योग-प्राणायाम भी बनाते हैं दीर्घजीवी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Mar 2015 1:50 AM (IST)
विज्ञापन

प्रभात खबर में प्रकाशित श्रृंखला ‘चिरंजीवी भव’ से जाना कि समय के साथ शरीर को चलानेवाली अलग-अलग प्रणालियां सुस्त पड़ जाती हैं. फिर एक दिन पूरी तरह से थम जाती हैं. ऐसा क्यों होता है? वैज्ञानिक खोजों की बदौलत इंसान सौ-डेढ़ सौ साल तक जीने में सक्षम हो रहा है. विज्ञान पहला प्रयोग जानवरों पर […]
विज्ञापन
प्रभात खबर में प्रकाशित श्रृंखला ‘चिरंजीवी भव’ से जाना कि समय के साथ शरीर को चलानेवाली अलग-अलग प्रणालियां सुस्त पड़ जाती हैं. फिर एक दिन पूरी तरह से थम जाती हैं. ऐसा क्यों होता है? वैज्ञानिक खोजों की बदौलत इंसान सौ-डेढ़ सौ साल तक जीने में सक्षम हो रहा है. विज्ञान पहला प्रयोग जानवरों पर करता है, उसके बाद मनुष्य पर वह प्रयोग सफल होने की संभावना बढ़ जाती है.
लेकिन मनुष्य जानवर से भिन्न है. इंसान का शरीर और मन स्वस्थ रहे, तो वह दीर्घायु हो सकता है. हमारे धर्म-ग्रंथ और उपनिषद जीने की कला बताते हैं. योग, प्राणायाम और अल्पाहार से हम स्वस्थ्य एवं दीर्घायु होने के साथ चेहरे की आभा भी बना सकते हैं, लेकि हम दवाइयों से खुद को निखारना चाहते हैं. ऋषि-मुनि दीर्घजीवी होते थे. योग और प्राणायाम के साथ उनकी दिनचर्या महत्वपूर्ण थी.
गीता दुबे, जमशेदपुर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




