होर्मुज में तनाव कायम, लेकिन ट्रंप ने अगले 36-72 घंटों में दूसरे दौर की शांति वार्ता की उम्मीद जताई
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 23 Apr 2026 6:22 AM
अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर संभव
US-Iran peace talks : अमेरिका-ईरान युद्ध की समाप्ति के लिए दूसरे दौर की बातचीत अगले 36 से 72 घंटों में एक बार फिर शुरू हो सकती है. इसका दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में किया है.
US-Iran peace talks : होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार 22 अप्रैल को यह संकेत दिया है कि ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अगले 36 से 72 घंटे के बीच होगी. उन्होंने बुधवार को ईरान के साथ संभावित डिप्लोमैटिक कामयाबी का संकेत दिया.
सीजफायर टूटने के खतरे के बीच बातचीत की उम्मीद
होर्मुज स्ट्रेज में ईरान ने बुधवार को दो कार्गो जहाजों पर हमला किया और उन्हें जब्त कर ईरान के तट पर ले गए. इस बीच द न्यूयॉर्क पोस्ट को भेजे गए एक टेक्स्ट मैसेज के जरिए ट्रंप ने यह उम्मीद जताई है कि दूसरे दौर की बातचीत होगी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के लीडरशिप ने गंभीर रूप से टूटी हुई ईरानी सरकार को थोड़ा समय देने के लिए कहा था. पाकिस्तान इस कोशिश में है कि ईरान को बातचीत के लिए कूटनीतिक तरीके से तैयार किया जाए, क्योंकि उसने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बातचीत के दूसरे राउंड को नजरअंदाज कर दिया था. द न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से, लगभग 36 से 72 घंटे के बीच दूसरे दौर की बातचीत संभव है.
आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है ईरान
ट्रंप ने इस बात को लेकर कोई टाइमलाइन नहीं बताई है कि सीजफायर कब तक जारी रहेगा.ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान एक गंभीर फाइनेंशियल संकट से गुजर रहा है. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान कैश के लिए तरस रहा है और उसे हर दिन 500 मिलियन डॉलर खो रहा है.उन्होंने आगे कहा कि ईरानी लीडरशिप पर काफी अंदरूनी दबाव है,मिलिट्री और पुलिस शिकायत कर रही है कि उन्हें पेमेंट नहीं मिल रही है. वे चाहते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खुल जाए.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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