्षा के लिए बनी सीएनटी व एसपीटी एक्ट में काफी दिनों से बदलाव की बात चल रही है. अब राज्य सरकार भी चाहती है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को जमीन गिरवी रखने के बदले एजूकेशन लोन, होम लोन और बिजनेस लोन मिले.
इसके लिए छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट और संतालपरगना एक्ट के प्रावधान में संशोधन करना चाहती है. इस संबंध में राजस्व और भूमि-सुधार विभाग ने संकल्प भी जारी किया है. यह संकल्प टीएसी (ट्रायबल एडवाइजरी कमेटी) को अनुशंसा के लिए भेजा गया है. अगर टीएसी इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे देती है, तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को बैंक से कर्ज मिलना शुरू हो जायेगा.
आर्थिक उदारीकरण के बाद से जब बैंकों ने उद्योग लगाने से लेकर पढ़ाई करने तक के लिए जमीन के आधार पर कर्ज देना शुरू किया, तो इस पूरी प्रक्रिया का लाभ आदिवासियों को नहीं मिला. बैंकिंग संस्थानों ने यह कहकर आदिवासियों को जमीन के बदले कर्ज देने से इनकार कर दिया कि उनकी जमीन संबंधी मामलों में जो कानून सीएनटी और एसपीटी है, ऐसा करने से मना करते हैं.
कर्ज नहीं मिलने की स्थिति में ठीक-ठाक जमीन के मालिक होने के बाद भी आदिवासी न तो उद्योग-धंधे लगा सके और न ही आगे की पढ़ाई के लिए पैसे का इंतजाम कर सके.
इसमें कोई शक नहीं है कि सीएनटी व एसपीटी एक्ट होने के कारण ही थोड़ी बहुत ही सही लेकिन आदिवासियों की जमीन बची हुई है. आने वाले समय में जब जमीन की और मारा-मारी होगी, तो ऐसे में आदिवासियों की जमीन को बचाने में ये एक्ट ही काम आयेंगे.
फिलहाल बेरोजगारी के आलम में जमीन के जरिए अपने बच्चों को आगे पढ़ाने या अपना घर बनाने, उद्योग लगाने के लिए बैंकों से कर्ज के लिए जो रास्ता खोलने की कोशिश हो रही है, वह समय की मांग है. बैंक लंबे समय से अपने हितों की रक्षा के लिए अति सजगता मे आदिवासियों की जमीन को बंधक रखने से गुरेज करते आ रहे हैं. अगर टीएसी के अनुमोदन के बाद सीएनटी या एसपीटी एक्ट में संशोधन होता है, तो आदिवासी युवाओं के लिए स्वरोजगार और भविष्य का रास्ता खुल सकेगा.
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