‘क्लिक-क्रांति’ की दिशा में दो कदम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Oct 2014 5:23 AM (IST)
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प्रमोद जोशी वरिष्ठ पत्रकार विडंबना है कि भारत में इ-कॉमर्स आज भी फायदे का सौदा नहीं है, फिर भी हम उसकी धूम देख रहे हैं. फ्लिपकार्ट ने केवल बिक्री का ही नहीं, बल्कि हिट का भी नया रिकॉर्ड कायम किया है. सवाल है कि इस होड़ में कोई दम है या यह गुब्बारे की तरह […]
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प्रमोद जोशी
वरिष्ठ पत्रकार
विडंबना है कि भारत में इ-कॉमर्स आज भी फायदे का सौदा नहीं है, फिर भी हम उसकी धूम देख रहे हैं. फ्लिपकार्ट ने केवल बिक्री का ही नहीं, बल्कि हिट का भी नया रिकॉर्ड कायम किया है. सवाल है कि इस होड़ में कोई दम है या यह गुब्बारे की तरह फूट जायेगी?
पिछले एक हफ्ते की गतिविधियों को देखते हुए शायद ‘दिनकर’ की पंक्तियों को कुछ संशोधित करके इस तरह कहने की घड़ी आ रही है, ‘सेनानी करो प्रयाण अभय, सायबर आकाश तुम्हारा है.’
चीन की इ-कॉमर्स कंपनी ‘अलीबाबा’ न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हो गयी. उसके संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष जैक मा 21 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार हो गये.
नौजवानों को स्टीव जॉब्स, जुकरबर्ग और बिल गेट्स जैसा एक और रोल मॉडल मिल गया है. इधर भारत में सबसे बड़े इ-रिटेल ग्रुप फ्लिपकार्ट ने अपनी बंपर सेल के ‘बिग बिलियन डे’ को बिगबैंग के अंदाज में मनाया. यह अलग बात है कि कुछ नासमझी और कुछ तकनीकी सीमाओं ने फ्लिपकार्ट को ‘फ्लॉपकार्ट’ बनाने में देर नहीं की और सोशल मीडिया ने उसका जम कर मजाक उड़ाया.
बहरहाल, फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापकों सचिन बंसल और बिनी बंसल ने फौरन अपने ग्राहकों से माफी मांग ली. दरअसल ऑनलाइन रिटेल बाजार में फ्लिपकार्ट ने एक नयी ‘क्लिक-वॉर’ का एलान कर दिया है.
उसका मुकाबला अमेजन से है, जिसे इ-रिटेल का जनक माना जा सकता है. अमेजन के संस्थापक व सीइओ जेफ बेजोस भारत में इ-कॉमर्स को लेकर बहुत उत्साहित हैं. इ-रिटेल ही नहीं, हम इ-बैंकिंग में भी महा-विस्फोट के द्वार पर खड़े हैं. बिटक्वॉइन के प्रवेश ने मुद्रा और नकदी को नये अर्थ दिये हैं. तमाम वित्तीय-उपकरणों की परिभाषा बदल रही है. भारत के नजरिये से रोचक खबर यह भी है कि विश्व बैंक की छमाही रिपोर्ट में इस बात का संकेत है कि मॉनसून की विफलता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था तमाम अंदेशों को ठुकराते हुए अगले साल साढ़े छह फीसदी की दर से संवृद्धि की ओर बढ़ रही है.
सात साल पहले 2007 में फ्लिपकार्ट ने भारत में ऑनलाइन रिटेल का काम शुरू किया था. उसके अगले साल ही दुनिया को मंदी ने घेर लिया. इस संस्था ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने लिए संसाधन जुटाये और देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर कंपनी बन गयी. उसने भारत के बड़े-छोटे शहरों में खरीदारी के तौर-तरीकों को बदला है. किराना बाजार को छोड़ बाकी पारंपरिक उपभोक्ता बाजारों में इसने सेंध लगायी है. इसे देखते हुए अमेजन ने भी यहां डेरा जमा दिया और यहां तकरीबन दो अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर अपने इरादों जाहिर कर दिया है. देश के तमाम छोटे-बड़े रिटेलर अब किसी न किसी रूप में इंटरनेट की मदद लेने की बात सोचने लगे हैं. सवाल है कि क्या इस होड़ में कोई दम है या यह गुब्बारे की तरह फूट जायेगी?
‘बिग बिलियन डे’ सेल से फ्लिपकार्ट ने केवल बिक्री का नया रिकॉर्ड ही नहीं बनाया, बल्कि पहले 10 घंटे में एक अरब हिट का नया रिकॉर्ड भी कायम किया. ‘बिग बिलियन डे’ सेल की वजह से 24 घंटे के अंदर फ्लिपकार्ट के 10 लाख से ज्यादा मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड किये गये. कंपनी का दावा है कि उसने एक दिन में 600 करोड़ रुपये की कीमत के प्रोडक्ट्स बेच लिये. हालांकि इस दिन फ्लिपकार्ट पर शॉपिंग करनेवाले ग्राहकों को दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा और कई बार साइट के क्रैश होने से खासी परेशानी हुई.
ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ने की एक वजह है आकर्षक ऑफर, डील और वाजिब दाम. महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके जरिये छोटे से कस्बे में बैठा व्यक्ति भी ऐसी चीजें खरीद सकता है, जो उसके बाजार में नहीं मिलतीं और जिसके लिए उसे दिल्ली, मुंबई या किसी बड़े शहर में जाना पड़ता. हालांकि इसकी ज्यादा बड़ी वजह है इंटरनेट इस्तेमाल करनेवालों की तेजी से बढ़ रही संख्या. ऑनलाइन-कल्चर ने बाजार अर्थशास्त्रियों को भी चौंका दिया है. इसमें युवाओं के साथ महिलाओं का बड़ा वर्ग भी जुड़ गया है. घर में सफाई करनेवाला मॉप, सिलाई मशीन, रोटी बनानेवाली मशीन से लेकर सलवार-सूट और साड़ियों के सेट तक ऑनलाइन खरीदे जा रहे हैं. पिछले सोमवार को फ्लिपकार्ट के डील की चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से हुई. ट्विटर और फेसबुक के ट्रेंडिंग टॉपिक में यह शामिल हो गया. जब मांग बढ़ी और चीजें आउट ऑफ स्टॉक हुईं, तो उस पर तीखी प्रतिक्रिया भी हुई.
इंटरनेट पर ‘नो उल्लू बनाविंग’ का पूरा इंतजाम है.
एक सज्जन ने ट्वीट किया, ‘वह कौन शख्स है जिसे एक रुपये में पेन ड्राइव लेने में सफलता मिली, देश जानना चाहता है.’ कुछ उपभोक्ताओं ने नोटिस किया कि डील को बेहतर दिखाने के लिए कुछ चीजों की एमआरपी बढ़ा दी गयी, जिन्हें पहले कम कीमत पर बेचा जा रहा था. क्रोम और मोजीला पर ऐसे एक्सटेंशन उपलब्ध हैं, जिनसे किसी सामान की कीमत को ट्रैक किया जा सकता है कि किस तारीख को उसकी कितनी कीमत थी.
उपभोक्ता यह जानकारी भी दे रहे हैं कि अमेजन ने उन्हें जब गलती से गलत नंबर का जूता भेज दिया, तो शिकायत करने पर न सिर्फ सही नंबर का जूता भेजा, बल्कि पहला जूता भी उसके पास रहने दिया. एक ग्राहक को पुस्तक न भेज पाने पर रुपये तो वापस किये ही, साथ ही 50 रुपये का एक मुफ्त वाउचर भी भेजा. सोशल मीडिया में ऐसी चर्चा से इ-रिटेल को ताकत मिली है. साथ ही कंपनियों की प्रतियोगिता भी बढ़ी है.
अभी तो दीवाली के मौके पर भारी खरीदारी होगी. अमेजन इसी हफ्ते दोबारा सेल लगा रहा है. यह सेल 10 से 16 अक्तूबर तक चलेगी. स्नैपडील ने भी अपनी दीवाली सेल को 25 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है. अनेक उत्पादक इस तरह दामों को गिराने के खिलाफ हैं. उनका मानना है कि इससे बाजार बिगड़ रहा है. इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बेचनेवाली कंपनी एलजी ने आगाह किया है कि इ-कॉमर्स पोर्टल से खरीदे गये एलजी प्रोडक्ट के असली होने की जिम्मेवारी कंपनी की नहीं है. यानी वास्तविक बाजार और वचरुअल बाजार में द्वंद्व है.
देश में एकल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी और मल्टी-ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी विदेशी निवेश की इजाजत है, लेकिन इ-कॉमर्स के बारे में ऐसा कोई फैसला नहीं है. देसी इ-कॉमर्स कंपनियां अपने पास कोई माल खरीद कर एकत्र नहीं करतीं. वे केवल एक मंच मुहैया कराती हैं, जहां खरीदार-विक्रेता मिलते हैं. यह सेवा क्षेत्र का कारोबार है, इसलिए इसमें विदेशी निवेश नहीं रुक पाया. इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के अनुसार, केवल 13 फीसदी भारतीय ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं.
चीन में 44, ब्राजील में 42.2 और दक्षिण अफ्रीका में 39.4 फीसदी नागरिक इंटरनेट पर हैं. यानी अभी संभावनाओं का काफी बड़ा आकाश खुला है. विडंबना है कि भारत में इ-कॉमर्स आज भी फायदे का सौदा नहीं है. इसके बावजूद हम उसकी धूम देख रहे हैं.
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