गांधी को कैसे दें श्रद्धांजलि

Updated at : 01 Oct 2018 5:15 AM (IST)
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गांधी को कैसे दें श्रद्धांजलि

आशुतोष चतुर्वेदी प्रधान संपादक, प्रभात खबर ashutosh.chaturvedi @prabhatkhabar.in राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जन्मशती शुरू हो रही है. गांधी का व्यक्तित्व बहुआयामी और विराट था और उन्हें अलग अलग तरीके से श्रद्धांजलि दी जा सकती है. मसलन, जन्मशती वर्ष पर केंद्र सरकार ने महात्मा के संदेशों का प्रचार प्रसार करने के लिए राष्ट्रीय और […]

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आशुतोष चतुर्वेदी
प्रधान संपादक, प्रभात खबर
ashutosh.chaturvedi
@prabhatkhabar.in
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जन्मशती शुरू हो रही है. गांधी का व्यक्तित्व बहुआयामी और विराट था और उन्हें अलग अलग तरीके से श्रद्धांजलि दी जा सकती है.
मसलन, जन्मशती वर्ष पर केंद्र सरकार ने महात्मा के संदेशों का प्रचार प्रसार करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री मोदी सत्ता में आने के बाद से ही महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने का अभियान छेड़े हुए हैं. इसके लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं. प्रधानमंत्री देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को प्रेरणा का बड़ा स्रोत मानते हैं.
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देश को साफ-सुथरा बनाने के तहत हर राज्य और यहां तक कि जिले में व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं. ये प्रयास सराहनीय हैं. आप को लगता है कि कुछ अन्य तरीके से महात्मा को श्रद्धांजलि दी जा सकती है, तो आप वह उपाय अपना सकते हैं. लेकिन यह जान लीजिए कि मौजूदा दौर में गांधी के आदर्शों और उनके दिखाये रास्ते पर चलने की जरूरत एक बार फिर शिद्दत से महसूस की जा रही है.
यह सच है कि सफाई के प्रति गांधी जी को विशेष प्रेम था और वह बहुत जल्दी जान गये थे कि हम भारतीयों का सफाई के प्रति नकारात्मक रवैया है. भारतीय सफाई के लिए कोई प्रयास नहीं करते हैं और जो लोग सफाई के काम में जुटे होते हैं, उन्हें हम हेय दृष्टि से देखते हैं. महात्मा गांधी की एक बड़ी खासियत यह थी कि वह लोगों से किसी काम का अनुरोध बाद में करते थे, पहले उस पर खुद अमल करते थे.
गांधी अपने मैले की सफाई खुद करते थे और अपने साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करते थे. 11 फरवरी, 1938 को हरिपुरा अधिवेशन में सफाई कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गांधीजी ने कहा था- मुझे यह देखकर बड़ी खुशी हुई है कि आप लोगों ने यह काम अपने हाथ में ले लिया है. यह काम प्रेम से और बुद्धिमत्तापूर्वक किया जाना चाहिए. प्रेम से इसलिए कि जो लोग गंदगी फैलाते हैं उन्हें यह नहीं मालूम कि वे क्या बुराई कर रहे हैं और बुद्धिमत्तापूर्वक इसलिए कि हमें उनकी आदत छुड़ानी है और उनका स्वास्थ्य सुधारना है.
गांधीजी ने धार्मिक स्थलों में फैली गंदगी की ओर भी ध्यान दिलाया था. अगर आप गौर करें तो पायेंगे कि आज भी अनेक धार्मिक स्थलों में गंदगी का अंबार लगा रहता है और उनकी सफाई की तत्काल आवश्यकता है.
यंग इंडिया के फरवरी, 1927 के अंक में उन्होंने बिहार के पवित्र शहर गया की गंदगी के बारे में भी लिखा था. उनका कहना था कि उनकी हिंदू आत्मा गया के गंदे नालों में फैली गंदगी और बदबू के खिलाफ विद्रोह करती है.
गांधी वांग्मय के अनुसार 1917 के गुजरात राजनीतिक सम्मेलन में गांधी ने कहा था- मैं पवित्र तीर्थ स्थान डाकोर गया था. वहां की पवित्रता की कोई सीमा नहीं है. मैं स्वयं को वैष्णव भक्त मानता हूं, इसलिए मैं डाकोर जी की स्थिति की विशेष रूप से आलोचना कर सकता हूं. उस स्थान पर गंदगी की ऐसी स्थिति है कि स्वच्छ वातावरण में रहने वाला कोई व्यक्ति वहां 24 घंटे भी नहीं ठहर सकता.
लेकिन यह दुखद है कि गांधी जयंती से ठीक कुछ दिन पहले राजधानी दिल्ली से खबर सामने आयी कि सीवर की सफाई करते हुए दो घटनाओं में छह सफाईकर्मियों की मौत हो गयी. दिल्ली समेत देशभर में सीवर और नाले की सफाई के दौरान जहरीली गैसों से हुई मौत को देखते हुए मैनुअल तरीके से नालों और सेप्टिक टैंक की सफाई के खिलाफ आंदोलन भी छेड़ा गया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की राजधानी दिल्ली में सात दिनों में सीवर की सफाई के दौरान 11 सफाईकर्मियों की मौतें हुई हैं.
इस साल मई में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायु प्रदूषण के लिहाज से दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की थी जिसमें 14 शहर भारत के थे. चिंता की बात है कि इसमें बिहार के तीन शहर गया, पटना और मुजफ्फरपुर शामिल थे.
रिपोर्ट के अनुसार कानपुर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है. इस लिस्ट में दिल्ली छठे नंबर पर है और वाराणसी तीसरे नंबर पर है. ये आंकड़े इन शहरों की वायु गुणवत्ता के आधार पर जारी किये गये हैं. सन् 2013 में दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी की गयी थी जिसमें अकेले चीन के पेइचिंग समेत 14 शहर शामिल थे.
लेकिन चीन ने कड़े कदम उठाये और प्रदूषण की समस्या पर काबू पा लिया. कहने का आशय यह है कि अगर हम भी उपाय करें तो स्थिति पर काबू पाया जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि भारत में 34 फीसदी मौतों के लिए प्रदूषण जिम्मेदार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का आकलन है कि प्रदूषण के कारण हर साल दुनिया भर में 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है जिसमें 24 लाख लोग भारत के हैं. ये आंकड़े किसी भी देश और समाज के लिए बेहद चिंताजनक हैं.
अगर आप गौर करें तो पायेंगे कि प्रदूषित शहरों की सूची में दक्षिण का कोई शहर शामिल नहीं हैं. हैदराबाद और बंगलुरू जैसे शहर आबादी के लिहाज से बड़े हैं लेकिन योजनाबद्ध तरीके से विकास के कारण इन शहरों को प्रदूषण की समस्या से जूझना नहीं पड़ रहा है. औरों को तो छोड़िए यदि झारखंड के संथाली गांवों को देखेंगे तो आप पायेंगे कि वे किसी भी शहर से ज्यादा सुंदर और साफ-सुथरे हैं. यह सरकारी प्रयासों से नहीं होता बल्कि जनभागीदारी से संभव हो पाता है.
नागरिकों में जब तक साफ सफाई और प्रदूषण के प्रति चेतना नहीं जागेगी तब तक कोई उपाय कारगर साबित नहीं होंगे. होता यह है कि हम लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करके सुंदर मकान तो बना लेते हैं, लेकिन नाली पर ध्यान नहीं देते. अगर नाली है भी तो उसे भी पाट देते हैं और गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है. यही स्थिति कूड़े की है. हम रास्ता चलते कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं, उसे कूड़े दान में नहीं डालते.
स्वच्छता और सफाई के काम को करने में सांस्कृतिक बाधाएं भी आड़े आती हैं. देश में ज्यादातर धार्मिक स्थलों के आसपास अक्सर बहुत गंदगी दिखाई देती है. इन जगहों पर चढ़ाये गये फूलों के ढेर लगे होते हैं.
कुछेक मंदिरों ने स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से फूलों के निस्तारण और उन्हें जैविक खाद बनाने का प्रशंसनीय कार्य प्रारंभ किया है. अन्य धर्म स्थलों को भी ऐसे उपाय अपनाने चाहिए. स्वच्छता के कार्य में हाथ बंटाकर भी आप गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं.
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