दुर्घटना से देर भली

रेल टिकटों एवं अन्य यातायात सूचनाओं में लिखा मिलता है कि आपकी यात्रा शुभ हो, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार, यात्रा के मंगलमय होने की गारंटी तो केवल भगवान ही दे सकते हैं. आये दिन अखबारों में बड़ी दुर्घटनाओं की खबरों आती रहती हैं, जिससे हमारा मन-मस्तिष्क थरथरा जाता है. सड़क परिवहन मंत्रालय की एक […]
रेल टिकटों एवं अन्य यातायात सूचनाओं में लिखा मिलता है कि आपकी यात्रा शुभ हो, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार, यात्रा के मंगलमय होने की गारंटी तो केवल भगवान ही दे सकते हैं. आये दिन अखबारों में बड़ी दुर्घटनाओं की खबरों आती रहती हैं, जिससे हमारा मन-मस्तिष्क थरथरा जाता है.
सड़क परिवहन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष लगभग पांच लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित होते हैं, जिनमें से 1.5 लाख लोगों की जान तक चली जाती है, यानी प्रति दिन हमारे देश में 400 लोगों की जान जान सड़क दुर्घटना में जा रही है. बड़ा सवाल है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? खराब इंजीनियरिंग, रोड डिजाइन, घटिया निर्माण या लापरवाह चालक? दूसरी कि जो परिवार अपना सदस्य इन दुर्घटनाओं में खोता है, वह पूरी तरह से टूट जाता है. परिवार की खुशियां जिंदगी भर के लिए छिन जाती हैं. हमें यह समझना होगा. हादसे पर नियंत्रण हासिल करना होगा. अच्छी सड़कों का निर्माण और यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन हमें करना होगा. यह तय कर लेना होगा कि दुर्घटना से देर भली है.
मो कौसर, वासेपुर, धनबाद
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