गांवों के रहन-सहन में तेजी से आ रहा बदलाव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jun 2019 6:42 AM (IST)
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भारत गांवों का देश है. यह परिभाषा अब तेजी से बदल रही है. कारण गांवों में बहती विकास की धारा है. आज स्थिति है कि गांवों में नल जल योजना का पानी, सड़क व बिजली के साथ इंटरनेट सेवा का भी तेजी से विकास हो रहा है. इन सबके कारण गांवों में भी शहरी सुविधा […]
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भारत गांवों का देश है. यह परिभाषा अब तेजी से बदल रही है. कारण गांवों में बहती विकास की धारा है. आज स्थिति है कि गांवों में नल जल योजना का पानी, सड़क व बिजली के साथ इंटरनेट सेवा का भी तेजी से विकास हो रहा है.
इन सबके कारण गांवों में भी शहरी सुविधा उपलब्ध हो गयी है. इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि अब गांव के लोग सीधा शहर से जुड़ गये हैं. भौतिक वस्तुओं की उपलब्धता हो गयी है, जिसने ग्रामीण जीवन सुलभ कर दिया है. नकारात्मक परिणाम को देखें तो लोगों की जीवनचर्या अब पहले जैसी नहीं रही.
पारंपरिक भोजन आदि सब खत्म होते जा रहे हैं. गांवों में संध्या भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ के साथ आपसी संबंध भी समाप्त हो रहे हैं. पहले जैसी भाईचारे और सहयोग की भावना आदि संस्कार भी नहीं रही. गांवों को भीतर से पढ़ने पर पता चलेगा कि यहां के लोग आज द्वेष और दुर्भावना से ग्रसित हैं.
आदित्य मिश्रा, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)
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