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उम्मीदें और आशंकाएं

Updated at : 01 Jan 2019 7:05 AM (IST)
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उम्मीदें और आशंकाएं

नये साल का पहला दिन सिर्फ कैलेंडर बदलने का कर्मकांड नहीं होता. आज हम पूरे साल के लिए कुछ संकल्प भी लेते हैं और कामनाओं का कोना भी तैयार करते हैं. अनुभवों और उपलब्धियों का आधार हमें बेहतर करने और होने का हौसला देता है. व्यक्ति से लेकर वैश्विक स्तर पर मानवता की जीवन-यात्रा की […]

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नये साल का पहला दिन सिर्फ कैलेंडर बदलने का कर्मकांड नहीं होता. आज हम पूरे साल के लिए कुछ संकल्प भी लेते हैं और कामनाओं का कोना भी तैयार करते हैं. अनुभवों और उपलब्धियों का आधार हमें बेहतर करने और होने का हौसला देता है.

व्यक्ति से लेकर वैश्विक स्तर पर मानवता की जीवन-यात्रा की यही प्रक्रिया रही है. सुख-दुख, लाभ-हानि और खोने-पाने के हिसाब के बीच दुनिया आगे बढ़ती रही है. प्रगति की राह पर अग्रसर होने की बुनियादी शर्त यह है कि समाज में अमन-चैन और भाईचारा हो तथा कारोबार और कमाई के अवसर हों.

सामाजिक तनाव राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए खतरा है. हमारी सामूहिक कोशिश होनी चाहिए कि परस्पर सद्भाव और सहयोग का वातावरण बने. महिलाओं और बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करना देश के भविष्य को गढ़ना है. इसी तरह वंचित और निर्धन समूहों को विकास और समृद्धि की यात्रा में सहभागी बनाने का उत्तरदायित्व भी है.

लोकसभा के साथ अनेक राज्यों की विधानसभा के चुनाव इस वर्ष होंगे. शांतिपूर्ण ढंग से यह प्रक्रिया पूरी हो और अधिकाधिक मतदाताओं की भागीदारी हो, ताकि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिल सके. अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में तुरंत किसी बड़े बदलाव की उम्मीद करना बाद में निराशा का कारण बन सकती है.

चूंकि विदेश नीति और वाणिज्यिक नीति जुड़े हुए हैं, इस कारण आर्थिक मोर्चा एक कूटनीतिक मोर्चा भी बन गया है. सरकार और समाज को पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम को प्राथमिकता देनी होगी. इस वर्ष स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हो सकती हैं. लेकिन, प्रदूषण रोकने और जलवायु परिवर्तन के कारण आनेवाली आपदाओं की चुनौती बहुत गंभीर है.

देश के कुछ हिस्सों में अलगाववाद और आतंकवाद की मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. पाकिस्तान से घुसपैठ और गोलाबारी में कमी नहीं आयी है. छोटे-बड़े साइबर हमलों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है.

कृषि-संकट और बेरोजगारी चुनावी साल में चर्चा के अहम मुद्दे होंगे. उद्योग, यातायात और विनिर्माण में तेजी लाये बिना आर्थिक वृद्धि हासिल करना मुश्किल होगा. खेल-कूद, सिनेमा, साहित्य और कला पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि हमारा सांस्कृतिक जीवन समृद्ध हो. डिजिटल तकनीक के प्रसार ने नये भारत की रूप-रेखा निर्धारित करने में बड़ा योगदान दिया है. इसके अच्छे और बुरे नतीजों पर चर्चा हो रही है.

देहात और दूर-दराज में भी स्मार्ट फोन, इंटरनेट, संचार और मनोरंजन के नये साधन पहुंचने लगे हैं. इस साल तकनीक और संस्कृति का यह संयोजन और सघन होगा. भारत एक युवा देश है. आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा ऊर्जा और संभावना से भरा है. साल 2019 की कामयाबी और खुशहाली की पतवार नौजवानों के हाथ में है.

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