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कश्मीर की बदलेगी आर्थिक तस्वीर

Updated at : 07 Aug 2019 7:21 AM (IST)
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कश्मीर की बदलेगी आर्थिक तस्वीर

डॉ जयंतीलाल भंडारी अर्थशास्त्री jlbha-dari@gmail.com कल तक यह कहा जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर चमकीले आर्थिक विकास की संभावनाएं रखता है. वहां अनुच्छेद 370 के कारण विकास की संभावनाएं धरातल पर नहीं आ पा रही थीं. लेकिन, अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के चमकीले आर्थिक विकास का परिदृश्य दिख रहा है. देश और […]

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डॉ जयंतीलाल भंडारी

अर्थशास्त्री

jlbha-dari@gmail.com

कल तक यह कहा जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर चमकीले आर्थिक विकास की संभावनाएं रखता है. वहां अनुच्छेद 370 के कारण विकास की संभावनाएं धरातल पर नहीं आ पा रही थीं. लेकिन, अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के चमकीले आर्थिक विकास का परिदृश्य दिख रहा है. देश और दुनिया के अर्थविशेषज्ञ कह रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर का विकास भी अब दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ जैसा होगा.

वर्ष 2018-19 में जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.9 प्रतिशत रही थी. जबकि यह 2017-18 में 8.5 प्रतिशत रही थी. 2018-19 में जम्मू-कश्मीर राज्य की जीडीपी 1,16,637 करोड़ रुपये थी.

राज्य का राजकोषीय घाटा 9,673 करोड़ रुपये, जो उसकी जीडीपी का 6.1 प्रतिशत था. कृषि क्षेत्र में 2018-19 में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि रही. मैन्यूफैक्चरिंग, बिजली, जल आपूर्ति, निर्माण और खनन क्षेत्र में छह प्रतिशत की वृद्धि रही. सेवा क्षेत्र जम्मू-कश्मीर राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण रूप से योगदान करता है.

वर्ष 2018-19 में इस क्षेत्र का योगदान 56 प्रतिशत रहा था. वास्तव में जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी चुनौती राजस्व से संबंधित रही है. इसका सबसे प्रमुख कारण जम्मू-कश्मीर का केंद्रीय संसाधनों पर निर्भर होना रहा है. जम्मू-कश्मीर के कुल राजस्व का 50 प्रतिशत भाग अनुदान के तौर पर केंद्र से आता रहा है. अब अनुच्छेद 370 के हटने के बाद राजस्व के नये साधनों से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकेगी.

जम्मू-कश्मीर के अधिकांश लोग कृषि और पर्यटन की आय तक सीमित रहे हैं, लेकिन अब अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद इन दोनों क्षेत्रों के साथ वहां उद्योग-व्यापार की नयी संभावनाएं उत्पन्न होंगी. जम्मू-कश्मीर के अधिकांश लोग जीवन निर्वाह के लिए कृषि कार्य करते हैं.

कश्मीरी लोग चावल, मक्का, गेहूं, जौ, दालें, तिलहन तथा तंबाकू उत्पादित करते हैं. कश्मीर घाटी भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एकमात्र केसर उत्पादक है. वहां बड़े-बड़े बागों में सेब, नाशपाती, आडू, शहतूत, अखरोट और बादाम उगाये जाते हैं. लेकिन इन सबकी उत्पादकता बहुत कम है. रेशम कीट पालन भी कश्मीर में बहुत प्रचलित है.

गौरतलब है कि हस्तशिल्प जम्मू-कश्मीर का परपंरागत उद्योग है. जम्मू-कश्मीर के प्रमुख हस्तशिल्प उत्पादों में कागज की लुगदी से बनी वस्तुएं, लकड़ी पर नक्काशी, कालीन, शॉल और कशीदाकारी का सामान आदि शामिल हैं.

जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था काफी हद तक हस्तकला उद्योगों पर निर्भर है. इससे काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित होती है. बर्तन, खेल का सामान, फर्नीचर, माचिस और राल व तारपीन जम्मू-कश्मीर के मुख्य औद्यागिक उत्पादन हैं. अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद देश के अन्य क्षेत्रों से इन छोटे उद्योगों एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में नयी पूंजी प्राप्त हो सकेगी, जिससे ये उद्योग आगे बढ़ सकेंगे.

पिछले 30 वर्षों में जबसे जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ी हैं, तब से राज्य की प्रति व्यक्ति आय में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है. अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार पर्यटन काफी हद तक खत्म हो चुका है.

जम्मू-कश्मीर सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद कश्मीर की ओर टूरिस्टों का रुख बहुत कम होने का परिणाम यह है कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में वह सुधार नहीं हो पाया है, जिसकी उम्मीद थी. अब वहां की टूरिज्म इंडस्ट्री को बहुत भारी उछाल मिलेगा और शिकारा और हाउसबोट जैसे उद्योगों में दोबारा जान आयेगी.

अब जम्मू-कश्मीर के मूल लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. केंद्र सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा. कश्मीर में व्यापार और उद्योग के लिहाज से निवेश बढ़ेगा, तो उत्पादन भी बढ़ेगा.

जिसका असर राज्य की जीडीपी पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा. इसका फायदा वहां के लोगों को सीधे तौर पर होगा. उद्योग-व्यापार आने से जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे. उन्हें अपने घर को छोड़कर दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए नहीं जाना होगा. वहां के लोगों की प्रति व्यक्ति आय में इजाफा होगा और जीवनशैली में सुधार होगा.

इस समय जम्मू-कश्मीर में जन सुविधाओं और बुनयादी ढांचे की बहुत कमी है. साथ ही जम्मू-कश्मीर में स्वस्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद बाहरी निवेश आने से बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होगा तथा वहां आर्थिक-सामाजिक खुशहाली आयेगी. मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने का यह कदम जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों के साथ-साथ देश हित में भी है.

जो उद्योग वहां पर प्रदेश सरकार की दखलअंदाजी की वजह से नहीं जा पा रहे थे, अब वे वहां पर जा सकेंगे. वहीं जम्मू-कश्मीर में देश के सभी लोगों की आवाजाही बढ़ेगी. मौजूदा समय में कश्मीर में प्रॉपर्टी के दाम कम हैं. अब वहां प्रॉपर्टी के दामों में उछाल देखने को मिलेगा.

हम आशा करें कि अब अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में एक नये आर्थिक युग की शुरुआत होगी. जिस तरह स्विट्जरलैंड पर्यटकों के लिए शानदार जगह बना हुआ है, उसी तरह पर्यटकों से उत्पन्न हुई आय से जम्मू-कश्मीर भी नयी ऊंचाई को छू लेगा. जम्मू-कश्मीर में रोजगार और समृद्धि के नये द्वार खुलेंगे. उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में वहां की आम जनता से लेकर राज्य की अर्थव्यवस्था तक की नयी चमकीली तस्वीर दिखायी देगी.

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