‘लाइक ’ तीसरा विश्व युद्ध करा के रहेगा!

Published at :07 Sep 2014 11:48 PM (IST)
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‘लाइक ’ तीसरा विश्व युद्ध करा के रहेगा!

सरकारी कंप्यूटर पर शर्माजी द्वारा 25वीं बार फेसबुक खोलते ही बगल में बैठा जूनियर गोपाल बोला, ‘‘बधाई हो सर! ऑफिस के कंप्यूटर पर फेसबुक खोलने की सिल्वर जुबली आप मना रहे हैं. लगता है, गोल्डन जुबली भी आज ही मनायेंगे.’’ शर्माजी ने पान से भरा अपना मुंह 45 डिग्री घूमाया, थूका और बोले, ‘‘कुछ नहीं […]

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सरकारी कंप्यूटर पर शर्माजी द्वारा 25वीं बार फेसबुक खोलते ही बगल में बैठा जूनियर गोपाल बोला, ‘‘बधाई हो सर! ऑफिस के कंप्यूटर पर फेसबुक खोलने की सिल्वर जुबली आप मना रहे हैं.

लगता है, गोल्डन जुबली भी आज ही मनायेंगे.’’ शर्माजी ने पान से भरा अपना मुंह 45 डिग्री घूमाया, थूका और बोले, ‘‘कुछ नहीं गोपाल, उ का है कि फेसबुक पर कल अपनी जवानी का फोटो डाले थे, वही देख रहे है कितना ‘लाइक’ आया है, अभी तक.’’ फिर दोनों मिल कर कंप्यूटर स्क्रीन पर वह तस्वीर ढूंढ़ने लगे, जिसमें शर्माजी बत्तीसी चमका रहे थे. फोटो पर अब तक मिले तीन लाइक देख कर शर्माजी उदास हो गये. या यूं कहें कि यह सदमा शर्माजी बर्दाश्त नहीं कर पाये और बीमार हो गये. आजकल वह ‘सिक लीव’ पर हैं और घर पर बैठे-बैठे सोच रहे हैं कि पड़ोसी गुप्ता ने अपनी मंदिर वाली फोटो पोस्ट की थी, तो तीन हजार से भी ज्यादा लाइक आया था, हमारे फोटो पर तीन ही लाइक क्यों? दरसअल, कुछ लोगों को लाइक पाने की बीमारी होती है.

मेरे एक मित्र ने इस बीमारी का नाम, ‘लाइकेरिया’ रखा है. इस बीमारी से ग्रसित लोगों को हर हाल में, हर पोस्ट पर हजार-दो हजार लाइक चाहिए. इसे पाने के लिए वह कभी भी, कुछ भी कर सकते हैं. अपने फेसबुक वाल पर भगवान की फोटो डाल कर लिखेंगे, हिंदू हैं, तो लाइक करें वगैरह-वगैरह. ऐसे लोग हेयर कट लेने के बाद नहाने से पहले अपनी तस्वीर पोस्ट कर पूछते हैं, कैसा लग रहा हूं मैं? कुछ ऐसे भी हैं, जो बाथरू म से निकलते ही फेसबुक पर लिख देते हैं, जस्ट यूज्ड बाथरूम, नाव फीलिंग रिलैक्स्ड. फिर हर आधे घंटे पर अपना फेसबुक चेक करते रहते हैं कि कितना लाइक आया? लाइक पाने के लिए निजता-मर्यादा की तमाम हदें पार कर देते हैं.

फेसबुक, इंटरनेट पर एक ऐसा मंच है, जो हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन हम उसे अपनी ‘बपौती’ समझते हैं. अभव्यक्ति का दुरुपयोग करते हैं. आम आदमी ही नहीं, नेता, अभिनेता और मंत्री भी ‘लाइकेरिया’ पीड़ित हैं. करोड़ों खर्च कर देते हैं, लाइक के लिए. फिर टीवी पर खबर आती है कि ‘फलाने’ देश के मंत्री के फेसबुक पर इतने फैन हो गये. उन्होंने ‘चिलाने’ देश के मंत्रीजी को पीछे कर दिया है.

अब कल्पना कीजिए कि ‘चिलाने’ देश के लोग परेशान हैं कि हमारे मंत्री जी कैसे पीछे हो गये? अधिकरियों की रोज मीटिंग हो रही है. प्लानिंग हो रही है, लाइक पाने की. फिर कोई बड़ा अधिकारी सुझाव दे दे कि क्यों न ‘फलाने’ देश पर परमाणु बम गिरा दें. लोग मरेंगे, तो वहां के नेता जी का लाइक भी कम हो जायेगा और इस तरह हम अपनी बेइज्जती का बदला भी ले लेंगे और नेताजी का रैंक भी ऊपर हो जायेगा. फिर इस तरह.. भगवान करे, यह कल्पना, कल्पना ही रहे. नहीं तो, लाइक पाने के लिए तीसरा विश्व युद्ध हो जायेगा.

पंकज कुमार पाठक

प्रभात खबर, रांची

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