झारखंड के मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायलों के इलाज के लिए 11 ट्रॉमा सेंटर बनाने की घोषणा की है. यदि यह घोषणा पूर्व की सरकारों की अन्य घोषणाओं की तरह न हो, तो यह सराहनीय कदम है.
सिर्फ घोषणा करने से ही काम नहीं चलेगा. इन घोषणाओं को अमलीजामा पहनाते हुए धरातल पर उतारने की जरूरत है. ये ट्रॉमा सेंटर अत्याधुनिक होने चाहिए. डीजीपी ने कहा है कि घायलों के त्वरित इलाज की सुविधा देने के लिए लोगों के मन से पुलिसिया खौफ भी समाप्त करना होगा. इसके लिए प्रशासन की ओर से कारगर कदम उठाने होंगे.
हालांकि डीजीपी महोदय ने इस संदर्भ में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि लोगों के मन से पुलिसिया भय समाप्त करने के लिए उन्होंने क्या किया? सिर्फ घोषणाओं के रूप में खोखली बातें करने से काम नहीं चलेगा.
देवेंद्र कुमार पाठक, रांची

