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नये आयकर कानून की राह

Updated at : 29 Aug 2019 6:44 AM (IST)
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नये आयकर कानून की राह

डॉ जयंतीलाल भंडारी अर्थशास्त्री jlbhandari@gmail.com बीते 19 अगस्त को नयी प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड- डीटीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित टास्क फोर्स के अध्यक्ष अखिलेश रंजन ने अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंप दी है. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में प्रत्यक्ष कर कानूनों में व्यापक […]

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डॉ जयंतीलाल भंडारी
अर्थशास्त्री
jlbhandari@gmail.com
बीते 19 अगस्त को नयी प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड- डीटीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित टास्क फोर्स के अध्यक्ष अखिलेश रंजन ने अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंप दी है.
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में प्रत्यक्ष कर कानूनों में व्यापक बदलाव और वर्तमान आयकर कानून को हटाकर नये सरल व प्रभावी आयकर कानून लागू करने की बात कही गयी है.
नये आयकर कानून में छोटे करदाताओं की सहूलियत के लिए कई प्रावधान सुझाये गये हैं. असेसमेंट की प्रक्रिया सरल किये जाने और आयकर कानून के किसी प्रावधान को लेकर करदाता सीधे केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड से व्यवस्था ले सकेंगे. रिपोर्ट में मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (मैट) और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) को हटाने की सिफारिश की गयी है. इसके अलावा कमाई पर दोहरे कर का बोझ भी खत्म करने की सिफारिश की गयी है.
इस समय आयकर अपील ट्रिब्यूनल और उच्च अदालतों में 1.15 लाख करोड़ रुपये के मामले फंसे हैं. आयकर कानून आयुक्त (अपीलीय) के पास 3.41 लाख मामले लंबित हैं, जिनकी राशि 5.71 लाख करोड़ रुपये के लगभग है.
वस्तुतः कर विवादों का बढ़ना और लंबे समय तक निपटारा न होना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी. रिपोर्ट में जीएसटी, कस्टम, फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट और इनकम टैक्स विभागों के बीच जानकारी के लेन-देन की विशेष व्यवस्था निर्मित किये जाने की भी सिफारिश की गयी है.
प्रत्यक्ष कर यानी किसी की आय, संपत्ति व अन्य मदों पर लगाया जानेवाला कर. प्रत्यक्ष कर अन्य लोगों पर हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है. करों में आयकर के अलावा पूंजीगत लाभ कर, संपत्ति कर, उपहार कर और कई अन्य शुल्क शामिल हैं. देश में सरकार की आय में प्रत्यक्ष कर में आयकर सबसे प्रमुख कर है. देश में अंग्रेजों ने सन् 1922 में आयकर की शुरुआत की थी.
यद्यपि आजादी के बाद वर्ष 1961 तक देश की प्रत्यक्ष कर नीति व आयकर कानून में कुछ सुधार किये गये. फिर 1961 में आयकर अधिनियम लागू किया गया. लेकिन इस अधिनयम में एक ओर कार्यान्वयन संबंधी जटिलताएं रहीं, वहीं दूसरी ओर विभिन्न रियायतों और अनेक छूटों के कारण कर अनुपालन में मुश्किलें बढ़ती गयीं.
चूंकि मौजूदा प्रत्यक्ष कर एवं आयकर कानून दुरूह हैं. पिछले एक दशक से आयकर कानून में परिवर्तन की बात आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र से लगातार उठती रही है. यूपीए सरकार ने अगस्त 2009 में विमर्श पत्र सहित प्रत्यक्ष कर संहिता का प्रारूप जारी किया था.
अगस्त 2010 में प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक लोकसभा में पेश किया गया. सितंबर 2010 में इसे संसद की स्थायी समिति को भेजा गया. मार्च 2012 में स्थायी समिति ने रिपोर्ट सौंपी. लेकिन, मई 2014 में लोकसभा भंग होने के साथ ही प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक, 2010 स्वत: समाप्त हो गया. इसके बाद जून 2014 में सरकार ने परिवर्तन के बाद इस विधेयक को फिर से पेश करने का अभियान आगे बढ़ाया.
मोदी सरकार ने नवंबर 2017 में नयी प्रत्यक्ष कर संहिता के लिए टास्क फोर्स का गठन किया था, इस टास्क फोर्स के द्वारा विभिन्न देशों की प्रत्यक्ष कर प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू प्रत्यक्ष कर संधियों का तुलनात्मक अध्ययन करके भारत के लिए श्रेष्ठ नये आयकर कानून व श्रेष्ठ प्रत्यक्ष कर प्रणाली संबंधी रिपोर्ट 22 मई, 2018 को देना थी, लेकिन टॉस्क फोर्स का कार्यकाल आगे बढ़ता गया और अंततः नयी प्रत्यक्ष कर संहिता और नये आयकर कानून की यह रिपोर्ट 19 अगस्त, 2019 को प्रस्तुत हुई.
देश के वर्तमान आयकर कानून की कमियों का संभावित करदाताओं के द्वारा अनुचित फायदा उठाया जाता रहा है. अच्छी कमाई होने के बाद भी लोग आयकर देने से बचते रहे. वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नोटबंदी के कारण वित्त वर्ष 2016-17 के लिए रिटर्न दाखिल करनेवालों की तादाद में भारी वृद्धि हुई.
नोटबंदी के कारण कालाधन जमा करनेवालों में घबराहट बढ़ी. ऐसे में आयकरदाताओं की संख्या बढ़कर 2016-17 में 6.26 करोड़ पर पहुंच गयी, जो 2015-16 की तुलना में 23 फीसदी अधिक है. वर्ष 2017-18 में आयकरदाताओं की संख्या और बढ़कर 7.4 करोड़ हो गयी.
पिछले 58 साल से लागू प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए रंजन की अध्यक्षता में पूर्ण अधिकारों से सुसज्जित कार्यबल द्वारा प्रस्तुत आयकर एवं प्रत्यक्ष कर सुधारों से संबंधित सिफारिशें अहमियत रखती हैं.
इनके आधार पर नये कानून को अमली-जामा पहनाने के लिए कर प्रशासन को तत्काल अपनी क्रियान्वयन रणनीतियों और त्वरित संशोधनों की जरूरत पर ध्यान देना होगा. नये कानून से नये कारोबार और डिजिटल लेन-देन पर आयकर संबंधी स्पष्टता आयेगी.
चूंकि देश की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है, ऐसे में सरकार द्वारा उद्योग-कारोबार जगत को राहत देने के लिए रंजन समिति की सिफारिशों के आधार पर सरल और प्रभावी नयी प्रत्यक्ष कर संहिता और नये आयकर कानून को शीघ्र आकार देना होगा, जिससे करदाताओं की सहूलियत बढ़े और कर संग्रह भी बढ़े.
नये आयकर कानून के आकार लेने के बाद बड़ी संख्या में नये आयकरदाता दिखेंगे और टैक्स संबंधी मुकदमेबाजी कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, इससे देश की अर्थव्यवस्था भी गतिशील हो सकेगी.
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