गैरजिम्मेदारी की भी हद होती है

चंद्रपुरा थर्मल पावर प्लांट में इस्तेमाल होने वाला हजारों लीटर फर्नेस ऑयल बह कर दामोदर नदी में आ गया और नदी का पानी देखते-देखते जहरीला हो गया. माडा ने तत्काल जलापूर्ति का कार्य रोक दिया. जिले की बड़ी आबादी माडा द्वारा सप्लाई पानी पर आश्रित है, वह परेशान है. उपायुक्त के आदेश पर तेनुघाट डैम […]
चंद्रपुरा थर्मल पावर प्लांट में इस्तेमाल होने वाला हजारों लीटर फर्नेस ऑयल बह कर दामोदर नदी में आ गया और नदी का पानी देखते-देखते जहरीला हो गया. माडा ने तत्काल जलापूर्ति का कार्य रोक दिया. जिले की बड़ी आबादी माडा द्वारा सप्लाई पानी पर आश्रित है, वह परेशान है.
उपायुक्त के आदेश पर तेनुघाट डैम से पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि इस जहरीले द्रव को आगे भेजा जा सके. अब सवाल उठता है कि जब किसी तकनीकी अथवा मानवीय भूलवश तेल बह कर नदी की ओर जा रहा था, तो क्या चंद्रपुरा पावर प्लांट में किसी ने नहीं देखा? अगर वहां किसी ने तत्काल प्रयास किया होता तो यह स्थिति नहीं आती. यह सब घोर लापरवाही का नतीजा है. अब देखना यह है कि प्रदूषण विभाग कितनी जिम्मेदारी निभाता है.
मासूम आलम, इमेल से
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