मालदीव में अराजकता का माहौल

Published at :18 Mar 2015 5:22 AM (IST)
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मालदीव में अराजकता का माहौल

डॉ गौरीशंकर राजहंस पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत इसमें कोई संदेह नहीं कि मालदीव में जारी अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ेगा. उचित यही होगा कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को अविलंब रिहा किया जाये और मालदीव में फिर से आम चुनाव हो, ताकि वहां एक लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी […]

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डॉ गौरीशंकर राजहंस
पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत
इसमें कोई संदेह नहीं कि मालदीव में जारी अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ेगा. उचित यही होगा कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को अविलंब रिहा किया जाये और मालदीव में फिर से आम चुनाव हो, ताकि वहां एक लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी अभी हिंद महासागर के कई द्वीप देशों की यात्रा की है, परंतु अंतिम समय में उन्होंने मालदीव की राजधानी माले की यात्रा स्थगित कर दी.
कारण कि मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को जिस तरह पुलिस घसीट कर उन्हें कोर्ट लायी और पीट कर जेल में बंद कर दिया, उससे भारत में रोष फैल गया. यह दृश्य दुनिया के सभी टीवी चैनलों पर दिखाया गया और पश्चिम के सभी समाचारपत्रों में पुलिस द्वारा जमीन पर घसीटते हुए मोहम्मद नशीद के फोटो प्रकाशित किये गये. इस घटना को कोई भी लोकतांत्रिक देश बर्दाश्त नहीं कर सकता है. भारत सरकार ने इसकी तीव्र निंदा की है.
मालदीव हिंदमहासागर में अनेक द्वीप समूहों का एक मिलाजुला देश है. भारत के साथ उसके संबंध वर्षो से ही मधुर रहे हैं. 1988 में जब श्रीलंका के लिट्टे उग्रवादियों ने मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मामून अब्दुल गयूम का तख्तापलट करना चाहा, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने फौज भेज कर लिट्टे उग्रवादियों को मार भगाया था. गयूम ने 30 वर्षो तक मालदीव में निरंकुश शासन किया था. उनके तानाशाही रवैये के विरुद्ध अनेक पार्टियों ने संघर्ष किया, जिसमें मुख्य पार्टी मोहम्मद नशीद की थी. साल 2008 में मालदीव में चुनाव हुआ और नशीद के नेतृत्व में एक लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना हुई.
2012 में एक सैनिक क्रांति में नशीद की सरकार का तख्तापलट हो गया और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गयूम के भाई अब्दुल यमीन देश के राष्ट्रपति बन गये. पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद पर अब्दुल गयूम के समर्थकों ने यह आरोप लगाया कि वे आतंकवादियों से मिले हुए हैं और देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं. जब पुलिस बेरहमी से नशीद को घसीट कर कोर्ट ले जा रही थी, तब उनके विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने उनकी कमीज फाड़ डाली और किसी तेज हथियार से उनके हाथ पर हमला किया, जिससे उनकी एक बांह करीब-करीब बेकार हो गयी है.
अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण 2013 में अब्दुल गयूम के समर्थकों ने देश में आम चुनाव कराया, जिसमें मोहम्मद नशीद को ‘फस्र्ट राउंड’ में 45 प्रतिशत वोट मिले. अब्दुल यमीन के अफसरों ने ‘सेकेंड राउंड’ की गिनती ही नहीं होने दी. उसके कुछ महीनों बाद मालदीव में फिर से चुनाव हुआ, जिसमें ‘फस्र्ट राउंड’ में मोहम्मद नशीद को पर्याप्त वोट मिले. गयूम के समर्थकों ने फिर से पहले की तरह ही ‘सेकेंड राउंड’ की गिनती होने ही नहीं दी और इलजाम लगा कर नशीद को जेल में डाल दिया.
2008 में जब मोहम्मद नशीद सत्ता में आये, तब उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गयूम द्वारा नियुक्त किये उन जजों को बदलना चाहा, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे और जिनकी योग्यता जज बनने लायक नहीं थी. गयूम समर्थकों ने इसका घोर विरोध किया. अब्दुल गयूम और नशीद के समर्थकों में सड़कों पर एक तरह का युद्ध शुरू हो गया.
खबर है कि केवल दिखावे के लिए नशीद पर मुकदमा चलाया गया और दोषी बना कर उन्हें 13 वर्षो तक जेल की कठोर कारावास की सजा दी गयी है. सजा में यह भी कहा गया कि अब वे भविष्य में कभी राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ पायेंगे. गयूम समर्थक नशीद का राजनीतिक भविष्य समाप्त कर देना चाहते हैं, परंतु अधिकतर जनता अब भी नशीद के साथ है.
मालदीव में अनेक मनोरम समुद्री तट हैं और पूरी दुनिया के पर्यटक वहां साल भर आते रहते हैं. पर्यटन ही वहां का मुख्य उद्योग है. हाल में अनेक भारतीय उद्योगपतियों ने वहां पर्यटन उद्योग के विकास के लिए, खासकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के लिए करोड़ों डॉलर का निवेश किया है.
यदि मालदीव में अस्थिरता का माहौल जारी रहा, तो इन सभी निवेशों का भविष्य खतरे में पड़ जायेगा. नशीद के साथ वहां के वर्तमान शासकों ने जो व्यवहार किया है, दुनियाभर में उसकी निंदा हो रही है. पश्चिम के समाचारपत्रों ने यह जोर देकर लिखा है कि मालदीव को फौरन ‘कॉमनवेल्थ’ से बाहर कर दिया देना चाहिए और उस देश की सरकार के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगा कर मालदीव सरकार का जो धन विदेशी बैंकों में जमा है, उसे ‘फ्रिज’ कर दिया जाना चाहिए.
इसमें कोई संदेह नहीं कि मालदीव में जारी अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ेगा. परंतु दुनियाभर के मीडिया ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूरी-भूरी प्रशंसा इस बात के लिए की है कि नशीद के साथ जो र्दुव्‍यवहार किया गया, उसकी भारत ने कड़ी निंदा की है. उचित यह होगा कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को अविलंब रिहा किया जाये और मालदीव में फिर से आम चुनाव हो, ताकि वहां एक लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो. अब देखना यह है कि अब्दुल गयूम के समर्थक विश्व समुदाय के सामने झुकते हैं या नहीं.
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