स्वतंत्रता के ध्येय

पंद्रह अगस्त, 1947 से अनवरत चल रही राष्ट्र यात्रा में विकास एवं समृद्धि के अनगिनत सुनहरे मील के पत्थर हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष और बलिदान इस यात्रा के आधार भी हैं तथा आदर्श भी. औपनिवेशिक शासन ने देश को भौतिक रूप से जीर्ण-शीर्ण कर दिया था, परंतु हमारे पुरखों ने युगों से संचित नैतिक […]
पंद्रह अगस्त, 1947 से अनवरत चल रही राष्ट्र यात्रा में विकास एवं समृद्धि के अनगिनत सुनहरे मील के पत्थर हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष और बलिदान इस यात्रा के आधार भी हैं तथा आदर्श भी. औपनिवेशिक शासन ने देश को भौतिक रूप से जीर्ण-शीर्ण कर दिया था, परंतु हमारे पुरखों ने युगों से संचित नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिकता और आत्मबल को संबल बनाकर हमारे लिए स्वतंत्रता का अर्जन किया. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम उन सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं का स्मरण करते हुए उनके सपनों के भारत के सृजन का संकल्प दुहराते हैं. यह राष्ट्रीय पर्व हमें अपनी उपलब्धियों के गौरव गान का दिवस तो है ही, अपनी सफलताओं और असफलताओं को सामने रख आत्ममंथन का दिवस भी है.
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