जीत का जश्न है, फासले से देखो

Published at :21 May 2014 5:25 AM (IST)
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जीत का जश्न है, फासले से देखो

।। चंचल।। (सामाजिक कार्यकर्ता) चौराहे पर रौनक है. ‘मोबाइल डीजे’ चौराहे के तीन कोनों पर सजा खड़ा है. हेलो हेलो हुआ तो गांव को पता चला की कोइ बरात आनेवाली है या किसी की बरात निकलनेवाली है. गांव में यह नया बदलाव है. पहले बैंड पार्टियां सजती थीं, लेकिन अब उनकी जगह डीजे आ गया […]

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।। चंचल।।

(सामाजिक कार्यकर्ता)

चौराहे पर रौनक है. ‘मोबाइल डीजे’ चौराहे के तीन कोनों पर सजा खड़ा है. हेलो हेलो हुआ तो गांव को पता चला की कोइ बरात आनेवाली है या किसी की बरात निकलनेवाली है. गांव में यह नया बदलाव है. पहले बैंड पार्टियां सजती थीं, लेकिन अब उनकी जगह डीजे आ गया है. एक जीप पर डीजे रहेगा और दूसरे पर उसका मालिक जो गाना बजाता है. उसका भोंपू बहुत तेज होता है. सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दिया, तो शहर का यह कचड़ा गांव में आ गिरा.

चुन्नीलाल क छोटका लड़िका डीजे का बहुत शौकीन है. कोसों चला जाता है डांस करने. यह तो अपने गांव का मामला है. सो हेलो-हेलो सुना तो सीधे चौराहे पर. चौराहे पर टेंट. टेंट के नीचे दरी. दरी पर पंडित जी. पंडित जी के शिष्यगण. परात भर लड्डू. देखते-देखते गांव भर के लड़के टेंट में आ गये. लड़कों की भीड़ ने कीन का मनोबल बढ़ा दिया. कीन ने पंडित के हाथ से ‘मैक’ खींच लिया और जोर से चीखे- रामलला हम आयेंगे. बच्चों ने उसे पूरा किया- मंदिर वहीं बनायेंगे. नारे के बाद कीन ने अडवानी की मुद्रा में एक जोरदार भाषण दिया- भाइयो और बहनों. लखन कहार ने खैनी ठोंका- बहन कहां है? कीन ने घुड़की दी- ब्यवधान न डाला जाये. हम जीत चुके हैं, अब दिल्ली हमारे कब्जे में है. उस ‘खुसी’ में आज यहां ‘सोंदर कांड’ होगा और पब्लिक को लड्डू खिलाया जायेगा. सांती..सब बच्चे बैठ जायें. बच्चे तो बच्चे हैं. बैठना क्या जानें. उन्हें तो डांस और लड्डू से मतलब, और अभी दोनों में देर है.

पंडित जी ने कीन को सामने बैठाया. चंदन लगाया, हाथ में अक्षत, कुश दिया- जजमान! इसमें कुछ ‘द्रब्य’ रख लीजिए. कीन ने टेट से निकाल कर एक रुपया मुठी में रख लिया. पंडित जी ने लोटे के पानी में कुस भिगो कर कीन के ऊपर छिड़का और लगे मंत्र बोलने- जम्मू दीपे भारत खंडे.. गांव का नाम ले लीजिए कीन उपाध्याय. कीन भड़क गये- कीन मत कहिए. असल नाम है चौहर्जा उपाध्याय. अक्खा गांव जान गया की जिसे कीन समझते थे, वह तो चौहर्जा है.

चौराहे पर डीजे सुंदर कांड गा रहा है. कीन ने अपना काम डीजे के सुपुर्द कर दिया और अपने लगे जायका लेने-चौराहे की क्या राय है. आसरे की दूकान पर जमे लोगों ने कीन का स्वागत किया. नवल उपाधिया ने अपने पैर के पंजे पर हाथ की हथेली से ताली पीटने जैसी आवाज निकालते हुए बोले- आवा हो चो..हार्जा. लोग हंस दिये. कीन को बुरा लग गया- मजाक हम भी समझते हैं. यह कह कर कीन मुड़े ही थे की कयूम मियां ने पैलगी की-चो! पालागी. दोनों में 36 का आंकड़ा है. कीन को गुस्सा आ गया- एक बात सुन लो मियां. जमाना बदल गया है अब जरा..कीन अपनी बात पूरी कर पाते, उसके पहले ही चिखुरी ने कीन को डपटा- सुन कीन. गांव ने कई बदला हुआ जमाना देखा है. एक से बढ़ कर एक तोप आये. गांव जस क तस रहा. कीन को मालुम रहा कि चिखुरी का बोलेंगे, चुनांचे बगैर सुने ही लड्डू की तरफ बढ़ गये.

उमर दरजी ने चुटकी काटी- लोग कह रहे हैं कि अब जो लोग बिरोध करेंगे उन्हें पकिस्तान भेज दिहा जाई? चिखुरी ने तरेरा- बकवास तो करियो मत. कौन भेज देगा पाकिस्तान बे? मद्दू का पत्रकार उठ आया- यह देखिए अखबार कह रहा है. यूआर अनंतमूर्ति को किसी ने कराची का टिकट भेजा है. नवल की आंखें गोल हो गयीं- ए भाई! इ तो नाम से हिंदू लग रहा है. मद्दू ने कहा- नवल! किस्सा तोता-मैना, गुल-बकावली के अलावा भी कुछ पढ़े हो? अनंतमूर्ति दुनिया के जाने-माने लेखक हैं. संस्कार, घटश्रद्ध जैसी चीजें उन्होंने ही लिखी है. कितने लोगों को टिकट दोगे? कितने लोगों को देश निकाला करोगे? जीत का जश्न ऐसे मनता है? एक चित्रकार को हम निकाल चुके हैं. आज हम दुनिया के इस सवाल पर जवाब नहीं दे पाते कि हुसैन को देश निकाला क्यों होना पड़ा?

महफिल में सन्नाटा पसर गया. चिखुरी संजीदा हो गये. उनकी आंखें दूर अनंत में खो गयीं. अपने से बुदबुदाने लगे. यह चर्चिल का सपना था कि यह मुल्क टूटे. बार-बार विखंडित हो. पर बड़े जतन से गांधी ने इसे जोड़े रखा. अलग-अलग भाषा, अलग-अलग पहनावा. अलग-अलग रीति-रिवाज और विभिन्नताएं. इसके बावजूद हम इकट्ठा रहे. लेकिन आज हम एक-दूसरे के बीच लकीर खींच रहे हैं. यह गांधी का मुल्क है. गांधी की जड़ें बहुत गहरे उतर चुकी हैं. तानाशाही अब इस मुल्क में नहीं पनप सकती. आज नहीं तो कल हम इस बात को शिद्दत से महसूस करेंगे. मद्दू ने बीच में रोका- एक और खबर है. नीतीश ने इस्तीफा दे दिया है. अब जीतन राम माझी मुख्यमंत्री होंगे. चिखुरी के चेहरे पर चमक आ गयी- शुभ लक्षण है. सत्ता और संगठन के बीच नीतीश की भूमिका का असर होगा. चिखुरी कुछ और बोलते उसके पहले ही नवल ने साइकिल उठा लिया- जब नाम ही जीतन है तो कौन हरायेगा.. एक अपने चो.. हैं. कहते हुए नवल ने कीन को देखा और आगे बढ़ गये..

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