आरबीआइ की आकस्मिक निधि
Updated at : 28 Aug 2019 12:29 AM (IST)
विज्ञापन

जब अभिभावक को अपने बच्चों द्वारा जमा किये गये पैसों वाला गुल्लक तोड़ना पड़े, तो समझिए उस घर की माली हालत ठीक नहीं है. ठीक यही परछाईं केंद्र सरकार की दिख रही है. पिछले वित्तीय वर्ष और इस वित्तीय वर्ष में अब तक आरबीआइ से कुल एक लाख 76 हजार 51 करोड़ रुपये सरकार को […]
विज्ञापन
जब अभिभावक को अपने बच्चों द्वारा जमा किये गये पैसों वाला गुल्लक तोड़ना पड़े, तो समझिए उस घर की माली हालत ठीक नहीं है. ठीक यही परछाईं केंद्र सरकार की दिख रही है. पिछले वित्तीय वर्ष और इस वित्तीय वर्ष में अब तक आरबीआइ से कुल एक लाख 76 हजार 51 करोड़ रुपये सरकार को लेने पड़े.
ऐसा अपने वित्तीय घाटे को पाटने के लिए किया गया है. इसे सीधे बेल आउट पैकेज माना जा सकता है. भले ही बिमल जालान समिति के प्रतिवेदन की आड़ में ऐसा किया गया. आज तक इस देश में जो नहीं हुआ, वह अब हो रहा है.
आरबीआइ की आकस्मिक निधि में प्रतिवर्ष लाखों करोड़ रुपये जमा के रूप में रखे जाते हैं, ताकि आपातकालीन जरूरत में उसका इस्तेमाल देश के लिए किया जा सके, मगर अभी तो वैसा कुछ है नहीं. पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल को सरकार के दबाव में ही इस्तीफा देना पड़ा था. इन सब बातों से यह तो स्पष्ट है कि देश की माली हालत फिलहाल ठीक नहीं है.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




