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प्रमदा सब दुख खानि

सुरेश कांत वरिष्ठ व्यंग्यकार पुरुषों की सबसे महत्वपूर्ण खोज शायद यही है कि स्त्री उसके सभी दुखों का कारण है. स्त्री का मानवता की प्रगति में अगर कुछ योगदान है, तो यह कि औरत ने जन्म दिया मर्दों को, जिसका कि बदला मर्दों ने उसे बाजार देकर चुका दिया. इस एक अकेले ढंग के काम […]

सुरेश कांत

वरिष्ठ व्यंग्यकार

पुरुषों की सबसे महत्वपूर्ण खोज शायद यही है कि स्त्री उसके सभी दुखों का कारण है. स्त्री का मानवता की प्रगति में अगर कुछ योगदान है, तो यह कि औरत ने जन्म दिया मर्दों को, जिसका कि बदला मर्दों ने उसे बाजार देकर चुका दिया.

इस एक अकेले ढंग के काम के अलावा स्त्री ने जो भी किया, गलत किया, जिसका नतीजा अंतत: दुखद निकला. इनमें भी सबसे गलत काम यह है कि स्त्री पुरुषों को खामखाह कामोत्तेजित कर देती है, भले ही स्त्री को इसका पता भी न चलता हो कि उसने क्या कर दिया है. आखिर अज्ञानता निरपराध होने का कोई आधार नहीं है. अगर कोई वाहन-चालक किसी को टक्कर मार दे, तो यह कहकर बच नहीं सकता कि उसे पता नहीं था कि टक्कर मारकर किसी को घायल कर देना अपराध की श्रेणी में आता है.

स्त्री के अवगुणों और दुखों की खान होने की बात हमारे संत-महात्मा बखूबी जानते थे, जिससे कि उनके परम ज्ञानी होने का पता चलता है.

कबीर तक ने कहा है कि नारी की परछाई से सांप भी अंधा हो जाता है, फिर हर वक्त नारी के संग रहनेवाले पुरुष की क्या गति होगी, कह नहीं सकते- नारी की झाईं परत अंधा होत भुजंग, कबिरा तिनकी कौन गति, जे नारी के संग! कबीर का यह दोहा उन्हें उच्च कोटि का जंतुविज्ञानी सिद्ध करता है, क्योंकि सांप के बारे में ऐसा किसी और ने नहीं बताया है.

तुलसी ने भी शायद इसलिए ढोल, गंवार, शूद्र और पशु के साथ-साथ नारी को भी ताड़न का अधिकारी बताया है. घर-घर में मर्द जो औरतों की बात-बेबात पिटाई करते रहते हैं, सो औरतों के इस अधिकार को सम्मान देने के लिए ही. औरतें भी चुप रहकर अपने इस अधिकार की रक्षा करती हैं.

तुलसी तो स्त्री-सशक्तीकरण के मामले में और भी आगे हैं. अरण्यकांड में नारद के यह पूछने पर कि आपने मुझे विवाह क्यों नहीं करने दिया, वे खुद भगवान राम के मुंह से कहलवाते हैं कि स्त्री सब दुखों की खान है.

इसलिए मैंने तुम्हें रोका- अवगुन मूल सूलप्रद, प्रमदा सब दुख खानि, ताते कीन्ह निवारन मुनि, मैं यह जियँ जानि. और यही राम खुद न केवल विवाह करते हैं, बल्कि पत्नी का अपहरण हो जाने पर पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों तक से पूछते फिरते हैं- हे खग, मृग, हे मधुकर-स्रेनी, तुम देखी सीता मृगनैनी?

अब कृपया यह न कहें कि तुलसी ने यह बात सामान्य स्त्री के बारे में नहीं, प्रमदा यानी मतवाली स्त्री के बारे में कही है, क्योंकि पुरुष अगर ध्यान न दे, तो कोई स्त्री कितनी भी मतवाली क्यों न हो, उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती. हां, अगर कोई बिगड़ने के लिए तैयार ही बैठा हो, तो सामान्य स्त्री भी उसे मतवाली लग सकती है.

यह बात पुरानी पड़ रही थी और धीरे-धीरे भुलायी जा रही थी कि सौभाग्य से रिजर्व बैंक के सलाहकार एस गुरुमूर्ति ने केरल में हाल ही में आयी विनाशकारी बाढ़ की असली वजह सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं को सबरीमला मंदिर में प्रवेश देना बताकर पुराने ज्ञान को फिर से जीवित कर दिया, जिससे देश उनका जितना भी आभार व्यक्त करे, कम होगा.

Prabhat Khabar Digital Desk
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