यह तो रूढ़िवादिता की हद है!
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 Apr 2015 2:15 AM (IST)
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कोडरमा जिले के दूधीमारी में होनेवाले यज्ञ में एक विधवा महिला को यज्ञ का कलश नहीं उठाने का फरमान जारी किया गया है. ‘विद्वान’ पंडितों द्वारा बताया जा रहा है कि यही शास्त्रसम्मत है. उनका कहना है कि धर्मग्रंथों में लिखा है कि शुभ कार्यो से विधवाओं को दूर रखा जाना चाहिए. यह रूढ़िवादिता की […]
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कोडरमा जिले के दूधीमारी में होनेवाले यज्ञ में एक विधवा महिला को यज्ञ का कलश नहीं उठाने का फरमान जारी किया गया है. ‘विद्वान’ पंडितों द्वारा बताया जा रहा है कि यही शास्त्रसम्मत है.
उनका कहना है कि धर्मग्रंथों में लिखा है कि शुभ कार्यो से विधवाओं को दूर रखा जाना चाहिए. यह रूढ़िवादिता की हद है! एक ओर इन्हीं किताबों में विधवाओं को अपना अधिकांश समय पूजा-पाठ में बिताने की सलाह दी गयी है, दूसरी ओर एक विधवा को यज्ञ में शामिल होने से रोका जा रहा है. सवाल यह है कि इस तरह की मनमानी कितने दिनों तक चलेगी?
हिंदू देवी-देवता क्या केवल सोलह श्रृंगार से सजी सधवाओं की पूजा ही स्वीकार करते हैं? क्या किसी विधवा की पूजा उन्हें स्वीकार्य नहीं है? श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि मैं अपने भक्तों भेद-भाव नहीं करता. इसी से भगवान का एक नाम समदर्शी भी है.
रंजीत कुमार सिंह, झुमरी तिलैया
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