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चुनाव परिणाम तक नागरिक-संहिता

Updated at : 18 Mar 2019 7:24 AM (IST)
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चुनाव परिणाम तक नागरिक-संहिता

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार puranika@gmail.com लोकसभा चुनावों की घोषणा हो गयी है, 23 मई 2019 को परिणाम भी आ जायेंगे. चुनाव आयोग ने नेताओं के लिए आचार संहिता लगा दी है, पर नागरिक-वोटर लोकतंत्र में सबसे ताकतवर होते हैं और इसलिए उनमें से कुछ खुद को हर तरह के नियम-कायदों से मुक्त भी मानते हैं. […]

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आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

puranika@gmail.com

लोकसभा चुनावों की घोषणा हो गयी है, 23 मई 2019 को परिणाम भी आ जायेंगे. चुनाव आयोग ने नेताओं के लिए आचार संहिता लगा दी है, पर नागरिक-वोटर लोकतंत्र में सबसे ताकतवर होते हैं और इसलिए उनमें से कुछ खुद को हर तरह के नियम-कायदों से मुक्त भी मानते हैं.

देश के आम वोटर के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए निम्नलिखित नागरिक-संहिता जारी की जा रही है. नागरिकों की जान की कीमत तो अलबत्ता दो कौड़ी की भी नहीं मानी जाती कई नेताओं द्वारा. अलबत्ता नागरिक के माल की कीमत तो कुछेक सौ या हजार की होती है, जैसे उसके पास हजार का मोबाइल हो सकता है या कुछेक हजार का टीवी भी हो सकता है, किसी संभावित मार-धाड़ में इनको टूट-फूट से बचाने के लिए चार नागरिक संहिता का पालन आवश्यक है-

एक: पड़ोसी, बस-रेल में सफर कर रहे सहयात्री से ना झगड़ें कि मोदी जीतेंगे या राहुल गांधी जीतेंगे. और इस सवाल पर मार-धाड़ तो कतई ना करें, याद रखें कि अगर आपको हार्ट अटैक आया, तो आपका पड़ोसी ही आपको अस्पताल पहुंचाने जायेगा, किसी नेता का मौके पर पहुंचना असंभव है.

पति-पत्नी अगर विपरीत राजनीतिक विचारधारा के हैं, तो साफ चेतावनी है कि बिल्कुल भी राजनीतिक विमर्श ना करें. पति-पत्नी को कोई कमी थोड़े ही है उन मसलों की, जिन पर सुचिंतित, सुदीर्घ, प्रखर और कर्कश लड़ाई की जा सके. तो काहे को राजनीति को लाना लड़ाई में, यानी पति-पत्नी को लड़ाई-झगड़े के मामले में आत्मनिर्भर होना चाहिए, किसी नेता के नाम पर लड़ना पति-पत्नी के सशक्त रिश्ते का अपमान है. अपने बूते लड़ना चाहिए, नेता का नाम लेकर क्या लड़ना.

तीन: पार्क में माॅर्निंग वाॅक के समय किसी से राजनीतिक विमर्श ना करें. माॅर्निंग वाॅक के वक्त आम तौर पर वैसे ही ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है.

नेताओं का नाम लेकर छिड़े विमर्श में किसी का ब्लड प्रेशर बढ़ा, तो बंदा पार्क में ही टें बोल सकता है. किसी के ऐसे टें बोलने से आलसियों को यह तर्क देने का मौका मिल जाता है कि माॅर्निंग वाॅक पर नहीं जाना चाहिए, देखो वहां वे टें बोल गये. माॅर्निंग वाॅक को बढ़ावा देने के लिए यह जरूरी है कि कभी माॅर्निंग वाॅक के वक्त राजनीतिक विमर्श नहीं करना चाहिए.

चार: न्यूज चैनलों को नहीं देखना चाहिए. इन दिनों न्यूज चैनल या तो पाकिस्तान पर मिसाइल और बमों की वर्षा कर रहे हैं या फिर आपस में नेताओं की भिड़ंत करवा रहे हैं. न्यूज कवरेज देख कर भी ब्लड प्रेशर बढ़ने के पूरे आसार हैं.

अगर टीवी के बगैर आपका काम ना चल रहा हो, तो फिर वो वाले टीवी चैनल देखें, जिनमें मगरमच्छों के बढ़ते कोलेस्ट्राॅल- पर तीन घंटे की डॉक्यूमेंट्री दिखायी जाती है. क्या कहा? इन कार्यक्रमों को देख कर क्या होगा? जी, फिर तो यह बता दीजिए कि पाकिस्तान पर बम वर्षा या नेताओं की भिड़ंत देख कर क्या होता है? मगरमच्छ का कोलेस्ट्रॉल देखने का फायदा यह है कि इसे देख कर ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता है

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