...तो शिक्षा अलग क्यों
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Dec 2018 7:17 AM (IST)
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देश में आर्थिक और बौद्धिक आधार पर अलग-अलग जीवन शैली ने भी हमारी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है. यह सच है कि देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की अपेक्षा आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं. आर्थिक आधार पर शिक्षा का बंटवारा और समानांतर शिक्षण संस्थाओं […]
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देश में आर्थिक और बौद्धिक आधार पर अलग-अलग जीवन शैली ने भी हमारी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है. यह सच है कि देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की अपेक्षा आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं.
आर्थिक आधार पर शिक्षा का बंटवारा और समानांतर शिक्षण संस्थाओं में पाठ्यक्रम से लेकर पाठ्यपुस्तकों तक के स्वरूप में स्पष्ट विभाजन होना शिक्षा के लिए कतई उचित नहीं. शिक्षक और शिक्षार्थियों का स्तर भी अलग-अलग नजरिये से देखा जाना शायद कमजोर शिक्षा पद्धति की मुख्य वजह है. सवाल है कि देश एक-उद्देश्य एक, तो शिक्षा अलग क्यों है?
शिक्षा की बेहतरी के लिए जरूरी है कि मौलिक शिक्षा में किसी भी तरह के भेदभाव की कोई गुंजाइश न हो. इसके लिए नीति ही नहीं नियत की भूमिका तय करनी होगी. बच्चों और अभिभावकों में बढ़ती हीन भावना को दूर करने के लिए आवश्यक है कि शिक्षा व्यवस्था में गैरबराबरी दूर करने के प्रयास हो.
एमके मिश्रा, रातू, रांची
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