Dhanbad: कोयला पेंशन फंड पर गहराया संकट, हर साल 7240 करोड़ रुपये का घाटा

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सांकेतिक तस्वीर AI Image

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Dhanbad: धनबाद में कोयला पेंशन फंड पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. हर साल करीब 7240 करोड़ रुपये का घाटा सामने आ रहा है, जिससे लाखों पेंशनभोगियों की चिंता बढ़ गई है. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें…

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मनोहर कुमार
Dhanbad: कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था को लेकर चिंता गहराती जा रही है. कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) के पेंशन फंड में हर साल करीब 7240 करोड़ रुपये का घाटा सामने आया है. बीते 12 मार्च को कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें फंड की स्थिरता पर विस्तार से चर्चा की गयी. इसमें सीएमपीएफओ के आयुक्त, कोल इंडिया, एससीसीसीएल व इपीएफओ और बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य शामिल हुए थे. बैठक में संकेत मिला कि मौजूदा कोयला पेंशन योजना लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है. ऐसे में सरकार व संबंधित संस्थाओं को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि कर्मचारियों व पेंशनधारकों के हित सुरक्षित रह सकें.

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घटती आय और बढ़ते पेंशन धारक है वजह

बैठक में बताया गया कि कोयला क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि पेंशन लेनेवालों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में फंड में आने वाली राशि और खर्च के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है. पेंशन योजना में वेतन सीमा नहीं होने के कारण अधिकारियों को अधिक पेंशन मिल रही है, जिससे फंड पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है. विशेषज्ञों ने इपीएफओ की तरह वेतन सीमा लागू करने का सुझाव दिया. सीएमपीएफओ ने पब्लिक अकाउंट में जमा 15,424 करोड़ रुपये का उपयोग पेंशन घाटा भरने और मासिक भुगतान के लिए करने का प्रस्ताव रखा. बैठक के अध्यक्ष ने इस पर सैद्धांतिक सहमति जतायी.

नयी पेंशन व्यवस्था पर विचार

कोल कंपनियों ने सुझाव दिया कि नये कर्मचारियों को मौजूदा योजना की बजाय नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) या अन्य योगदान आधारित प्रणाली में शामिल किया जाये. हालांकि सीएमपीएफओ ने कहा कि इससे मौजूदा फंड पर दबाव और बढ़ सकता है. बैठक में सीएमपीएफओ की अनुपयोगी संपत्तियों के मोनेटाइजेशन और प्रशासनिक फंड के 0.5 से 0.7 प्रतिशत हिस्से को पेंशन फंड में स्थानांतरित करने पर भी विचार किया गया.

सरकार से योगदान बढ़ाने की मांग

वर्तमान में सरकार का योगदान मात्र 726.72 रुपये प्रति कर्मचारी प्रति माह है. इसे इपीएफओ के बराबर बढ़ाने की मांग उठी. बैठक में सीएमपीएफओ को कई अहम निर्देश दिये गये, जिनमें सरकारी योगदान बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करना, पब्लिक अकाउंट फंड के उपयोग की अनुमति लेना, पेंशन गणना प्रणाली में बदलाव का अध्ययन और संपत्तियों का पूरा ब्यौरा देना शामिल है.

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