ePaper

आइसीयू में सर्वाधिक संक्रमण

Updated at : 08 Jan 2026 6:15 AM (IST)
विज्ञापन
Infections In ICU

आइसीयू में सर्वाधिक संक्रमण

Infections In ICU: एम्स का ताजा अध्ययन बताता है कि आइसीयू में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है. कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, मरीजों का लंबे समय तक भर्ती रहना तथा अत्याधुनिक उपकरणों का लगातार इस्तेमाल इस खतरे को और बढ़ा देता है.

विज्ञापन

Infections In ICU: नयी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी एवं इंफेक्शन कंट्रोल विभाग द्वारा किया गया ताजा अध्ययन बेहद चौंकाने वाला है, जो बताता है कि जिन आइसीयू की छवि गंभीर मरीजों को जीवन रक्षक इलाज देने की है, वहीं संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है. बेशक अपने देश में आइसीयू में होने वाले संक्रमण पर यह पहला अध्ययन नहीं है. इससे पहले ‘द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ’ में प्रकाशित रिपोर्ट में भी भारतीय आइसीयू में रक्त संक्रमण से संबंधित आंकड़े आये थे. लेकिन एम्स का यह अध्ययन ज्यादा बड़े पैमाने पर किया गया है. इस अध्ययन में देशभर के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 190 से अधिक आइसीयू को शामिल किया गया था.

अध्ययन में फेफड़ों के संक्रमण, मूत्र मार्ग संक्रमण, रक्त संक्रमण और ऑपरेशन के बाद होने वाले संक्रमण को सबसे गंभीर बताया गया है. कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, मरीजों का लंबे समय तक भर्ती रहना तथा अत्याधुनिक उपकरणों का लगातार इस्तेमाल इस खतरे को और बढ़ा देता है. अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, आइसीयू में मरीज वेंटिलेटर, यूरिन कैथेटर और सेंट्रल लाइन जैसे उपकरणों पर निर्भर रहते हैं. जब मरीज लंबे समय तक आइसीयू में रहते हैं, तब यही उपकरण संक्रमण के प्रवेश का सबसे बड़ा रास्ता बनते हैं. इसमें खासतौर पर यह भी रेखांकित किया गया है कि वेंटिलेटर से जुड़ा निमोनिया आइसीयू में होने वाले संक्रमणों में सबसे आम और सबसे घातक होता है.

इतना ही नहीं, आइसीयू में फैलने वाले कई बैक्टीरिया पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का कोई असर नहीं होता. मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया आइसीयू की सबसे बड़ी चुनौती हैं, और ऐसे संक्रमणों में इलाज अक्सर लंबा और महंगा ही नहीं, बल्कि कई बार जानलेवा भी बन जाता है. विशेषज्ञों का यह कहना है कि हाथों की नियमित सफाई, उपकरणों को जीवाणुमुक्त करने की निरंतर प्रक्रिया, एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल तथा मरीजों की लगातार निगरानी से संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है.

इस अध्ययन रिपोर्ट के आईने में एम्स के चिकित्सकों ने आइसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों की सुरक्षा के लिए सभी अस्पतालों में सख्त इंफेक्शन कंट्रोल प्रोटोकॉल तथा नियमित ऑडिट लागू करने पर जोर दिया है. अमेरिका जैसे देशों ने अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण पर तीन-चार दशक पहले ही काम शुरू कर दिया था. हालांकि अपने यहां भी तस्वीर बदल रही है, और केंद्र सरकार इस संदर्भ में नेशनल प्रोग्राम लाने की तैयारी कर रही है.

विज्ञापन
संपादकीय

लेखक के बारे में

By संपादकीय

संपादकीय is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola