ePaper

गर्मी से लड़ने के तौर-तरीके

Updated at : 06 Jun 2019 5:44 AM (IST)
विज्ञापन
गर्मी से लड़ने के तौर-तरीके

क्षमा शर्मा वरिष्ठ पत्रकार kshamasharma1@gmail.com गर्मी से हाहाकार है. कहीं पानी नहीं है, कहीं बिजली नहीं है. दोपहर में सड़कों पर कर्फ्यू सा लगा है. चुरू राजस्थान में पारा 50 डिग्री तक जा पहुंचा है. कानपुर ने गर्मी का दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. लोग गर्मी से बचने के लिए शीतल पेय और आइसक्रीम […]

विज्ञापन

क्षमा शर्मा

वरिष्ठ पत्रकार

kshamasharma1@gmail.com

गर्मी से हाहाकार है. कहीं पानी नहीं है, कहीं बिजली नहीं है. दोपहर में सड़कों पर कर्फ्यू सा लगा है. चुरू राजस्थान में पारा 50 डिग्री तक जा पहुंचा है. कानपुर ने गर्मी का दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. लोग गर्मी से बचने के लिए शीतल पेय और आइसक्रीम का सहारा ले रहे हैं.

भारत एक गर्म देश है, इसलिए पुरखों ने गर्मी से निपटने के तरह-तरह के तरीके भी ईजाद किये थे. घर की रसोई संभालने वाली स्त्रियों को इसकी जानकारी थी. गर्मी के दिनों में खाली पेट कभी बाहर न निकला जाये. छाछ का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाये.

सौंफ, खरबूजे के बीज गुलाब की पंखुड़ियों और काली मिर्च की ठंडाई दूध में मिलाकर पी जाये.फालसे का शर्बत पिया जाये. मौसमी फल जैसे खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूज का इस्तेमाल किया जाये. खीरा, ककड़ी या खरबूज खाली पेट कभी न खाये जायें. इन्हें खाने के बाद पानी कभी न पिया जाये. कच्ची अमिया, चीनी, पोदीना, भुने जीरे से बना पना और दही की लस्सी का प्रयोग किया जाये. लू से बचने के लिए घर से बाहर निकलते वक्त खूब पानी पीकर निकला जाये.

सिर ही नहीं शरीर के अन्य अंग भी ढका जाये. गर्मी से लौटकर तत्काल पानी न पिया जाये. पंखे के नीचे खड़े होकर पसीना न सुखाया जाये, जिससे ठंडा-गर्म न हो जाये. इन दिनों एक पंखे का विज्ञापन कहता है कि पंखे के नीचे खड़े होकर जल्दी से पसीना सुखा लिया जाये, यानी कि विज्ञापन बनानेवालों को भी हवा में पसीना सुखाने के दुष्परिणाम नहीं मालूम हैं.

अक्सर पुरानी बातों को पिछड़ा कहकर खारिज कर दिया जाता है, जबकि यह सच नहीं होता है. कठिनाइयों, रोगों और मौसम की आपदाओं से लड़ने के तरीके पीढ़ियों के अनुभव जन्य ज्ञान से निकलते हैं. ज्ञान एक तरह से आजकल कहे जानेवाले क्लीनिकल ट्रायल जैसे होते हैं.

इन ट्रायल्स में भी दवाओं के असर को मरीज के अनुभव जन्य ज्ञान से ही मिलाया जाता है, बल्कि डॉक्टर भी दवा लिखने से पहले मरीज से तकलीफ और अनुभव को ही पूछते हैं. सिर्फ खान-पान ही नहीं मौसम जन्य विपत्तियों से निपटने का एक तरीका हमारा पहनावा और वस्त्र भी होते हैं. इसीलिए हर जगह की पोशाकें अलग-अलग दिखती हैं.

गर्मी के इस मौसम में अपने अतीत की तरफ देखना जरूरी है. हमारी माताएं, दादियां, नानियां इन दिनों हमें क्या खिलती-पिलाती थीं, क्या सलाह देती थीं. जिद करने पर भी बहुत सी चीजें खाने को मना करती थीं और कहती थीं कि अगर खाओगे तो बीमार पड़ोगे. अक्सर उनका कहा सच भी होता था.

गरमी में अक्सर रात के वक्त हल्का खाना खाने की सलाह दी जाती थी. डॉक्टर आज भी यही कहते हैं जिससे कि गरमी से परेशान हमारा पाचनतंत्र रात में और परेशान न करे.हम चैन की नींद सो सकें. मुड़कर बुजुर्गों की सीख के बारे में सोचिये और गर्मी से अच्छी तरह से निपटिये.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola