सियासी खींच-तान में फंसी रेलवे सुरक्षा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Feb 2015 5:41 AM (IST)
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बिहार के सियासी दावं-पेच में रेल डकैती कोई मुद्दा नहीं है. कोई पखवारा ऐसा नहीं गुजर रहा है जब राज्य के किसी न किसी हिस्से से रेल यात्रियों के लुटने की खबर नहीं आती हो. 10 फरवरी को इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस में एक व्यवसायी को हथियारबंद अपराधियों ने लूट लिया. उसके एक दिन पहले आसनसोल-मुंबई एक्सप्रेस […]
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बिहार के सियासी दावं-पेच में रेल डकैती कोई मुद्दा नहीं है. कोई पखवारा ऐसा नहीं गुजर रहा है जब राज्य के किसी न किसी हिस्से से रेल यात्रियों के लुटने की खबर नहीं आती हो. 10 फरवरी को इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस में एक व्यवसायी को हथियारबंद अपराधियों ने लूट लिया.
उसके एक दिन पहले आसनसोल-मुंबई एक्सप्रेस में अपराधियों ने एसी कोच को निशाना बनाया. अपराधियों का दल आधे घंटे से भी ज्यादा वक्त तक लूटपाट करता रहा, पर सुरक्षाकर्मियों का कोई अता-पता नहीं था. अपराधियों ने इस घटना को पटना जिले के बाढ़-अथमलगोला स्टेशनों के बीच अंजाम दिया था. खबर है कि दो विदेशी यात्रियों के साथ भी लूटपाट की गयी. थोड़ा पीछे चलें तो जनवरी के शुरुआती दिनों में ही फरक्का-दिल्ली एक्सप्रेस में लुटेरों ने सैप के एक जवान की गोली मार कर हत्या कर दी थी.
मुंगेर जिले की इस घटना के वक्त सैप जवान तीन संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रहे थे. इसी बीच एक ने गोली चला दी और मौके पर ही जवान की मौत हो गयी. दूसरे घायल जवान को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ये घटनाएं बताती हैं कि रेल यात्रएं कितनी असुरक्षित, एक तरह से जान हथेली पर लेकर चलने के माफिक हो गयी हैं. रेलवे की सुरक्षा को लेकर राज्य पुलिस और रेलवे यानी केंद्र के बीच प्राय: आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि आम आदमी की निरापद यात्र की गारंटी कौन करेगा?
उसे इस बात का कितना मतलब रखना चाहिए कि सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस की है या रेलवे पुलिस की. उसे तो बिना डर भय के यात्र का माहौल चाहिए. नि:संदेह यह माहौल मुहैया कराने में हमारी एजेंसियां नाकाम हो रही हैं. बेहतर होगा कि यात्र को निर्विघ्न बनाने के लिए राज्य और रेलवे के बीच बेहतर समन्वय कायम किया जाये.
आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कठोर कदम उठाये जायें और रेल में सुरक्षा संबंधी निगरानी को और मजबूत किया जाये. आमतौर पर देखा जाता है कि सुरक्षा में लगे पुलिस वालों की पहली चिंता वसूली करने की होती है. उनकी प्राथमिकता में यात्रियों की सुरक्षा को कैसे शामिल किया जाये, इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है. शीर्ष स्तर पर केवल दिशा-निर्देश देने से ही काम नहीं चलेगा.
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