बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है केरल की घटना

Published at :14 Mar 2015 12:26 AM (IST)
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बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है केरल की घटना

प्रसिद्ध पत्रकार मिग्नॉन मैक्लॉग्लिन के मुताबिक लोकतंत्र खतरे की स्थिति में लोकतांत्रिक मूल्यों को ही पीछे छोड़ देता है. शुक्रवार को केरल विधानसभा का हिंसक हंगामा इस बात की ताईद करता है. शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई मानदंडों में अव्वल राज्य से ऐसी खबर का आना काफी चिंताजनक है. दिसंबर में राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-निरोधक […]

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प्रसिद्ध पत्रकार मिग्नॉन मैक्लॉग्लिन के मुताबिक लोकतंत्र खतरे की स्थिति में लोकतांत्रिक मूल्यों को ही पीछे छोड़ देता है. शुक्रवार को केरल विधानसभा का हिंसक हंगामा इस बात की ताईद करता है. शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई मानदंडों में अव्वल राज्य से ऐसी खबर का आना काफी चिंताजनक है.

दिसंबर में राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-निरोधक विभाग ने घूसखोरी के मामले में मंत्री को नामजद अभियुक्त बनाया है. विपक्ष की जिद्द थी कि वे शराब बार के व्यावसायियों से घूस लेने के आरोपी वित्त मंत्री को बजट पेश नहीं करने देंगे. सदन के हंगामे के साथ वाम मोर्चे के हजारों समर्थकों ने विधानसभा भवन का घेराव भी किया. वित्त मंत्री ने रस्मी तौर पर बजट तो पेश कर दिया, लेकिन इस पूरी घटना ने राज्य और देश के लोकतांत्रिक इतिहास पर धब्बा लगा दिया है.

प्रकरण का दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह था कि हंगामे के समय मुख्यमंत्री ओमन चांडी, विपक्ष के नेता वीएस अच्युतानंदन समेत अनेक वरिष्ठ नेता मूकदर्शक बने बैठे रहे. निश्चित रूप से विपक्ष को मंत्री के विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसक विरोध को सही नहीं ठहराया जा सकता है. आश्चर्य है कि इस हंगामे में वामपंथी पार्टियां शामिल हैं, जिन्हें अनुशासित और मर्यादित माना जाता है. किसी सदन में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो जब वामपंथी सदस्यों ने अनुचित व्यवहार किया हो. ये पार्टियां हमेशा बहस की पैरोकार रही हैं. केरल की घटना ने उनकी इस छवि को धूमिल किया है.

पर, इस मामले में कांग्रेस के नेतृत्ववाली राज्य सरकार की भूमिका भी चिंताजनक है. भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण ही उन्हें लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था तथा अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक को अदालत में हाजिर होना पड़ रहा है. नामजद व्यक्ति को मंत्री बनाये रख कांग्रेस यही संकेत दे रही है कि उसने अपनी गलतियों से सीखने की कोशिश नहीं की है. सदन को ठीक से चलाने के लिए सरकार को विपक्ष को भरोसे में लेने की कोशिश करनी चाहिए थी. विधानसभा और संसद जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं. अब यही उम्मीद की जा सकती है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से सबक लेते हुए सरकार तथा विपक्ष जवाबदेही और जिम्मेवारी से सकारात्मक भूमिका निभायेंगे.

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